​तमिलनाडु की राजनीति में ‘थलापति’ का उदय: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा; 120 विधायकों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार

चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया है। तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) के प्रमुख और अभिनेता विजय ने शनिवार, 09 मई 2026 को चेन्नई के राजभवन (लोक भवन) में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान विजय ने राज्य में अगली सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश कर दिया है। पिछले कई दिनों से चल रहे राजनैतिक सस्पेंस पर विराम लगाते हुए विजय ने राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपे और कल, यानी रविवार दोपहर 3:00 बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का अनुरोध किया है। यह तमिलनाडु के लोकतांत्रिक इतिहास का एक बड़ा मोड़ है, जहाँ पांच दशकों से चले आ रहे द्रविड़ दिग्गजों (DMK और AIADMK) के वर्चस्व को एक नई राजनैतिक शक्ति ने चुनौती देकर सत्ता की दहलीज तक का सफर तय किया है।

बहुमत का गणित: 120 विधायकों का मिला ‘सुरक्षा कवच’

​तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। हालिया चुनावी नतीजों और गठबंधन के दौर के बाद विजय की टीवीके (TVK) ने जादुई आंकड़े को सफलतापूर्वक पार कर लिया है।

  • सत्ता का समीकरण:
    • TVK: 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
    • कांग्रेस: 5 सीटें
    • CPI और CPI(M): 4 सीटें
    • IUML: 2 सीटें
    • VCK: 2 सीटें (थोल थिरुमावलवन के समर्थन ने राह आसान की)
  • कुल समर्थन: 121 विधायक (विजय के दो सीटों से जीतने के कारण प्रभावी संख्या 120 मानी जा रही है)।

​इन दलों के समर्थन पत्रों के साथ विजय ने यह साबित कर दिया है कि उनके पास सदन में सरकार चलाने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

रविवार को ‘विजय’ तिलक: शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज

​राज्यपाल से मुलाकात के दौरान विजय ने कल दोपहर 3:00 बजे शपथ ग्रहण करने की इच्छा जताई है। राजभवन से हरी झंडी मिलते ही चेन्नई के ऐतिहासिक मरीना बीच या किसी बड़े स्टेडियम में भव्य समारोह की तैयारी शुरू की जा सकती है। यह तमिलनाडु के लिए एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि दशकों बाद राज्य को एक ऐसा मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है जो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के खेमे से बाहर का है।

​विजय की इस सफलता ने राज्य के युवाओं और उन मतदाताओं के बीच नई उम्मीदें जगाई हैं जो ‘बदलाव’ की तलाश में थे। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने समर्थन पत्रों की समीक्षा के बाद विजय को सरकार बनाने का न्यौता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

द्रविड़ राजनीति के ‘किले’ में बड़ी सेंध

​1960 के दशक के बाद यह पहली बार है जब तमिलनाडु में डीएमके (DMK) या एआईएडीएमके (AIADMK) के बिना कोई सरकार बनने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की ‘सिनेमैटिक लोकप्रियता’ और जमीनी स्तर पर उनके कार्यकर्ताओं के कड़े परिश्रम ने इस असंभव दिखने वाले कार्य को संभव कर दिखाया है। विपक्ष में बैठी डीएमके ने भी संकेत दिए हैं कि वे एक ‘रचनात्मक विपक्ष’ की भूमिका निभाएंगे, जिससे यह साफ है कि सदन के भीतर अब मुद्दों पर आधारित नई बहस देखने को मिलेगी।

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