पटना के पीएंडएम मॉल में चला ‘आतंकी हमला’, बाद में खुला राज — मॉकड्रिल ने परखी सुरक्षा तैयारियां

मंगलवार दोपहर 12 बजे का समय, गोलियों की गूंज और अफरातफरी… लेकिन ये था सुरक्षा एजेंसियों का रिहर्सल

पटना: मंगलवार को राजधानी पटना के पाटलिपुत्र-कुर्जी रोड स्थित पीएंडएम मॉल में अचानक दो तेज धमाकों के बाद अफरातफरी मच गई। लोगों को समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। देखते ही देखते चार संदिग्ध युवक AK-47 और AK-56 जैसे हथियारों से लैस होकर मॉल में घुस गए और तीसरी मंजिल पर पांच लोगों को बंधक बना लिया।

हकीकत में यह एक मॉकड्रिल थी, जिसे एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) ने एक आतंकवादी हमले की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित किया था। इस मॉकड्रिल के दौरान मॉल में मौजूद लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी, जिससे कुछ देर के लिए वास्तविक भय और तनाव का माहौल बन गया।


कैसे हुआ ऑपरेशन?

  • जैसे ही आतंकियों ने मॉल में एंट्री की, बम फेंका और सीधे एक्सक्लेटर से तीसरी मंजिल पर पहुंच गए।
  • फूड कोर्ट में मौजूद ग्राहकों और दुकानदारों को बंधक बना लिया
  • मॉल का अलार्म बजा और चंद मिनटों में मॉल खाली करा लिया गया
  • एटीएस की स्वॉट टीम, बम निरोधक दस्ते और स्वान दस्ते के साथ कुर्जी मोड़ से मार्च करते हुए मॉल पहुंची
  • जवान बुलेटप्रूफ जैकेट से लैस होकर पीछे के रास्ते से मॉल में दाखिल हुए।
  • दोनों ओर से फायरिंग का सीन तैयार हुआ और अंत में आतंकियों को मार गिराया गया, बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया।

लोगों में दिखा डर, बच्चों और महिलाओं ने रोना शुरू किया

मॉकड्रिल की जानकारी न होने के कारण मॉल में मौजूद ग्राहक डर के मारे सामान छोड़कर भागने लगे। कुछ बच्चों और महिलाओं ने रोना शुरू कर दिया। बाद में जब बताया गया कि यह एक पूर्व नियोजित अभ्यास था, तब जाकर लोगों को राहत मिली।


देशभर में चल रही है सुरक्षा मॉकड्रिल की श्रृंखला

बताया गया कि यह मॉकड्रिल देशभर में चल रही उस सुरक्षा अभ्यास श्रृंखला का हिस्सा है, जो धार्मिक स्थलों और व्यावसायिक परिसरों की आतंकी हमलों से सुरक्षा तैयारियों की जांच के उद्देश्य से की जा रही है।

एटीएस अधिकारियों ने मॉल की सुरक्षा व्यवस्था की भी गहन जांच की और आपात स्थिति में कैसे रिस्पॉन्ड किया जाए, इसका अभ्यास सुरक्षाकर्मियों को कराया गया।

यह मॉकड्रिल दिखाती है कि बिहार पुलिस और एटीएस आतंकवादी हमलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। साथ ही, इसने सुरक्षा एजेंसियों को यह मौका भी दिया कि वे अपने रेस्पॉन्स टाइम और रणनीति की वास्तविक स्थिति में जांच कर सकें।


 

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