पटना | 12 अक्टूबर 2025: बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू परिवार सुर्खियों में है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अनफ्रेंड और अनफॉलो कर दिया है। इस कदम के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि लालू परिवार के भीतर अब राजनीतिक और वैचारिक दूरी गहराती जा रही है।
पहले ही बना चुके हैं अपनी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’
तेजप्रताप यादव ने पहले ही राष्ट्रीय जनता दल से अलग होकर अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ का गठन किया था। अब वे महागठबंधन से अलग होकर एक नए राजनीतिक मोर्चे की दिशा में बढ़ रहे हैं। तेजप्रताप लगातार इस बात को सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे अब आरजेडी की पारंपरिक राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते।
तेजस्वी यादव को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करना उसी नाराजगी और अलगाव की एक और सार्वजनिक मिसाल बन गया है।
दोनों भाइयों की राहें अब पूरी तरह जुदा
तेजप्रताप यादव इन दिनों युवाओं और नए चेहरों को राजनीति में लाने की मुहिम में जुटे हैं। वे खुद को “जनता का सच्चा प्रतिनिधि” बताकर एक नए सियासी विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, तेजस्वी यादव महागठबंधन के नेतृत्व में आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति में व्यस्त हैं। तेजस्वी जहां संगठन और गठबंधन की मजबूती पर काम कर रहे हैं, वहीं तेजप्रताप अपनी नई पार्टी के विस्तार में जुटे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना
राजनीतिक विश्लेषक सुनील कुमार का मानना है कि तेजप्रताप यादव का यह सोशल मीडिया वाला कदम भले प्रतीकात्मक लगे, लेकिन इसका सियासी असर बड़ा है।
“यह कदम दिखाता है कि दोनों भाइयों के बीच अब न केवल राजनीतिक बल्कि पारिवारिक रिश्तों में भी ठंडापन आ गया है,” उन्होंने कहा।
नए गठबंधन की दिशा में तेजप्रताप
तेजप्रताप यादव ने कुछ सप्ताह पहले ही वीवीआईपी सहित पांच दलों के साथ गठबंधन की घोषणा की थी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वे एआईएमआईएम से भी गठबंधन की कोशिश में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, तेजप्रताप इस बार हसनपुर की बजाय महुआ सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। महुआ से ही उन्होंने 2015 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।
लालू परिवार में सियासी दरार गहराई
लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों के बीच यह दूरी केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक भी मानी जा रही है। एक ओर जहां तेजस्वी यादव आरजेडी की पारंपरिक समाजवादी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं तेजप्रताप खुद को नए राजनीतिक विचार के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।


