खाकी का ‘ट्रैप’ और बैंक साहब का ‘कमीशन’: गया में 10 लाख के मुद्रा लोन पर मांगी थी 95 हजार की घूस! एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक को 40 हजार लेते दबोचे गये?

मुख्य बिंदु:

  • बड़ी कार्रवाई: नीमचक बथानी प्रखंड के सरवहदा स्थित एसबीआई शाखा में दी दबिश।
  • गिरफ्तारी: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के क्षेत्रीय प्रबंधक रवि रंजन कुमार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार।
  • रिश्वत की राशि: ₹10 लाख के मुद्रा लोन को पास कराने के बदले मांगे थे ₹95 हजार; ₹40 हजार लेते हुए पकड़े गए।
  • शिकायतकर्ता: छतनी गांव निवासी निरंजन कुमार, जिन्होंने स्वरोजगार के लिए बैंक में आवेदन किया था।
  • प्रशासनिक हड़कंप: बैंक परिसर में सीबीआई की छापेमारी से कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच मची अफरा-तफरी।

गया (नीमचक बथानी)। ‘धरती के भगवान’ अगर डॉक्टर हैं, तो ‘आर्थिक मसीहा’ बैंकों को माना जाता है, जहाँ एक आम इंसान अपने सपनों को धरातल पर उतारने के लिए कर्ज की आस में जाता है। लेकिन जब इन संस्थानों की ऊंची कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी ही ‘कमीशन’ के खेल में मशगूल हो जाएं, तो आम आदमी का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। गया जिले के नीमचक बथानी प्रखंड अंतर्गत सरवहदा स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की पत्थरकट्टी शाखा में शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पटना टीम ने एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक रवि रंजन कुमार को रिश्वत की रकम के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी केवल एक अधिकारी की नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट तंत्र पर एक कड़ा प्रहार है जो सरकार की जनहितकारी योजनाओं को दीमक की तरह चाट रहा है।

सपनों का सौदा और ‘साहब’ की डिमांड

​इस पूरे भ्रष्टाचार के मामले की शुरुआत तब हुई जब नीमचक बथानी प्रखंड के छतनी गांव निवासी निरंजन कुमार ने अपने छोटे व्यवसाय को विस्तार देने के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुद्रा लोन योजना’ का सहारा लेने का निर्णय लिया। निरंजन ने पत्थरकट्टी स्थित एसबीआई शाखा में ₹10 लाख के ऋण के लिए आवेदन किया। उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी नियमों के अनुसार उन्हें यह सहायता मिल जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

​हालांकि, बैंक के गलियारों में फाइलों की गति उतनी सरल नहीं थी। आवेदन के बाद निरंजन की मुलाकात क्षेत्रीय प्रबंधक रवि रंजन कुमार से हुई। आरोप है कि ऋण स्वीकृत करने और फाइल को आगे बढ़ाने के बदले में क्षेत्रीय प्रबंधक ने सीधे तौर पर कमीशन की मांग कर दी। 10 लाख रुपये के लोन के बदले में साहब ने ₹95 हजार की रिश्वत मांगी। निरंजन के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था, क्योंकि जिस लोन को वे अपने व्यवसाय को खड़ा करने के लिए ले रहे थे, उसका करीब 10 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत में ही जा रहा था।

जाल: जब ‘रंगे हाथ’ पकड़े गए रवि रंजन

​निरंजन कुमार ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय इसके खिलाफ लड़ने का फैसला किया। उन्होंने पटना स्थित कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिक जांच में मामले को सही पाया और क्षेत्रीय प्रबंधक को दबोचने के लिए एक पुख्ता रणनीति (Trap) तैयार की।

​योजना के अनुसार, शुक्रवार को निरंजन कुमार को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹40 हजार लेकर बैंक भेजा गया। जैसे ही निरंजन ने वह राशि रवि रंजन कुमार को थमाई, बैंक परिसर के आसपास सादे लिबास में तैनात अधिकारियों ने दबिश दे दी। क्षेत्रीय प्रबंधक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। टीम ने उनके पास से रिश्वत के वे नोट बरामद किए जिन पर विशेष रासायनिक लेप लगाया गया था। पानी के घोल में हाथ धुलवाते ही जब रवि रंजन की उंगलियों से गुलाबी रंग निकलने लगा, तो उनके चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद बैंक के भीतर सन्नाटा पसर गया।

मुद्रा लोन और बैंकिंग सेक्टर में भ्रष्टाचार की जड़ें

​मुद्रा लोन योजना भारत सरकार की एक ऐसी पहल है जिसका उद्देश्य बिना किसी गारंटी के छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। लेकिन गया की इस घटना ने यह उजागर कर दिया है कि कैसे बैंक अधिकारी इन योजनाओं को अपनी कमाई का जरिया बना लेते हैं। ₹10 लाख के लोन पर ₹95 हजार की मांग यह दर्शाती है कि भ्रष्टाचार की दर कितनी ऊंची हो चुकी है।

​अक्सर यह देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक अधिकारी अनपढ़ या कम जानकार ग्राहकों को कागजी कार्रवाई के नाम पर डराते हैं और फिर फाइल पास करने के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। रवि रंजन कुमार की यह हरकत न केवल बैंकिंग नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ है जो स्वरोजगार के जरिए बिहार की अर्थव्यवस्था में योगदान देना चाहते हैं।

बैंक परिसर में घंटों चली तलाशी और पूछताछ

​गिरफ्तारी के बाद टीम ने रवि रंजन कुमार को हिरासत में ले लिया और बैंक के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया। पत्थरकट्टी शाखा में करीब चार से पांच घंटे तक अधिकारी डटे रहे। इस दौरान क्षेत्रीय प्रबंधक के केबिन, उनकी अलमारी और कंप्यूटर डेटा की गहन जांच की गई। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इससे पहले भी रवि रंजन ने अन्य ग्राहकों से लोन के एवज में पैसे लिए हैं।

​साथ ही, जांच टीम इस पहलू पर भी गौर कर रही है कि क्या इस भ्रष्टाचार के खेल में बैंक के कुछ अन्य कर्मचारी या बिचौलिए भी शामिल हैं। गया के नीमचक बथानी जैसे सुदूर इलाके में बैंक प्रबंधक का इस तरह पकड़ा जाना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बैंक के अन्य कर्मचारी इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन चेहरे पर दिख रही घबराहट बहुत कुछ बयां कर रही है।हालांकि, इस मामले पर बैंक की ओर से फिलहाल स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। SBI गया मुख्य शाखा के पीआरओ अमरेश कुमार ने बताया कि उन्हें इस कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है। जब उनसे अतरी प्रखंड क्षेत्र में तैनात फील्ड ऑफिसर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस संबंध में भी अनभिज्ञता जताई। कहा कि जैसे ही आधिकारिक जानकारी मिलेगी, साझा की जाएगी। लेकिन आधा घंटा बीत जाने के बाद भी बैंक की ओर से कोई अपडेट नहीं दिया गया।

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