
न्यूज डायरी: मायानगरी का ‘ग्लैमर’ और पटना की ‘खाकी’ का कानूनी शिकंजा
- बड़ी कार्रवाई: बॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार दिवंगत वाजिद खान और साजिद खान के सौतेले भाई जावेद शराफत अली खान को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
- ठगी का शिकार: पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी निवासी प्रसिद्ध चिकित्सक डॉक्टर सैयद शाहिद महमूद से फिल्म म्यूजिक बिजनेस के नाम पर 70 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की गई।
- मुंबई से गिरफ्तारी: गांधी मैदान थाना पुलिस ने मुंबई के अंबोली थाना क्षेत्र स्थित आरोपी के आवास पर छापेमारी कर उसे दबोचा और ट्रांजिट रिमांड पर शनिवार को पटना लेकर पहुँची।
- कानूनी प्रक्रिया: रविवार को आरोपी जावेद खान को पटना सिविल कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है।
- नामजद आरोपी: इस जालसाजी के खेल में जावेद खान के साथ प्रकाश भारद्धाज और राकेश शर्मा भी आरोपी हैं, जिनकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।
- VOB इनसाइट: यह मामला केवल एक वित्तीय धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस तरह बॉलीवुड के बड़े नामों का सहारा लेकर प्रभावशाली लोगों को निवेश के नाम पर शिकार बनाया जाता है। साजिद-वाजिद की ख्याति और संगीत जगत में उनके रसूख को ‘हथियार’ बनाकर जावेद खान ने पटना के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर का भरोसा जीता। फिल्म इंडस्ट्री में संगीत के कारोबार का सब्जबाग दिखाना और फिर लाखों रुपये डकार लेना, यह एक सुव्यवस्थित ‘वाइट कॉलर क्राइम’ का हिस्सा नजर आता है। दो साल पुराने इस मामले में पटना पुलिस की मुंबई तक की धमक यह साबित करती है कि कानून के हाथ लंबे हैं और वे ग्लैमर की चकाचौंध के पीछे छिपे अपराधियों तक पहुँचने की ताकत रखते हैं।
पटना | 30 मार्च, 2026
बिहार की राजधानी पटना और मायानगरी मुंबई के बीच रविवार को एक ऐसा कानूनी तार जुड़ा जिसने मनोरंजन जगत और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी। बॉलीवुड के मशहूर संगीत निर्देशक जोड़ी साजिद-वाजिद के नाम से कौन वाकिफ नहीं है, लेकिन उसी परिवार का एक सदस्य अब पटना की सलाखों के पीछे अपनी रातों का हिसाब देगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, साजिद-वाजिद के सौतेले भाई जावेद शराफत अली खान को 70 लाख रुपये की ठगी के संगीन आरोपों में रविवार को जेल भेज दिया गया है। यह पूरी कहानी फिल्म निर्माण और संगीत के व्यापार के नाम पर रची गई एक गहरी साजिश की ओर इशारा करती है।
70 लाख का ‘म्यूजिक’ स्कैम: विश्वास की हत्या और जालसाजी का ताना-बाना
पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी के निवासी डॉक्टर सैयद शाहिद महमूद, जो पेशे से एक सम्मानित चिकित्सक हैं, उन्होंने 1 मार्च 2024 को गांधी मैदान थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। डॉक्टर के अनुसार, उनकी मुलाकात मुंबई के मलाड निवासी जावेद शराफत अली खान से हुई थी। जावेद ने खुद को साजिद-वाजिद का भाई बताकर और फिल्म जगत में अपनी गहरी पैठ का हवाला देकर डॉक्टर को एक बड़े निवेश का प्रस्ताव दिया।

जावेद ने दावा किया कि वह फिल्मों में संगीत से संबंधित एक बड़ा कारोबार शुरू कर रहा है, जिसमें निवेश करने पर भारी मुनाफे की गारंटी है। संगीत के प्रति रुचि और जावेद के पारिवारिक रसूख को देखते हुए डॉक्टर ने भरोसा किया और विभिन्न किश्तों में कुल 70 लाख रुपये जावेद खान और उसके सहयोगियों को सौंप दिए। लेकिन जैसे ही निवेश का समय पूरा हुआ और मुनाफे या मूलधन की वापसी की बात आई, जावेद खान ने अपने रंग बदलने शुरू कर दिए। फोन उठाना बंद कर दिया गया और दफ्तरों के पते बदल दिए गए। डॉक्टर को जब एहसास हुआ कि वे एक बड़े सिंडिकेट के शिकार हो चुके हैं, तब उन्होंने पुलिस की शरण ली।
गांधी मैदान पुलिस का ‘मिशन मुंबई’: अंबोली से पटना तक का सफर
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गांधी मैदान थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने करीब दो साल तक इस मामले के तकनीकी पहलुओं और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की। जब यह पुख्ता हो गया कि पैसा जावेद खान के खातों में गया है और कोई वास्तविक कारोबार नहीं किया गया, तो पुलिस ने गिरफ्तारी का जाल बिछाया।
शनिवार को पटना पुलिस की टीम मुंबई पहुँची। मुंबई पुलिस के सहयोग से अंबोली थाना क्षेत्र स्थित जावेद खान के घर पर दबिश दी गई। अचानक हुई इस छापेमारी से जावेद खान को संभलने का मौका नहीं मिला। पुलिस उसे गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर पटना लेकर आई। पूछताछ के दौरान जावेद ने स्वीकार किया कि उसने डॉक्टर सैयद शाहिद महमूद से 70 लाख रुपये लिए थे, लेकिन उसने दलील दी कि यह रकम व्यापारिक घाटे में चली गई। हालांकि, पुलिस के पास मौजूद साक्ष्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
सह-आरोपी और सफेदपोशों का ‘सिंडिकेट’
इस मामले में केवल जावेद खान ही नहीं, बल्कि दो और नामजद आरोपी हैं—अंधेरी वेस्ट निवासी प्रकाश भारद्धाज और राकेश शर्मा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये दोनों व्यक्ति जावेद खान के ‘ऑपरेशनल हेड’ की तरह काम करते थे। प्रकाश भारद्धाज पर आरोप है कि उसने कागजी कार्रवाई और फिल्म इंडस्ट्री के फर्जी एग्रीमेंट तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
पटना पुलिस अब इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए भी सक्रिय हो गई है। यह आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने पटना के अलावा बिहार के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों में भी कई रसूखदार लोगों को इसी तरह का झांसा देकर करोड़ों रुपये की चपत लगाई है। जावेद खान से हुई प्रारंभिक पूछताछ में कई ऐसे नामों का खुलासा हुआ है जो इस ठगी के साम्राज्य को पर्दे के पीछे से खाद-पानी दे रहे थे।


