“शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष ने गिनाई उपलब्धियां, विपक्ष ने बजट को बताया ‘ठेकेदारी और भ्रष्टाचार बढ़ाने वाला’”

पटना। बिहार विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। यह 18वीं विधानसभा का पहला सत्र था, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई गई, नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ तथा राज्य सरकार ने द्वितीय अनुपूरक बजट सहित कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन से पारित कराया। हालांकि विपक्ष ने सरकार द्वारा दिए गए जवाबों को असंतोषजनक बताया।


नए अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चयन, 237 विधायकों को शपथ

सत्र की शुरुआत 237 नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाकर हुई।

  • प्रेम कुमार को बिहार विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया।
  • नरेंद्र नारायण यादव को नया उपाध्यक्ष बनाया गया।

18वीं विधानसभा का पहला सत्र होने के कारण प्रश्नकाल का संचालन नहीं हुआ, जिससे जनता से जुड़े प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल सका।


91717 करोड़ का अनुपूरक बजट पास, दो अध्यादेश सदन में रखे गए

सरकार की ओर से ₹91,717.11 करोड़ के द्वितीय अनुपूरक बजट को सदन में पेश किया गया और चर्चा के बाद इसे पारित भी करा लिया गया।
बजट में प्रावधान:

  • राजस्व मद — ₹59,064.42 करोड़
  • पूंजीगत मद — ₹32,652.68 करोड़
  • स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय — ₹40,462.99 करोड़

सत्र में राज्यपाल द्वारा स्वीकृत दो अध्यादेश भी पटल पर रखे गए:

  1. बिहार आकस्मिकता निधि संशोधन अध्यादेश 2025
  2. बिहार नगर पालिका संशोधन अध्यादेश 2025

निवेदन और याचिकाओं की स्थिति

सत्र के दौरान:

  • 16 निवेदन प्राप्त, जिनमें से 15 स्वीकृत
  • 9 याचिकाएं, जिनमें से 6 स्वीकृत
  • तीन वित्तीय समितियों के गठन के लिए अध्यक्ष को प्राधिकृत किया गया
  • विश्वविद्यालयों के सीनेट में विधानसभा सदस्यों की नियुक्ति हेतु अध्यक्ष को अधिकार दिया गया

ग्रामीण विकास विभाग के ₹24,500 करोड़ के बजट पर विशेष चर्चा हुई, जबकि अन्य विभागों के बजट को गिलोटिन प्रक्रिया से पारित कराया गया।


विपक्ष का हमला: “जवाब संतोषजनक नहीं, बजट ठेकेदारों के लिए”

विपक्ष की ओर से राजद विधायक आलोक मेहता ने सरकार पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा:

“सरकार ने जिस प्रकार से सप्लीमेंट्री बजट रखा है, वह भ्रष्टाचार को बढ़ाने वाला है और ठेकेदारी को ध्यान में रखकर लाया गया है। समय कम मिला, लेकिन जितना मिला हमने अपनी बात रखी। सरकार जवाब नहीं दे पाई।”

आलोक मेहता ने यह भी कहा कि नए युवा विधायकों का विधानसभा में स्वागत योग्य है, लेकिन जवाबदेही और गंभीर चर्चा की कमी रही।


सत्ता पक्ष का पलटवार: ‘सत्र सफल, विपक्ष मुद्देहीन’

जदयू विधायक मंजीत सिंह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा:

“बहुत सफलतापूर्वक शीतकालीन सत्र संपन्न हुआ। अनुपूरक बजट विकास के लिए आवश्यक था। राजद के लोग जो अखंड भ्रष्टाचार में डूबे हैं, वे आरोप लगाने की स्थिति में नहीं हैं।”

उन्होंने कहा कि सत्र में संसदीय और वैधानिक परंपरा का पूरा पालन हुआ।


तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर विशेषज्ञों की टिप्पणी

राजनीतिक विशेषज्ञ प्रियरंजन भारती ने कहा कि छोटा सत्र होने के बावजूद विपक्ष का आक्रामक तेवर नहीं दिखा।
उन्होंने कहा:

“तेजस्वी यादव तीन दिनों तक सदन में नहीं दिखे, यह अच्छा संदेश नहीं गया। जनता ने एनडीए को भारी जनादेश दिया है, ऐसे में विपक्ष को अभी से रणनीति बनाकर सरकार को घेरना चाहिए था।”

विशेषज्ञ के मुताबिक विपक्ष कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सवाल उठा सकता था, लेकिन सत्र के दौरान विपक्ष दिशाहीन दिखाई दिया।


पांच जननायकों को श्रद्धांजलि

सत्र के दौरान सदन ने पांच जननायकों को शोक प्रस्ताव के माध्यम से श्रद्धांजलि भी दी।


 

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