पटना, 23 जुलाई 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच तनाव गहराता जा रहा है। बुधवार शाम पटना स्थित पार्टी कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि महागठबंधन विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने पर विचार कर सकता है।
“वोटर के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर जब बेईमानी से ही सब तैयार कर लिया गया है, तो अब देखा जाएगा कि हम क्या कर सकते हैं।”
— तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष
महागठबंधन में विचार-विमर्श की तैयारी
तेजस्वी यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर महागठबंधन की सभी पार्टियों के बीच गहन विचार-विमर्श किया जाएगा और जनता की राय भी ली जाएगी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि “जब वोटर लिस्ट से नाम ही काट दिए जाएंगे, तो चुनाव कराने का मतलब क्या है?”
वोटर वेरिफिकेशन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप
चुनाव आयोग द्वारा जारी विशेष सघन पुनरीक्षण (Special Summary Revision) के आंकड़ों ने बिहार में राजनीति को गरमा दिया है। आयोग के अनुसार:
- 7.5 लाख से अधिक लोगों ने दोहरी वोटर आईडी बनवा रखी है।
- 52.3 लाख से अधिक मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं मिले, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद विपक्ष का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि सरकार विरोधी मतदाताओं को बाहर किया जा सके।
विपक्ष का आरोप: नए नियमों से मतदाता सूची में हेरफेर
तेजस्वी यादव और महागठबंधन के अन्य नेताओं का कहना है कि नए वोटर वेरिफिकेशन नियमों की आड़ में जनता की मताधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि:
- अधिकतर कटे हुए नाम ग्रामीण, दलित, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के हैं।
- कई पुराने और वास्तविक वोटर तकनीकी कारणों से लिस्ट से बाहर हो सकते हैं।
- चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं, बल्कि सरकारी दबाव में काम कर रहा है।
अगला कदम क्या होगा?
तेजस्वी यादव ने संकेत दिए कि यदि यह प्रक्रिया ऐसे ही जारी रही तो चुनाव में भाग लेना ही बेईमानी के समर्थन जैसा होगा। ऐसे में चुनाव बहिष्कार एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसका अंतिम निर्णय जनता और सहयोगी दलों से विमर्श के बाद लिया जाएगा।
विधानसभा चुनावों से पहले ही बिहार की राजनीति गरमाई हुई है। एक तरफ चुनाव आयोग मतदाता सूची को शुद्ध करने का दावा कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की सियासत का सबसे विवादास्पद केंद्र बन सकता है।


