
मधेपुरा। सत्ता की हनक और प्रशासनिक रसूख का मुखौटा पहनकर मासूमों और व्यापारियों को ठगने वाले एक शातिर गिरोह का मधेपुरा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। खुद को बिहार सरकार का ‘प्रधान सचिव’ बताकर रौब गांठने वाली एक महिला और खुद को उसका बॉडीगार्ड बताने वाले उसके पति को पुलिस ने पटना के बिहटा इलाके से गिरफ्तार किया है। इस हाई-प्रोफाइल ठगी कांड ने मधेपुरा से लेकर पटना तक हड़कंप मचा दिया है। आरोपी दंपति ने एक ठेकेदार को सरकारी विभागों में बड़े टेंडर दिलाने का झांसा देकर 34.74 लाख रुपये की मोटी रकम डकार ली। पुलिस की इस कार्रवाई ने उन सफेदपोश अपराधियों के चेहरे से नकाब उतार दिया है जो सरकारी तंत्र का स्वांग रचकर समानांतर लूट की दुकान चला रहे थे।
मधेपुरा के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी इनपुट्स और खुफिया जानकारी के आधार पर पटना के दौलतपुर (बिहटा) में छापेमारी कर इस जालसाज जोड़े को अपनी गिरफ्त में लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भोजपुर जिले के पिरो थाना क्षेत्र के अंगिया गांव निवासी सन्नी कुमार राय और उसकी पत्नी श्रद्धांजलि देवी के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से ठगी के पैसों से खरीदी गई लग्जरी गाड़ी और पीड़ित का छीना हुआ आईफोन भी बरामद किया है।
सिंहेश्वर के सत्संग में बिछी थी ठगी की बिसात
इस पूरे फर्जीवाड़े की कहानी वर्ष 2025 में मधेपुरा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सिंहेश्वर से शुरू होती है। मधेपुरा के वार्ड नंबर 9 निवासी पीड़ित नारायण यादव, जो पेशे से ठेकेदार हैं, उस समय सिंहेश्वर में आयोजित पंडित प्रदीप मिश्रा के शिव महापुराण सत्संग में शामिल होने गए थे। इसी धार्मिक आयोजन के शोर-शराबे और भीड़भाड़ के बीच नारायण यादव की मुलाकात एक आलीशान लग्जरी गाड़ी में सवार एक दंपति से हुई।
गाड़ी की भव्यता और उस पर लगे “बिहार सरकार, प्रधान सचिव सह मिशन निदेशक” के बोर्ड ने नारायण यादव को प्रभावित कर दिया। गाड़ी के भीतर बैठी महिला यानी श्रद्धांजलि देवी ने खुद को एक रसूखदार आईएएस अधिकारी के तौर पर पेश किया, जबकि उसके बगल में बैठे सन्नी कुमार राय ने खुद को उसका सुरक्षाकर्मी (बॉडीगार्ड) बताया। ठगों ने नारायण यादव को यकीन दिला दिया कि मैडम की पहुंच सीधे सचिवालय के गलियारों तक है और वे बिहार के किसी भी विभाग में मनचाहा ठेका दिलवा सकती हैं। धार्मिक माहौल और ‘लाल बत्ती’ के रसूख के संगम ने पीड़ित के मन में संदेह की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी।
झांसा, टेंडर और किश्तों में वसूली का काला अध्याय
प्रारंभिक परिचय के बाद आरोपियों ने नारायण यादव के साथ संपर्क बढ़ाना शुरू किया। सन्नी कुमार राय ने बिचौलिए की भूमिका निभाते हुए नारायण को विभिन्न सरकारी विभागों में निर्माण कार्यों के टेंडर दिलाने का प्रलोभन दिया। ठगों ने दावा किया कि प्रधान सचिव होने के नाते श्रद्धांजलि देवी की फाइलों पर हस्ताक्षर मात्र से करोड़ों के टेंडर उनके पक्ष में हो जाएंगे।
इस सुनियोजित जाल में फंसे नारायण यादव ने धीरे-धीरे अलग-अलग माध्यमों से आरोपियों के बैंक खातों में बड़ी रकमें ट्रांसफर करनी शुरू कर दीं। कभी ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर, तो कभी ‘सिक्योरिटी मनी’ के बहाने आरोपियों ने पीड़ित से कुल 34 लाख 74 हजार रुपये वसूल लिए। जब भी नारायण यादव काम शुरू होने की बात करते, ठग उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं की पेचीदगियों और सचिवालय के फर्जी आदेशों का हवाला देकर टाल देते थे। महीनों बीत जाने के बाद भी जब न तो टेंडर मिला और न ही कोई काम शुरू हुआ, तब नारायण यादव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगने का दबाव बनाना शुरू किया।
मधेपुरा में भिड़ंत और आईफोन की लूट
पैसे वापस मांगने पर ठगों का असली चेहरा सामने आ गया। पीड़ित नारायण यादव ने पुलिस को बताया कि एक बार जब आरोपी सन्नी कुमार राय मधेपुरा आया, तो उन्होंने उसे पकड़ लिया और अपने 34.74 लाख रुपये लौटाने को कहा। लेकिन पैसे लौटाने के बजाय आरोपी ने पीड़ित के साथ हाथापाई शुरू कर दी। सन्नी ने नारायण यादव के हाथ से उनका महंगा एप्पल आईफोन छीन लिया और जान से मारने की धमकी देते हुए अपनी लग्जरी गाड़ी से वहां से फरार हो गया।
इस घटना के बाद नारायण यादव ने हिम्मत जुटाई और मधेपुरा सदर थाने में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर पुलिस ने कांड दर्ज किया और पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम का गठन कर आरोपियों की गिरफ्तारी का जाल बिछाया। पुलिस ने ठगों के मोबाइल लोकेशन और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की, जिससे उनके पटना में छिपे होने के पुख्ता सुबूत मिले।
पटना से गिरफ्तारी और पुराने आपराधिक इतिहास का खुलासा
मधेपुरा पुलिस की विशेष टीम ने पटना पुलिस के सहयोग से बिहटा के दौलतपुर में दबिश दी। वहां से पुलिस ने सन्नी कुमार राय और उसकी पत्नी श्रद्धांजलि देवी को रंगे हाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब इनसे पूछताछ की गई, तो ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि सन्नी कुमार राय अपनी पत्नी को ‘फर्जी आईएएस’ बनाकर बिहार के अलग-अलग जिलों में इसी तरह के ठगी कांडों को अंजाम दे चुका है।
इस दंपति के खिलाफ पहले से भी कई जिलों में ठगी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से उन लोगों को निशाना बनाता था जो कम समय में सरकारी ठेकेदारी के जरिए पैसा कमाना चाहते थे। आरोपियों के पास से बरामद लग्जरी चारपहिया वाहन को पुलिस ने जब्त कर लिया है। पुलिस का मानना है कि यह वाहन भी ठगी की कमाई से ही खरीदा गया था ताकि लोगों पर रौब झाड़ा जा सके।
न्यायिक हिरासत और गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश
मधेपुरा लाए जाने के बाद दोनों आरोपियों से पुलिस ने सघन पूछताछ की। सन्नी कुमार राय, जो मूल रूप से भोजपुर जिले का रहने वाला है, ने स्वीकार किया कि उसने रसूख दिखाने के लिए ही गाड़ी पर फर्जी बोर्ड लगा रखे थे। पुलिस ने मंगलवार को सभी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दंपति को मधेपुरा की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
सदर थानाध्यक्ष ने बताया कि यह मामला केवल 34.74 लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह ने बिहार के अन्य कई ठेकेदारों और कारोबारियों को भी अपना शिकार बनाया होगा जो बदनामी के डर से सामने नहीं आ रहे हैं। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनके स्थानीय संपर्कों की तलाश कर रही है जिन्होंने मधेपुरा में आरोपियों को ठहरने और शिकार ढूंढने में मदद की थी।
प्रशासनिक रसूख के झांसे में न आने की अपील
मधेपुरा पुलिस ने इस खुलासे के साथ ही आम जनता और कारोबारियों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के बाहरी दिखावे, गाड़ी पर लगे बोर्ड या कथित पद के प्रभाव में आकर वित्तीय लेन-देन न करें। सरकारी विभागों में टेंडर और काम मिलने की एक निश्चित और पारदर्शी प्रक्रिया होती है, जिसका पालन करना अनिवार्य है। ‘शॉर्टकट’ के चक्कर में लोग ऐसे शातिर ठगों के जाल में फंस जाते हैं।
नारायण यादव के साथ हुई यह घटना एक सबक है कि कैसे श्रद्धा और विश्वास के आयोजनों का उपयोग अपराधी अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। फिलहाल मधेपुरा की जेल में बंद फर्जी आईएएस और उसके पति से पूछताछ का सिलसिला जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह के कुछ और ‘सफेदपोश’ मददगार बेनकाब होंगे। ‘द वॉइस ऑफ बिहार’ इस मामले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर बनाए हुए है ताकि समाज को ऐसे जालसाजों से जागरूक किया जा सके।


