दिव्यांग युवक की गुमशुदगी में लापरवाही, विभागीय जांच के आदेश
पूर्णिया। फरियादी के आवेदन पर कार्रवाई करने के बजाय उसे जेब में लेकर घूमते रहना केनगर थानाध्यक्ष मुन्ना पटेल को महंगा पड़ गया। मामले की शिकायत सीधे आईजी विवेकानंद तक पहुंची, जिसके बाद उन्होंने थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने का भी आदेश दिया गया है।
जनता दरबार में फूटा पीड़िता का दर्द
यह मामला एक दिव्यांग युवक की गुमशुदगी से जुड़ा है। गत शुक्रवार को आयोजित जनता दरबार में केनगर थाना क्षेत्र के परोरा गांव की एक महिला ने आईजी से न्याय की गुहार लगाई थी। महिला ने बताया कि 29 दिसंबर को उनका दिव्यांग बेटा अचानक घर से लापता हो गया था।
थाने में दिया आवेदन, नहीं हुई कोई कार्रवाई
महिला ने कहा कि काफी खोजबीन के बाद 30 दिसंबर को वह केनगर थाना पहुंची और बेटे की गुमशुदगी की लिखित शिकायत दी, लेकिन थानेदार ने उस आवेदन पर न तो केस दर्ज किया और न ही कोई खोजबीन शुरू कराई।
शिकायत सामने आते ही गिरी गाज
आईजी के जनता दरबार में मामला सामने आते ही जांच कराई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि थानाध्यक्ष ने आवेदन को लंबित रखा और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए आईजी विवेकानंद ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।
विभाग को दिया सख्त संदेश
आईजी ने स्पष्ट किया कि फरियादियों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही या संवेदनहीनता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और अन्य थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।


