बीटिंग रिट्रीट के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन

विजय चौक देशभक्ति की धुनों से गूंजा, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री रहे मौजूद

नई दिल्ली।77वें गणतंत्र दिवस समारोह का गुरुवार शाम बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ भव्य और गरिमामय समापन हुआ। राष्ट्रपति भवन के सामने स्थित विजय चौक भारतीय धुनों, सैन्य बैंडों की गूंज और देशभक्ति के संगीत से सराबोर हो उठा। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंडों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को भावनाओं से भर दिया।

इस वर्ष के समारोह में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शक्ति और देश की सैन्य सामर्थ्य को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। साथ ही, ड्यूटी पर तैनात भारतीय जवानों के साहस और बलिदान को भी संगीतमय श्रद्धांजलि दी गई।


भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर रखे गए दर्शक दीर्घा के सेक्टर

इस वर्ष समारोह की एक विशेष पहचान यह रही कि विजय चौक में दर्शकों के बैठने के सभी सेक्टरों को भारतीय संगीत वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए। इनमें
बांसुरी, तबला, सितार, वीणा, शहनाई, मृदंगम, सरोद और संतूर जैसे नाम शामिल रहे, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बने।


राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रहे उपस्थित

समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, तीनों सेनाओं के प्रमुख, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति के विजय चौक पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने उनका स्वागत किया।


राष्ट्रगान के साथ हुआ राष्ट्रपति का पारंपरिक स्वागत

राष्ट्रगान की धुन के बीच राष्ट्रपति के आगमन पर उन्हें राष्ट्रपति अंगरक्षक दल द्वारा शाही परंपरा के अनुरूप एस्कॉर्ट किया गया। यह दृश्य गणतंत्र दिवस समारोह के गरिमामय समापन का प्रतीक रहा।


‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत मास्ड बैंड की प्रसिद्ध धुन ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से हुई। इसके बाद पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड ने
‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली-जुली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं।


सीएपीएफ और वायुसेना बैंड ने बढ़ाया जोश

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड ने
‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनों से दर्शकों में जोश भर दिया।
वहीं भारतीय वायुसेना के बैंड ने
‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ जैसी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।


नौसेना और थल सेना की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

भारतीय नौसेना के बैंड ने
‘नमस्ते’, ‘सागर पवन’, ‘मातृभूमि’, ‘तेजस्वी’ और ‘जय भारती’ की धुनें बजाईं।
भारतीय थल सेना के बैंड ने
‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’ और ‘सितारे हिंद’ जैसी प्रेरणादायी धुनों से माहौल देशभक्ति से भर दिया।


‘सारे जहां से अच्छा’ के साथ हुआ समापन

अंत में मास्ड बैंड ने
‘भारत की शान’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘ड्रमर्स कॉल’ प्रस्तुत की।
इसके बाद बगलर्स द्वारा बजाई गई धुन ‘सारे जहां से अच्छा’ के साथ समारोह का पारंपरिक और भावुक समापन हुआ।

इस भव्य कार्यक्रम के मुख्य कंडक्टर स्क्वाड्रन लीडर लैमापोकपम रूपचंद्र सिंह रहे। थल सेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय बलों के अलग-अलग कंडक्टरों ने अपनी-अपनी टुकड़ियों का नेतृत्व किया।


 

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