
Tejashwi Yadav को छह साल पुराने मामले में राहत मिल गई है। गुरुवार को वह एमपी/एमएलए कोर्ट पहुंचे, जहां विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार मालवीय की अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद उन्होंने जमानत की अर्जी दाखिल की। अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें बेल दे दी।
कोर्ट से बाहर निकलकर सरकार पर साधा निशाना
जमानत मिलने के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान प्रशासन ने उन पर “जबरदस्ती” मुकदमा दर्ज किया था। उन्होंने कहा कि उस समय जनता की समस्याओं और प्रवासी मजदूरों की परेशानियों को लेकर उन्होंने धरना-प्रदर्शन किया था।
तेजस्वी यादव ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते लोगों की आवाज उठाना उनकी जिम्मेदारी थी और उसी सिलसिले में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को लेकर किया था प्रदर्शन
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोरोना काल देश और बिहार के लिए बेहद कठिन दौर था। उस समय बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों से पैदल बिहार लौट रहे थे और कई लोगों को रास्ते में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान सरकार और प्रशासन की ओर से मजदूरों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। ट्रेन और परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण लोग पैदल घर लौटने को मजबूर थे।
Tejashwi Yadav ने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी थी कि वह मजदूरों, गरीबों और आम लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाए।
‘जनता की आवाज उठाना अपराध नहीं’
तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के मुद्दे उठाने वाले नेताओं पर कार्रवाई करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष आगे भी लोगों के अधिकारों और सुविधाओं के लिए आवाज उठाता रहेगा।
कोरोना गाइडलाइन उल्लंघन से जुड़ा है मामला
दरअसल, कोविड महामारी और लॉकडाउन के दौरान बिहार में प्रवासी मजदूरों और अन्य मुद्दों को लेकर कई राजनीतिक दलों ने प्रदर्शन किए थे। उसी दौरान प्रशासन ने कोरोना गाइडलाइन उल्लंघन समेत अन्य धाराओं में कई प्राथमिकी दर्ज की थीं। तेजस्वी यादव का मामला भी उसी दौर से जुड़ा बताया जा रहा है।


