
- बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने प्रदेश से अंधेपन और दृष्टि दोष को खत्म करने के लिए ‘बुनियाद केंद्रों’ पर नेत्र जांच शिविर के तीसरे और अंतिम चरण का आगाज़ 6 अप्रैल से कर दिया है।
- इस निर्णायक चरण के दौरान राज्य के 26 जिलों में फैले 51 महत्वपूर्ण केंद्रों पर एक महीने तक सघन जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हर आयु वर्ग के लोगों को मुफ्त परामर्श और उपचार मिलेगा।
- अभियान की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले और दूसरे चरण में अब तक 16,764 नागरिकों की आंखों की जांच पूरी की जा चुकी है।
- राज्य सरकार ने इस महा-अभियान के तहत कुल 1 लाख चश्मा वितरित करने का बड़ा लक्ष्य रखा है, जिसके तहत प्रत्येक केंद्र पर कम से कम एक हजार जरूरतमंदों को चश्मा प्रदान किया जाएगा।
- समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने खुद पुपरी स्थित केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को इस पुनीत कार्य का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया।
पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।
अंधेरे से उजाले की ओर: बिहार का ‘दृष्टि’ संकल्प
बिहार के ग्रामीण और शहरी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में समाज कल्याण विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रदेश में दृष्टि दोष से उत्पन्न होने वाली समस्याओं और अंधेपन की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए ‘बुनियाद केंद्रों’ के माध्यम से एक व्यापक नेत्र जांच अभियान संचालित किया जा रहा है। सोमवार, 6 अप्रैल 2026 से इस अभियान का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। यह अभियान केवल चिकित्सा जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों लोगों के जीवन में नई उम्मीदें जगाने का प्रयास है जो अपनी कमज़ोर दृष्टि के कारण दैनिक कार्यों में पिछड़ रहे थे। प्रत्येक केंद्र पर एक महीने तक चलने वाले इस शिविर में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ एजेंसियों के माध्यम से आंखों की स्क्रीनिंग की जा रही है।
अंतिम चरण का विस्तार: 26 जिलों के 51 केंद्रों पर दस्तक
अभियान के इस तीसरे पड़ाव में भौगोलिक विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। राज्य के 26 जिलों के उन 51 केंद्रों को इस बार शामिल किया गया है जो पिछले चरणों में शेष रह गए थे। इन जिलों में अररिया, अरवल, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गया, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधुबनी, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल और पश्चिमी चंपारण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर ‘राज्य स्वास्थ्य समिति’ द्वारा सूचीबद्ध पेशेवर एजेंसियों के माध्यम से आंखों की स्क्रीनिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह पूरी प्रक्रिया समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संचालित की जा रही है, जो सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।
आंकड़ों की गवाही: पहले दो चरणों की शानदार सफलता
अभियान के पिछले दो चरणों ने सेवा और समर्पण के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रथम चरण 23 मार्च से 24 केंद्रों पर शुरू हुआ था, जबकि द्वितीय चरण 30 मार्च से 26 केंद्रों पर क्रियान्वित किया गया। इन दोनों चरणों के समेकित परिणामों को देखें तो अब तक कुल 16,764 व्यक्तियों के नेत्रों की सफलतापूर्वक जांच की जा चुकी है। जांच के पश्चात विशेषज्ञों ने 14,048 लोगों के लिए चश्मा निर्धारित किया है, जो यह दर्शाता है कि ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा दृष्टि संबंधी विकारों से जूझ रहा था और उन्हें केवल सही परामर्श की आवश्यकता थी।
चश्मा वितरण की पारदर्शी प्रक्रिया: 15 दिनों में मिलेगी ‘नई नजर’
सरकार ने केवल जांच करके अपना पल्ला नहीं झाड़ा है, बल्कि समाधान को भी समयबद्ध बनाया है। शिविर में जिन व्यक्तियों के लिए चश्मा निर्धारित किया जा रहा है, उन्हें जांच की तिथि से ठीक 15 दिनों के भीतर चश्मा उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रत्येक केंद्र पर कम से कम एक हजार चश्मा बांटने की योजना है, जिससे पूरे प्रदेश में 1 लाख लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य प्राप्त करना आसान होगा। यह चश्मा उन लोगों के लिए एक वरदान साबित होगा जो आर्थिक तंगी के कारण इसे खरीदने में सक्षम नहीं थे।
सचिव बंदना प्रेयषी का निरीक्षण: पुपरी में व्यवस्थाओं को परखा
रविवार को समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने सीतामढ़ी जिले के पुपरी स्थित बुनियाद केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र की व्यवस्थाओं और वहां उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान सचिव ने शिविर में उपस्थित आम लोगों से सीधा संवाद किया और उनसे मिल रही सुविधाओं तथा व्यवहार के बारे में जानकारी ली। उन्होंने केंद्र प्रबंधकों को सख्त हिदायत दी कि इस विशेष शिविर के बारे में स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए ताकि दूर-दराज के गांवों में रहने वाले गरीब और बुजुर्ग व्यक्ति भी इस सुविधा का लाभ उठा सकें। सचिव ने लोगों से अपील की कि वे अपनी आंखों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और इस सरकारी पहल का हिस्सा बनें।
‘सक्षम’ की हेल्पलाइन: 18003456262 पर मिलेगी हर जानकारी
आम जनता की सुविधा और जानकारी के लिए ‘सक्षम’ के माध्यम से एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। कोई भी व्यक्ति अपने घर बैठे टोल-फ्री नंबर 18003456262 पर कॉल करके अपने नजदीकी बुनियाद केंद्र की स्थिति, शिविर की आगामी तिथियों और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस डिजिटल मदद के माध्यम से विभाग का प्रयास है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सूचना के अभाव में इस निःशुल्क सेवा से वंचित न रह जाए।
अंधेपन के खिलाफ निर्णायक जंग
बिहार में नेत्र जांच का यह तीसरा चरण दरअसल अंधेपन के विरुद्ध एक निर्णायक लड़ाई है। बुनियाद केंद्रों के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में समावेशी विकास की ओर बढ़ रही है। 1 लाख चश्मा बांटने का संकल्प केवल एक संख्या नहीं, बल्कि 1 लाख चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश है। जैसे-जैसे जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बिहार की जनता को एक स्वस्थ और स्पष्ट दृष्टि मिल रही है।


