90 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर किया गया सम्मानित
भागलपुर | चंपानगर स्थित महाशय ड्योढ़ी परिसर में ज्योति कला संगम महाविद्यालय द्वारा वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव 2025 का भव्य और यादगार आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कला, संस्कृति और प्रतिभा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर जिले के कला एवं संस्कृति क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राजीवकांत मिश्रा, अंकित रंजन, डॉ. श्रीकांत मंडल, सुश्री अपर्णा कुमारी एवं जिला परिषद अध्यक्ष विपिन मंडल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
संस्थान की भूमिका और उपलब्धियों पर प्रकाश
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक प्राचार्य चंचल कुमार सिंह ने विषय प्रवेश करते हुए महाविद्यालय की स्थापना, उद्देश्य और कला के क्षेत्र में उसकी उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्योति कला संगम महाविद्यालय केवल कला प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि समाज निर्माण का एक सशक्त मंच है। संस्थान से प्रशिक्षित छात्र आज विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रहे हैं।
90 सफल छात्र-छात्राएं हुए सम्मानित
इस अवसर पर राज्य के विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थानों में कार्यरत लगभग 90 प्रतिभावान एवं सफल छात्र-छात्राओं को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर छात्र-छात्राओं के चेहरे पर आत्मविश्वास और गर्व साफ झलक रहा था।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
सांस्कृतिक उत्सव के दौरान शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, लोकनृत्य और प्रख्यात व्यंग्यकार शरद जोशी की चर्चित रचना “सरकार का जादू” का प्रभावशाली मंचन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और तालियों की गूंज से पूरा परिसर गूंज उठा।
गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में भागलपुर के सांसद, भागलपुर नगर विधायक सहित प्रसिद्ध कला गुरु शंकर मिश्रा, मिथिलेश कुमार, देवाशीष बनर्जी, तरुण घोष, दीपक कुमार, सुनील कुमार रंग समेत बड़ी संख्या में कला प्रेमी, शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कला और संस्कृति के संरक्षण का संदेश
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को कला और संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को निखारने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने ज्योति कला संगम महाविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की अपेक्षा जताई।


