‘मुजफ्फरपुर कांड जैसी दोहराव की आशंका’, NEET छात्रा मौत पर रोहिणी आचार्य का बड़ा हमला

बोलीं– “पुलिस जांच संदिग्ध, सरकार किसी को बचा रही है”

पटना।शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर सियासत और तेज हो गई है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य ने बिहार पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखा पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने पूरे मामले की जांच पर सवाल खड़े किए हैं।

रोहिणी आचार्य ने लिखा कि जिस तरह मुजफ्फरपुर बालिका गृह (महापाप) कांड में बेटियों को इंसाफ नहीं मिल सका, उसी तरह शंभू गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा को भी न्याय मिलता नजर नहीं आ रहा है।


‘पहले ही रेप से इनकार, पोस्टमॉर्टेम से पहले बयान’

रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट आने से पहले ही पटना पुलिस ने दुष्कर्म की घटना से इनकार कर दिया, जो जांच प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान यह संकेत देते हैं कि किसी को बचाने की कोशिश की जा रही है।


‘घटनास्थल सील नहीं किया, सबूतों से छेड़छाड़ का मौका’

उन्होंने कहा कि

  • घटना स्थल को कई दिनों तक सील नहीं किया गया,
  • जिससे आरोपियों को सबूत मिटाने और छेड़छाड़ करने का पूरा अवसर मिला।

उनका आरोप है कि यह एक गंभीर जांच चूक है।


‘संदिग्धों से पूछताछ तक नहीं’

रोहिणी ने कहा कि

  • परिजनों द्वारा बताए गए आरोपी,
  • संदेह के घेरे में आए लोग,
  • और संदिग्ध भूमिका वाले डॉक्टर—
    इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई और न ही उनसे कड़ी पूछताछ की गई।

‘पैसे लेकर मामला दबाने का दबाव’

अपने पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि

“मृतका के परिजनों पर महिला थानाध्यक्ष और हॉस्टल संचालिका द्वारा पैसे लेकर मामला रफा-दफा करने का दबाव बनाया गया।”

उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी जांच के नाम पर परिवार को बेवजह परेशान किया जा रहा है।


‘DGP ने कहा आत्महत्या, रेप गलत?’

रोहिणी ने आरोप लगाया कि अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि डीजीपी ने परिजनों को बताया कि यह दुष्कर्म नहीं बल्कि आत्महत्या का मामला है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान अपराधियों को “सेफ पैसेज” देने जैसा संदेश देते हैं।


‘बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल’

रोहिणी आचार्य ने अंत में कहा कि जब लगातार ऐसे मामलों में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो बिहार में बेटियों की सुरक्षा और न्याय की गारंटी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

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