
पटना, 21 सितंबर।केंद्र सरकार ने मखाना बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले से बिहार के करीब 5 लाख मखाना किसानों की आय और जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आने वाला है। उल्लेखनीय है कि बिहार देश का लगभग 85% मखाना उत्पादन करता है।
मखाना को मिलेगा वैश्विक बाजार
मखाना बोर्ड के गठन से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात को भी नया आयाम मिलेगा। सरकार का दावा है कि इससे बिहार के छोटे किसानों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा और रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।
बीज और अनुसंधान से बढ़ी उत्पादकता
बिहार सरकार ने 2019-20 में मखाना विकास योजना शुरू की थी।
- दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित स्वर्ण वैदेही
- भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, सबौर द्वारा विकसित सबौर मखाना-1
जैसे उन्नत बीजों की वजह से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
उत्पादन का क्षेत्र हुआ तीन गुना
- वर्ष 2012 तक बिहार में मखाना की खेती केवल 13,000 हेक्टेयर में होती थी।
- मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और राज्य सरकार की योजनाओं से यह क्षेत्र बढ़कर अब 35,224 हेक्टेयर हो गया है।
इन 10 जिलों में सबसे ज्यादा उत्पादन
दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया में मुख्य रूप से मखाना की खेती होती है। बढ़ती मांग को देखते हुए अब अन्य जिलों में भी इसका विस्तार हो रहा है।
किसानों की आय और राजस्व में बढ़ोतरी
- वर्ष 2005 से पहले मत्स्य/मखाना जलकरों से राज्य का राजस्व 3.83 करोड़ रुपये था।
- 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये हो गया है। यानी लगभग 4.5 गुना की वृद्धि।
सरकार का कहना है कि मछली पालन और मखाना उत्पादन ने मिलकर बिहार के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।


