भागलपुर में शिक्षक की बर्बरता: छात्राओं को बाल पकड़कर जमीन पर पटका, बेहोश होने तक पीटा, स्कूल में तालाबंदी

सन्हौला (भागलपुर)। शिक्षा के मंदिर में मंगलवार को इंसानियत शर्मसार हो गई, जब मध्य विद्यालय मडड्डा के सहायक शिक्षक संजय कुमार साह ने पांच छात्राओं को इस कदर पीटा कि वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। बाल पकड़कर पटका गया, गले पर मुक्के बरसाए गए और सबकुछ इतना अचानक हुआ कि छात्राएं चीख तक न सकीं।

सूचना मिलते ही अभिभावक खेत-खलिहान छोड़ स्कूल पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर दी। सभी घायल छात्राओं को सन्हौला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

“क्या आपलोग अपने बच्चों को घर में नहीं पीटते?” — आरोपी शिक्षक का बेहया जवाब

जब गुस्साए परिजनों ने शिक्षक संजय कुमार साह से सवाल पूछे तो उन्होंने बेहिचक जवाब दिया —

“क्या आपलोग अपने बच्चों को घर में नहीं पीटते हैं?”

इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया। देखते ही देखते विद्यालय परिसर में हजारों की भीड़ जुट गई और प्रखंड प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

पिटाई के बाद शिक्षिका पत्नी समेत शिक्षक फरार

संजय साह की पत्नी नमिषा कुमारी, जो उसी विद्यालय में शिक्षिका हैं, दोनों घटना के बाद विद्यालय से फरार हो गए। ग्रामीणों ने बीईओ और बीडीओ को ज्ञापन सौंप शिक्षक को बर्खास्त करने की मांग की।

छात्राओं का आरोप: “बिना कारण गर्दन पर मारा मुक्का, बाल पकड़कर पटका”

घायल छात्राओं ने बताया कि घटना प्रार्थना सभा के दौरान हुई। वे खड़ी थीं, तभी शिक्षक संजय साह ने अचानक गर्दन पर मुक्के मारे और बाल पकड़कर नीचे गिरा दिया। कुछ ही पलों में पांचों छात्राएं अचेत हो गईं।

बीईओ की पुष्टि: पहले भी विवादित रहा है संजय साह

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अजेयेश्वर पांडेय और बीडीओ शेखर सुमन मौके पर पहुंचे। बीईओ ने बताया कि:

“संजय साह पहले भी कई बार विवादों में रहा है। उसे पहले निलंबित भी किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और जल्द कठोर कार्रवाई होगी।”

तालाबंदी, प्रशासनिक जांच और शिक्षक संगठन की चुप्पी

ग्रामीणों ने विद्यालय में ताले जड़ दिए हैं और संजय साह की सेवा समाप्त करने की मांग की है। वहीं, शिक्षक संघ की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। परिजनों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा है, पिटवाने या अस्पताल पहुंचाने के लिए नहीं।

इस घटना ने न सिर्फ मूल्य शिक्षा की गरिमा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और जवाबदेही की कितनी बड़ी दरार है। प्रशासन से अब सख्त कार्रवाई और शिक्षा विभाग से पारदर्शी प्रक्रिया की मांग हो रही है।


 

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  • Kumar Aditya

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