गया के सरकारी अस्पताल में लापरवाही की हद: व्हीलचेयर नहीं मिला तो युवक स्कूटी लेकर वार्ड में घुसा, बीमार दादी को बैठाकर ले गया बाहर

गया, 7 अप्रैल 2026: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गया जिले के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMMCH) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को अपनी बीमार दादी को वार्ड से बाहर ले जाने के लिए स्कूटी का सहारा लेना पड़ा।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली और व्यवस्था की पोल खोल दी है।

व्हीलचेयर और स्ट्रेचर नहीं मिलने का आरोप
जानकारी के अनुसार, युवक रितिक अपनी 67 वर्षीय दादी को सांस लेने में तकलीफ होने पर अस्पताल में भर्ती कराया था।

पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल में न तो साफ-सफाई की उचित व्यवस्था थी और न ही मरीजों की सही तरीके से देखभाल हो रही थी। जब उसने दादी को दूसरे अस्पताल ले जाने का फैसला किया और स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की मांग की, तो उसे उपलब्धता नहीं होने की बात कहकर टाल दिया गया।

मजबूरी में स्कूटी लेकर वार्ड में पहुंचा युवक
स्थिति से परेशान होकर युवक ने ऐसा कदम उठाया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। वह अपनी स्कूटी सीधे अस्पताल के वार्ड के अंदर तक ले गया और बीमार दादी को उस पर बैठाकर बाहर ले आया।

यह दृश्य न केवल अस्पताल की बदहाली को दर्शाता है, बल्कि मरीजों की स्थिति और उनकी मजबूरी को भी उजागर करता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोई व्यक्ति स्कूटी लेकर वार्ड के अंदर तक कैसे पहुंच गया और वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों या स्टाफ ने उसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?

यह लापरवाही अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

अस्पताल प्रशासन की सफाई
मामला सामने आने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. के.के. सिन्हा ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी वीडियो के माध्यम से मिली है।

उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

गया का यह मामला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। कागजों पर सुविधाएं भले ही उपलब्ध दिखाई जाती हों, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही बयां कर रही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या इससे व्यवस्था में सुधार आता है या नहीं।

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