सज गई मधुशाला; समस्तीपुर के राजकीय मेले में शराबबंदी का ‘जनाजा’, वायरल वीडियो ने उड़ाए प्रशासन के होश; जब रक्षक बने तमाशबीन तो श्रद्धा के आंगन में छलके जाम

समाचार के मुख्य बिंदु: आस्था, राजनीति और ‘अवैध’ जाम का शर्मनाक संगम

  • बड़ी खबर: समस्तीपुर जिले के हलई थाना क्षेत्र स्थित बाबा केवल धाम में आयोजित दो दिवसीय राजकीय मेले में शराब की खुलेआम बिक्री का मामला सामने आया है।
  • वायरल वीडियो का सच: सोशल मीडिया पर तीन अलग-अलग वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें विदेशी शराब की ब्रांडेड बोतलें सरेआम बेची और परोसी जा रही हैं।
  • वीआईपी विदाई और ‘खेल’ शुरू: जिस मेले का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री राजभूषण चौधरी, विधायक रणविजय साहू, जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान ने किया, वहां चंद घंटों बाद ही शराब का बाजार सज गया।
  • रेट और कोडवर्ड: वीडियो में 1500 रुपये प्रति बोतल की मांग और ‘फ्रूटी’ जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल करते हुए अवैध धंधे का पर्दाफाश हुआ है।
  • पुलिस की कार्यशैली: मेले में गश्त कर रही पुलिस की मौजूदगी के बावजूद होटलों में शराब परोसी जाती रही, जिससे प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवालिया निशान लग गया है।
  • VOB इनसाइट: बिहार में शराबबंदी को लागू हुए लगभग एक दशक होने को है, लेकिन समस्तीपुर की यह घटना बताती है कि कानून केवल कागजों और भाषणों तक सीमित रह गया है। एक ‘राजकीय मेला’, जिसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है, वहां अगर पुलिस की आंखों के सामने विदेशी शराब का काउंटर लग जाए, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की मौन सहमति है। यह घटना उस श्रद्धा का भी अपमान है जिसके नाम पर हजारों लोग बाबा केवल धाम पहुँचते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का विश्लेषण कहता है कि जब तक स्थानीय स्तर पर थाना पुलिस की जवाबदेही तय नहीं होगी, ऐसे राजकीय आयोजन ‘अवैध कमाई’ के सुरक्षित अड्डे बने रहेंगे।

समस्तीपुर | 31 मार्च, 2026

​बिहार में पूर्ण शराबबंदी का दावा करने वाली सरकार के लिए समस्तीपुर से आई यह खबर किसी सदमे से कम नहीं है। जिला मुख्यालय से दूर हलई थाना क्षेत्र के बाबा केवल धाम में आयोजित दो दिवसीय राजकीय मेले ने सुशासन की उस छवि को तार-तार कर दिया है, जिसे बनाने के लिए प्रशासनिक अमला दिन-रात जुटा रहता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के इस केंद्र पर सोमवार और मंगलवार की रात जो कुछ हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज और कानून व्यवस्था के लिए शर्मनाक है।

श्रद्धा के आंगन में ‘अवैध’ बाजार: तीन वीडियो जो व्यवस्था को कर रहे नंगा

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तीन वीडियो इस पूरी साजिश की परतें खोल रहे हैं। इन वीडियो को देखने के बाद यह कहना मुश्किल है कि यह वही बिहार है जहाँ शराब को छूना भी गुनाह माना जाता है।

पहला दृश्य: एक वीडियो में तीन अलग-अलग ब्रांड की विदेशी शराब की बोतलें खुले में एक मेज पर रखी दिखाई दे रही हैं। बगल में पानी की बोतल और ग्लास का मौजूद होना यह प्रमाणित करता है कि वहां केवल बिक्री नहीं हो रही थी, बल्कि पीने वालों के लिए पूरा ‘इंतजाम’ किया गया था।

दूसरा दृश्य: यहाँ शराब माफियाओं का दुस्साहस देखने लायक है। वीडियो में शराब की बोतलों को इस तरह प्रदर्शित किया जा रहा है जैसे किसी खुले बाजार में खिलौने बेचे जा रहे हों। बिना किसी डर और हिचकिचाहट के ब्रांड दिखाए जा रहे हैं, जो यह संकेत देता है कि इन तस्करों को प्रशासन का कोई खौफ नहीं था।

तीसरा दृश्य (होटल का ‘बार’): सबसे हैरान करने वाला वीडियो एक अस्थायी होटल का है। यहाँ एक बोतल के लिए 1500 रुपये की मांग की जा रही है। ग्राहक और दुकानदार के बीच हो रही बातचीत में ‘रवि’ नाम के किसी दूसरे तस्कर का भी जिक्र आता है जो कम दाम में माल दे रहा है। इसी बीच एक बुजुर्ग ‘फ्रूटी’ (शराब का कोडवर्ड) का रेट पूछते नजर आते हैं। यह दृश्य बताता है कि मेले के भीतर एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही थी, जहाँ कानून की धज्जियां उड़ाना ही सबसे बड़ा लाभ था।

जब ‘साहब’ गए तो ‘साकी’ आए: उद्घाटन के बाद का सच

​बाबा केवल धाम मेले की गरिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री राजभूषण चौधरी, विधायक रणविजय साहू, जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा और पुलिस कप्तान अरविन्द प्रताप सिंह ने मिलकर किया था। भारी सुरक्षा बल, लाल बत्ती वाली गाड़ियां और खाकी की कतारें गवाह थीं कि यह आयोजन ‘राजकीय’ है। लेकिन जैसे ही इन आलाधिकारियों का काफिला मेले के मुख्य द्वार से निकला, वहां की हवा ही बदल गई।

​प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के महज कुछ ही घंटों बाद रात के अंधेरे में शराब की बोतलें टेबल पर सज गईं। सवाल यह उठता है कि जिस मेले में जिलाधिकारी और एसपी ने स्वयं गश्त की हो, वहां पुलिस की एक पूरी फौज तैनात हो, वहां ये बोतलें कैसे पहुँच गईं? क्या पुलिस की गश्त केवल वीआईपी सुरक्षा तक सीमित थी? या फिर गश्त कर रहे जवानों ने इन होटलों की ओर से अपनी आँखें मूंद ली थीं?

केस प्रोफाइल: राजकीय मेले में शराब का ‘सिंडिकेट’

पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न: “नींद में थी खाकी”

​मेले में आए श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस बात से चकित हैं कि पुलिस की गाड़ियां लगातार सायरन बजाते हुए मेले परिसर में घूम रही थीं, लेकिन उन्हें उन होटलों और ठिकानों की भनक तक नहीं लगी जहाँ शराब बेची जा रही थी। वीडियो में सुनाई देने वाली आवाजें और लोगों की भीड़ यह साफ करती है कि यह सब कुछ खुलेआम हो रहा था।

​वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को यह कहते सुना जा सकता है— “देखो भाई, ये बिहार की शराबबंदी है, राजकीय मेले में शराब का आनंद लीजिए।” यह व्यंग्य सीधे तौर पर उन पुलिसकर्मियों पर है जो ड्यूटी के नाम पर वहां तैनात थे। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मेले में शराब माफियाओं ने पहले ही ‘रास्ता साफ’ कर लिया था, जिसके कारण दूसरे दिन भी बिना किसी डर के व्यापार जारी रहा।

VOB का नजरिया: क्या शराबबंदी केवल एक ‘सफेद हाथी’ है?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस घटना को केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि कानून की हार के रूप में देखता है।

  1. जवाबदेही का अभाव: जब जिलाधिकारी और एसपी स्वयं कार्यक्रम का हिस्सा हों, तो उस क्षेत्र की थाना पुलिस को सबसे अधिक सतर्क होना चाहिए। लेकिन यहाँ ठीक उल्टा हुआ। क्या स्थानीय थानेदार पर इस विफलता के लिए गाज गिरेगी?
  2. राजकीय मेले का अपमान: राजकीय मेले का दर्जा इसलिए दिया जाता है ताकि वहां की संस्कृति और परंपरा को बढ़ाया जा सके। लेकिन समस्तीपुर में इसे ‘शराब के धंधे’ का जरिया बना दिया गया।
  3. जांच की खानापूर्ति: अक्सर ऐसे मामलों में प्रशासन ‘वीडियो की सत्यता’ की जांच के नाम पर महीनों बिता देता है और तब तक मामला ठंडा पड़ जाता है। आवश्यकता है कि उन होटलों को चिन्हित कर तुरंत सील किया जाए और लाइसेंस रद्द हों।
  4. आम जनता का आक्रोश: मेले से लौट रहे परिवारों और बच्चों ने जब इन बोतलों को देखा, तो उन पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? सरकार एक तरफ नशा मुक्ति का संदेश देती है और दूसरी तरफ ऐसे आयोजनों में नियंत्रण खो देती है।

निष्कर्ष: सुशासन के चेहरे पर दाग

​समस्तीपुर का यह वायरल वीडियो बिहार सरकार के लिए एक आईना है। बाबा केवल धाम की पवित्रता को शराब की बोतलों से दूषित करने वालों के साथ-साथ उन पुलिसकर्मियों को भी चिन्हित करना जरूरी है जिनकी नाक के नीचे यह धंधा फला-फूला। फिलहाल, प्रशासनिक आलाधिकारी केवल ‘कार्रवाई की बात’ कह रहे हैं, लेकिन धरातल पर अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस मामले में दर्ज होने वाली एफआईआर, निलंबित होने वाले अधिकारियों के नामों और समस्तीपुर पुलिस द्वारा की जाने वाली छापेमारी की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

नोट: वायरल वीडियो की सत्यता का दावा ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) स्वतंत्र रूप से नहीं करता है। यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो और स्थानीय सूत्रों के आधार पर व्यापक जनहित में तैयार की गई है। पुलिस की आधिकारिक जांच के बाद ही वीडियो की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

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