भागलपुर JDU में ‘विवेकानंद’ युग की शुरुआत! पटना से आया ‘फरमान’, भारी घमासान के बीच विवेकानंद गुप्ता बने नए जिलाध्यक्ष

HIGHLIGHTS:

  • बड़ी ताजपोशी: कार्यकारी जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता के सिर सजा भागलपुर (ग्रामीण) JDU जिलाध्यक्ष का ताज।
  • पटना से फैसला: स्थानीय स्तर पर ‘जिच’ और आम सहमति न बनने के बाद प्रदेश मुख्यालय ने लिया निर्णय।
  • सियासी घमासान: पूर्व जिलाध्यक्ष की पत्नी समेत 13 दावेदारों को पछाड़कर मारी बाजी।

भागलपुर जदयू में ‘दंगल’ खत्म: ‘विवेकानंद’ पर नीतीश का भरोसा

भागलपुर: लंबे समय से चल रहे सस्पेंस और गुटबाजी के शोर के बीच आखिरकार भागलपुर जदयू को अपना नया ‘कैप्टन’ मिल गया है। मौजूदा कार्यकारी जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता को अब पूर्णकालिक जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) नियुक्त किया गया है। बुधवार को पटना स्थित प्रदेश मुख्यालय से जारी 25 जिला अध्यक्षों की सूची में विवेकानंद गुप्ता के नाम पर मुहर लगा दी गई। इस घोषणा के साथ ही जिले की राजनीति में चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

[सियासी बिसात: ‘विनु बिहारी’ बनाम 12 अन्य दावेदार]

​बता दें कि भागलपुर जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए पार्टी के भीतर जबरदस्त खींचतान देखने को मिली थी। सांगठनिक चुनाव के दौरान किसी एक नाम पर सहमति बनाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा था:

दावेदार का नाम

प्रोफाइल/पृष्ठभूमि

विवेकानंद गुप्ता

मौजूदा कार्यकारी जिलाध्यक्ष (विजयी)

विनु बिहारी

पूर्व जिलाध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह की पत्नी

अन्य दावेदार

12 अन्य सक्रिय पार्टी नेता

जब ‘आम सहमति’ फेल हुई, तो पटना ने संभाला मोर्चा

​भागलपुर में चुनाव समिति के अध्यक्ष अर्जुन साह के नेतृत्व में कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन कोई भी दावेदार पीछे हटने को तैयार नहीं था।

  • जिच का माहौल: स्थानीय स्तर पर सहमति न बनने के कारण सभी 13 दावेदारों की सूची बनाकर प्रदेश मुख्यालय भेज दी गई थी।
  • संवैधानिक प्रक्रिया: नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता ने बताया कि पार्टी के संविधान के अनुसार, जब निचले स्तर पर निर्णय नहीं होता, तब प्रदेश इकाई हस्तक्षेप करती है। प्रदेश नेतृत्व ने उनके काम और अनुभव को देखते हुए उन पर भरोसा जताया है।

क्या गुटबाजी पर लगेगा लगाम?

​विवेकानंद गुप्ता के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बिखरे हुए कुनबे को एक साथ लाने की है। पूर्व जिलाध्यक्ष विपिन बिहारी सिंह की पत्नी विनु बिहारी का नामांकन इस बात का संकेत था कि पार्टी के पुराने दिग्गज भी अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहते थे। अब देखना दिलचस्प होगा कि विवेकानंद गुप्ता इन 12 अन्य दावेदारों को साथ लेकर संगठन को ‘मिशन 2026’ के लिए कैसे मजबूत करते हैं।

VOB का नजरिया: नीतीश की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘कंट्रोल’ का संदेश!

भागलपुर में विवेकानंद गुप्ता की ताजपोशी यह बताती है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब विवादों के बजाय ‘निरंतरता’ (Continuity) को प्राथमिकता दे रहे हैं। विवेकानंद पहले से कार्यकारी भूमिका में थे, इसलिए उनकी नियुक्ति संगठन में किसी बड़े झटके (Shock) के बिना सत्ता परिवर्तन जैसा है। हालांकि, 13 दावेदारों का होना यह भी दिखाता है कि जदयू में नेतृत्व की ‘महत्वाकांक्षा’ चरम पर है। विवेकानंद के लिए कांटों भरा ताज है, क्योंकि उन्हें उन दिग्गजों को भी संतुष्ट करना होगा जो इस रेस में पीछे छूट गए हैं।

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