निलंबित डीएसपी गौतम कुमार से ईओयू की चार घंटे तीखी पूछताछ, सिलीगुड़ी के आलीशान बंगले और चाय बगानों के सवालों पर साधी चुप्पी

मुख्य बिंदु:

  • ताजा कार्यवाही: आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने निलंबित डीएसपी गौतम कुमार को पटना मुख्यालय तलब कर चार घंटे तक की पूछताछ।
  • संपत्ति का तिलिस्म: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मिले भव्य मकान और चाय बगानों में निवेश को लेकर पूछे गए कड़े सवाल।
  • जांच का दायरा: सीमांचल के ‘सफेदपोशों’ के साथ संदिग्ध रिश्तों और अघोषित संपत्तियों के सत्यापन में जुटी ईओयू की टीमें।
  • व्यवहार: पूछताछ के दौरान डीएसपी ने अधिकांश आरोपों को किया खारिज, जवाब देने में की आनाकानी।
  • पृष्ठभूमि: किशनगंज के एसडीपीओ रहते हुए ठिकानों पर हुई छापेमारी में मिली थी दो दर्जन से अधिक अचल संपत्तियों की जानकारी।

पटना। बिहार पुलिस के भीतर फैले भ्रष्टाचार के दीमक को साफ करने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने अपनी दबिश और तेज कर दी है। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में घिरे निलंबित डीएसपी गौतम कुमार के खिलाफ जांच का घेरा अब पूरी तरह कस चुका है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को पटना स्थित ईओयू के कार्यालय में सवाल-जवाब का एक ऐसा दौर चला जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। करीब चार घंटे तक चली इस मैराथन पूछताछ में ईओयू के विशेषज्ञों ने गौतम कुमार के सामने उन सबूतों की झड़ी लगा दी, जो उनके आय के ज्ञात स्रोतों से कोसों दूर हैं। हालांकि, एक अनुभवी पुलिस अधिकारी होने के नाते गौतम कुमार ने ‘मौन’ और ‘अस्वीकारोक्ति’ को अपना रक्षा कवच बनाया, लेकिन जांच एजेंसी के पास मौजूद पुख्ता इनपुट उनकी मुश्किलें बढ़ाने के लिए पर्याप्त दिख रहे हैं।

चार घंटे का मनोवैज्ञानिक दबाव: सवालों से बचते रहे अधिकारी

​शुक्रवार की दोपहर जब गौतम कुमार ईओयू मुख्यालय पहुँचे, तो उनके चेहरे पर एक अजीब-सी गंभीरता थी। यह इसी सप्ताह में उनसे होने वाली दूसरी बड़ी पूछताछ थी। इससे पहले भी उन्हें करीब पांच घंटे तक जांच अधिकारियों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार की पूछताछ का मुख्य केंद्र बिंदु गौतम कुमार की वे संपत्तियां थीं, जो बिहार की भौगोलिक सीमाओं के पार पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में फैली हुई हैं।

​जांच अधिकारियों ने जब पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मिले उनके आलीशान और भव्य बंगले के निवेश दस्तावेजों के बारे में पूछा, तो गौतम कुमार असहज नजर आए। उन्होंने न केवल इस संपत्ति से जुड़ाव को नकारा, बल्कि यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप द्वेषपूर्ण हैं। चार घंटे के इस सत्र में ईओयू ने उनके बैंक खातों, परिवार के सदस्यों के नाम पर किए गए निवेश और सीमांचल क्षेत्र में उनके रसूख के दुरुपयोग से जुड़े कई सवाल पूछे, लेकिन अधिकांश मौकों पर उन्होंने ‘याद नहीं है’ या ‘यह सच नहीं है’ जैसे संक्षिप्त जवाबों का सहारा लिया।

सिलीगुड़ी का बंगला और चाय बागान: अघोषित निवेश का बड़ा केंद्र

​ईओयू के रडार पर गौतम कुमार की वह संपत्ति सबसे ऊपर है जो सिलीगुड़ी में स्थित है। जांच में यह बात सामने आई है कि यह केवल एक घर नहीं, बल्कि करोड़ों की लागत से बना एक आधुनिक विला है। इसके अतिरिक्त, ईओयू को पश्चिम बंगाल के ही चाय बगानों में बड़े पैमाने पर निवेश के इनपुट मिले हैं। यह संदेह जताया जा रहा है कि किशनगंज में पदस्थापना के दौरान अर्जित की गई अवैध राशि को सफेद करने के लिए इन चाय बगानों का उपयोग ‘शेल’ निवेश के तौर पर किया गया।

​छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि गौतम कुमार के नाम पर या उनके करीबियों के माध्यम से दो दर्जन से अधिक अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की गई है। ईओयू अब इन संपत्तियों के ‘ट्रेल’ की तलाश कर रही है ताकि यह साबित किया जा सके कि इनका भुगतान उन पैसों से हुआ है जिसका कोई वैध रिकॉर्ड नहीं है। चाय बगानों में निवेश की बात इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ नकदी का प्रवाह अधिक होता है, जिससे काले धन को खपाना आसान हो जाता है।

सीमांचल के ‘सफेदपोशों’ से साठगांठ: रसूखदारों की नई लिस्ट

​गौतम कुमार केवल संपत्ति बनाने तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उनके तार सीमांचल के कई प्रभावशाली व्यक्तियों यानी ‘सफेदपोशों’ से भी जुड़े होने की बात सामने आई है। ईओयू की एक विशेष टीम पिछले चार दिनों से सीमांचल के जिलों में डेरा डाले हुए है। इस टीम ने स्थानीय स्तर पर जो इनपुट मुख्यालय भेजे हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं।

​जांच में पाया गया है कि किशनगंज के एसडीपीओ रहते हुए गौतम कुमार ने कुछ खास रसूखदारों को प्रशासनिक सुरक्षा प्रदान की और बदले में अपनी अचल संपत्तियों का विस्तार किया। ईओयू अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जहाँ पुलिस और सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों के बीच अवैध लेन-देन हुआ था। शुक्रवार की पूछताछ में जब इन सफेदपोशों के नाम सामने रखे गए, तो डीएसपी ने स्पष्ट रूप से किसी भी तरह की नजदीकी से इनकार कर दिया। हालांकि, कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

किशनगंज से पटना तक: भ्रष्टाचार की लंबी फेहरिस्त

​गौतम कुमार के पतन की शुरुआत तब हुई जब पिछले सप्ताह ईओयू ने किशनगंज के तत्कालीन एसडीपीओ रहते हुए उनके ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। उस छापेमारी ने न केवल विभाग को चौंका दिया, बल्कि जनता के बीच भी पुलिस की छवि पर सवाल खड़े किए। छापेमारी में जमीन के दर्जनों कागजात, महंगी गाड़ियां और बड़ी मात्रा में नकदी के निवेश से जुड़े दस्तावेज मिले थे।

​तभी से गौतम कुमार विभाग की रडार पर थे। निलंबन की कार्रवाई के बाद अब उन्हें बर्खास्तगी की तलवार लटकती दिख रही है। ईओयू के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की जांच नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि खाकी की आड़ में कोई भी कानून से बड़ा नहीं है। गौतम कुमार ने अपनी पूरी सेवा के दौरान जिस तरह से संपत्तियों का साम्राज्य खड़ा किया, वह किसी पेशेवर जमीन कारोबारी से कम नहीं लगता।

आर्थिक अपराध इकाई की रणनीति: ‘जीरो टॉलरेंस’ पर अमल

​ईओयू अब गौतम कुमार को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी में है। जांच टीम का मानना है कि चार घंटे की पूछताछ में उन्होंने सहयोग नहीं किया है, जिससे अब कड़े कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यदि वे इसी तरह सवालों को टालते रहे, तो ईओयू उनकी संपत्तियों को कुर्क करने और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (पीसीए) के तहत चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया तेज कर देगी।

​सीमांचल में मौजूद टीम अचल संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कर रही है। इसमें जमीन की पैमाइश, वर्तमान बाजार मूल्य और खरीद के समय दिए गए चेक या नकद के विवरण को जुटाया जा रहा है। ईओयू की कोशिश है कि इस मामले को ‘स्पीडी ट्रायल’ के दायरे में लाया जाए ताकि एक भ्रष्ट अधिकारी को जल्द से जल्द सजा दिलाकर एक मिसाल कायम की जा सके।

निष्कर्ष: व्यवस्था के भीतर जवाबदेही का सवाल

​निलंबित डीएसपी गौतम कुमार का मामला बिहार पुलिस के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। जब एक उच्च पदस्थ अधिकारी आय से अधिक संपत्ति के मामले में इस कदर लिप्त पाया जाता है, तो वह पूरे तंत्र की विश्वसनीयता को चोट पहुँचाता है। शुक्रवार की चार घंटे की पूछताछ ने यह साफ कर दिया है कि ईओयू अब किसी भी दबाव में नहीं आने वाली है।

​गौतम कुमार चाहे जितनी भी आनाकानी करें, लेकिन उनके द्वारा सिलीगुड़ी से लेकर सीमांचल तक बनाए गए संपत्तियों के ‘किले’ अब ढहने के कगार पर हैं। आने वाले दिनों में ईओयू कुछ अन्य सफेदपोशों को भी नोटिस भेज सकती है, जिन्होंने इस अवैध साम्राज्य को बनाने में मदद की। यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ सुशासन के दावों की एक बड़ी कसौटी है। फिलहाल, पटना से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैली गौतम कुमार की संपत्तियों का एक-एक पन्ना ईओयू खंगाल रही है, और उम्मीद है कि जल्द ही भ्रष्टाचार की इस बड़ी कड़ी का पर्दाफाश होगा।

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