
पटना। बिहार की राजधानी में महिला सशक्तिकरण और राजनैतिक आरक्षण को लेकर चल रहा ‘जुबानी जंग’ अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित महिला आक्रोश मार्च के जवाब में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी अपनी राजनैतिक ढाल और तलवारें निकाल ली हैं। राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर केंद्र की एनडीए सरकार और भाजपा को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए कई कड़े सवाल दाग दिए हैं। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को मीडिया से मुखातिब होते हुए तेजस्वी यादव ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ भाजपा के दावों की हवा निकालने की कोशिश की। उन्होंने न केवल महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में हो रही देरी पर सवाल उठाए, बल्कि एनडीए के भीतर महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी तीखा हमला किया। तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की राजनीति में उस वक्त आया है जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही ‘आधी आबादी’ को अपनी ओर खींचने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं।
तीन साल का हिसाब: कानून बना तो लागू क्यों नहीं हुआ?
तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर सबसे बड़ा सवाल महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) की समयसीमा को लेकर खड़ा किया। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब तीन साल पहले ही इस बिल को संसद के दोनों सदनों से हरी झंडी मिल चुकी थी, तो इसे अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतारा गया? नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून बन चुका है, लेकिन भाजपा इसे लागू करने के बजाय केवल आयोजनों और रैलियों में इसका इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण की आड़ में भाजपा ने ‘परिसीमन’ (Delimitation) और ‘जनगणना’ का जो पेंच फंसाया है, वह दरअसल महिलाओं को उनके हक से वंचित रखने की एक गहरी साजिश है। तेजस्वी यादव ने कहा, “भाजपा की नीति केवल श्रेय लेने की है, काम करने की नहीं। यदि वे सच में महिलाओं को आरक्षण देना चाहते, तो इसके लिए 2029 या उसके बाद के परिसीमन का इंतजार करने की जरूरत नहीं थी।” उन्होंने मांग की कि आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए, न कि भविष्य के किसी अनिश्चित कालखंड के भरोसे छोड़ना चाहिए।
एनडीए का ‘महिला विरोधी’ चेहरा: बिहार की उपेक्षा का आरोप
तेजस्वी यादव ने अपने हमले को और पैना करते हुए बिहार के संदर्भ में एनडीए की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने एक बहुत ही गंभीर राजनैतिक तथ्य को सामने रखते हुए कहा कि केंद्र में एनडीए की सरकार ने आज तक बिहार से किसी महिला को मंत्री बनाना जरूरी नहीं समझा। तेजस्वी ने पूछा कि क्या एनडीए को बिहार में एक भी ऐसी महिला नेता नहीं मिली जो केंद्र में प्रतिनिधित्व कर सके? यह सवाल सीधे तौर पर बिहार के उन महिला मतदाताओं के गौरव से जुड़ा है जिनके नाम पर भाजपा आज आक्रोश मार्च निकाल रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा महिलाओं के प्रति केवल चुनावी हमदर्दी दिखाती है, जबकि हकीकत में वह उन्हें निर्णायक पदों पर बैठने से रोकती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि एनडीए पहले अपने भीतर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करे और फिर विपक्ष पर उंगली उठाए। तेजस्वी के अनुसार, केंद्र में बिहार की महिलाओं की शून्य भागीदारी यह साबित करती है कि भाजपा के लिए ‘नारी शक्ति’ केवल एक चुनावी नारा है, न कि कोई संवैधानिक प्रतिबद्धता।
आरक्षण में आरक्षण: राजद की ‘न्याय’ वाली मांग
आरक्षण के स्वरूप को लेकर भी तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी और गठबंधन का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कोई भी दल महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे इसके वर्तमान स्वरूप में ‘सामाजिक न्याय’ की कमी को लेकर चिंतित हैं। तेजस्वी ने कहा, “हम तो 50 फीसदी महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में हैं, लेकिन हमारी मांग है कि इस आरक्षण के भीतर भी आरक्षण (Quota within Quota) होना चाहिए।”
राजद की मांग है कि पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए इस 33 या 50 प्रतिशत आरक्षण के भीतर विशेष कोटा निर्धारित किया जाए। तेजस्वी का तर्क है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो आरक्षण का सारा लाभ केवल प्रभुत्वशाली वर्गों की महिलाओं तक सिमट कर रह जाएगा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी ग्रामीण और गरीब महिलाएं फिर से राजनीति की मुख्यधारा से बाहर रह जाएंगी। उन्होंने कहा कि राजद की लड़ाई उस सामाजिक न्याय के लिए है जो हर वर्ग की महिला को सशक्त बनाए।
आंकड़ों की जुबानी: राजद का महिलाओं को ‘टिकट’ वाला हिसाब
विपक्ष को महिला विरोधी बताने वाले भाजपा के आरोपों पर तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी का ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश किया। उन्होंने पिछले दो बड़े चुनावों के आंकड़े देते हुए बताया कि राजद ने कथनी और करनी में अंतर नहीं रखा है।
- लोकसभा चुनाव 2024: तेजस्वी के अनुसार, राजद ने बिहार में सर्वाधिक 29 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया, जो किसी भी अन्य बड़े दल के मुकाबले कहीं अधिक था।
- विधानसभा चुनाव 2025: पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में भी राजद ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सबसे अधिक 17 प्रतिशत महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा।
- संगठनात्मक भागीदारी: तेजस्वी ने गर्व से कहा कि विधान परिषद में भी राजद के कुल सदस्यों में 21 प्रतिशत महिलाएं हैं।
इन आंकड़ों के जरिए तेजस्वी यादव यह संदेश देना चाहते थे कि राजद ने आरक्षण बिल के कानून बनने का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वेच्छा से महिलाओं को राजनैतिक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि क्या वे अपने टिकट वितरण में महिलाओं को इतनी बड़ी भागीदारी देने का साहस दिखा सकते हैं?
राबड़ी देवी का उदाहरण: इतिहास की गवाही
अपने संबोधन के अंत में तेजस्वी यादव ने राजद की विरासत का उल्लेख करते हुए बिहार के राजनैतिक इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार को अब तक की ‘पहली और अंतिम’ महिला मुख्यमंत्री केवल राष्ट्रीय जनता दल ने ही दी है। राबड़ी देवी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब राजद ने एक महिला को मुख्यमंत्री बनाकर प्रदेश की कमान सौंपी थी, तब भाजपा कहाँ थी?
उन्होंने कहा कि राजद ने महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक रूप से नहीं, बल्कि सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठाकर यह सिद्ध किया था कि महिला नेतृत्व ही समाज को नई दिशा दे सकता है। तेजस्वी के अनुसार, भाजपा का ‘महिला प्रेम’ नया है और केवल सत्ता की लालसा से प्रेरित है, जबकि राजद का जुड़ाव ऐतिहासिक और वैचारिक है। राबड़ी देवी का नाम लेकर उन्होंने अपनी पार्टी के कैडर और महिला कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाया कि महिलाओं के सशक्तिकरण का असली घर राजद ही है।
निष्कर्ष: 2026 की राजनैतिक बिसात और महिला मतदाता
20 अप्रैल 2026 की यह दोपहर पटना की राजनीति के लिए एक बड़े वैचारिक टकराव का दिन रही। तेजस्वी यादव का यह आक्रामक रुख यह संकेत दे रहा है कि आगामी नगर निकाय चुनावों और भविष्य की राजनैतिक लड़ाइयों में महिला आरक्षण एक केंद्रीय मुद्दा रहने वाला है। तेजस्वी ने बहुत ही चालाकी से भाजपा के ‘आक्रोश मार्च’ की हवा यह कहकर निकाल दी है कि बिल को पास कराने और लागू करने के बीच की देरी के लिए खुद सरकार जिम्मेदार है।
अब बिहार की जनता और खासकर महिला मतदाता इस बहस को देख रही हैं। एक तरफ भाजपा का ‘नारी शक्ति वंदन’ का दावा है, तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव का ‘आरक्षण में आरक्षण’ और ‘टिकट वितरण’ का डेटा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए तेजस्वी के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देता है। फिलहाल, तेजस्वी यादव ने यह साबित कर दिया है कि वे अब केवल रक्षात्मक राजनीति नहीं कर रहे, बल्कि भाजपा के ही हर वार पर पलटवार करने की पूरी क्षमता रखते हैं।


