
HIGHLIGHTS:
- बड़ी बैठक: तेजस्वी यादव के आवास ‘1 पोलो रोड’ पर अख्तरुल ईमान के साथ हुई अहम मुलाकात।
- किंगमेकर ओवैसी: समर्थन पर अख्तरुल बोले— “दिल्ली दरबार (ओवैसी) से हरी झंडी मिलने के बाद ही होगा फैसला।”
- नंबर गेम: 35 (महागठबंधन) + 5 (AIMIM) = 40; जादुई आंकड़े (41) से अब केवल 1 कदम दूर राजद।
पटना में ‘खेला’ होने की सुगबुगाहट: 1 पोलो रोड पर बनी रणनीति
पटना: बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने अब ‘कांटे की टक्कर’ का रूप ले लिया है। बुधवार को राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव और AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान के बीच हुई एक घंटे की मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हालांकि, बैठक के बाद अख्तरुल ईमान ने साफ कर दिया कि अंतिम मुहर हैदराबाद से एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ही लगाएंगे।
तेजस्वी का ‘इफ्तार’ दांव और सकारात्मक संकेत
मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव काफी आत्मविश्वास में नजर आए। उन्होंने न केवल इस मीटिंग को सकारात्मक बताया, बल्कि एक नया ‘सियासी संदेश’ भी दिया:
- इफ्तार पॉलिटिक्स: तेजस्वी को 15 मार्च के लिए इफ्तार का न्योता मिला है, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया है।
- संवाद के द्वार: तेजस्वी ने स्वीकार किया कि ओवैसी की पार्टी के साथ संवाद का रास्ता अब पूरी तरह खुल चुका है।
[राज्यसभा का गणित: कैसे पार लगेगी राजद की नैया?]
बिहार की एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। वर्तमान स्थिति कुछ इस तरह बन रही है:
पार्टी/गठबंधन | विधायकों की संख्या | स्थिति |
|---|---|---|
महागठबंधन (राजद+कांग्रेस+वामदल) | 35 | उम्मीदवार: ए.डी. सिंह |
AIMIM | 05 | समर्थन पर फैसला सुरक्षित (ओवैसी के हाथ में) |
कुल संभावित (GA + AIMIM) | 40 | जादुई आंकड़ा: 41 |
मास्टर स्ट्रोक: अगर ओवैसी समर्थन का फैसला लेते हैं, तो राजद के पास 40 वोट हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में तेजस्वी यादव को केवल बसपा (BSP) के एकमात्र विधायक का समर्थन जुटाना होगा, जिससे उनकी जीत पक्की हो जाएगी।
ईमान की शर्तें और ओवैसी का रुख
अख्तरुल ईमान ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “तेजस्वी जी ने मिलने की ख्वाहिश जताई थी, इसलिए हम आए। बातचीत अच्छी रही, लेकिन हम अपनी विचारधारा और शर्तों के साथ समझौता नहीं करेंगे। ओवैसी साहब से चर्चा के बाद ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी।” गौर करने वाली बात यह है कि राजद ने अभी तक एआईएमआईएम को महागठबंधन में विधिवत शामिल करने पर कोई ठोस बयान नहीं दिया है, जो ओवैसी की पार्टी के लिए एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।


