पटना: भारत में अंगदान की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बिहार के नबीनगर से जदयू विधायक चेतन आनंद और उनकी पत्नी डॉक्टर आयुषी सिंह ने अपने-अपने आठ–आठ अंग दान किए हैं। दोनों ने स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO), IGIMS के माध्यम से अंगदान की प्रक्रिया पूरी की।
“परिवार में लगातार हुई घटनाओं से मिली प्रेरणा”
चेतन आनंद ने बताया कि परिवार में हाल के दिनों में कई मौतें और बीमारियों ने उन्हें इस दिशा में सोचने पर मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि उनके एक चचेरे भाई का निधन हो गया, जबकि एक चाचा हृदय रोग से पीड़ित हैं।
“अगर हमारी वजह से किसी की जिंदगी बच सकती है, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं,” उन्होंने कहा।
परिवार में पहले भी हुई है दान की परंपरा
चेतन आनंद ने बताया कि उनके पिता, पूर्व सांसद आनंद मोहन, ने जेल में रहते हुए अपना नेत्रदान किया था।
उन्होंने कहा,
“हम उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार को जब बताया तो सभी बहुत खुश हुए।”
डॉ. आयुषी सिंह ने बताया कि उनके माता–पिता और भाई ने भी पहले ही अंगदान करने का निर्णय लिया था।
अंगदान को बताया ‘महादान’
चेतन आनंद ने कहा कि अंगदान को शास्त्रों में भी महादान बताया गया है।
“एक व्यक्ति अपने निधन के बाद आठ जिंदगियों को बचा सकता है। इसलिए एक नेता के रूप में यह संदेश देना जरूरी है कि इसमें डरने जैसी कोई बात नहीं है।”
उन्होंने कहा कि अंगदान पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी पर दबाव नहीं डाला जा सकता।
रोहिणी आचार्य का उदाहरण भी दिया
चेतन आनंद ने कहा कि लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने जीवित रहते हुए अपने पिता को किडनी दान देकर बड़ा साहस दिखाया।
उन्होंने कहा कि अंगदान की परंपरा सनातन धर्म से ही चली आ रही है।
लोगों को धीरे–धीरे जागरूक करने की जरूरत
डॉ. आयुषी सिंह ने कहा कि अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
“जैसे रक्तदान होता है, वैसे ही अंगदान भी होता है। अभी जागरूकता बहुत कम है, लेकिन हम लोगों को प्रेरित करेंगे।”
उन्होंने बताया कि नबीनगर में महिलाओं ने इस मुहिम में रुचि दिखाई है।
चेतन आनंद कौन हैं?
चेतन आनंद, पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन के पुत्र हैं।
2020 में वे राजद से शिवहर विधानसभा के विधायक बने थे।
फरवरी 2024 में एनडीए सरकार बनने पर उन्होंने जदयू का दामन थाम लिया और 2025 में नबीनगर से जदयू विधायक चुने गए।
उनकी मां लवली आनंद शिवहर लोकसभा की सांसद हैं।
देश में अंगदान की स्थिति
भारत में अंगदान की दर अभी भी बहुत कम है —
प्रति दस लाख की आबादी पर एक भी अंगदाता नहीं।
हालांकि 2024 में अंगदान में 16% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें दक्षिण भारत सबसे आगे है।
सबसे कम अंगदान वाले राज्यों में असम, गोवा और उत्तराखंड शामिल हैं।
अंगदान और देहदान में अंतर
- अंगदान: ब्रेन डेड अवस्था में किया जाता है।
हृदय, फेफड़े, यकृत, किडनी, आंत, अग्न्याशय, कॉर्निया, त्वचा, हड्डी व अन्य ऊतक दान किए जा सकते हैं। - देहदान: प्राकृतिक मृत्यु के बाद पूरा शरीर मेडिकल शोध एवं शिक्षा के लिए दान किया जाता है।
कौन कर सकता है अंगदान?
- 18 वर्ष से ऊपर का कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से निर्णय ले सकता है।
- 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति के लिए माता–पिता की सहमति आवश्यक है।
अंगदान कैसे करें?
- राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की वेबसाइट पर जाएं: notto.gov.in
- या ORGAN India की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करें: organindia.org
- रजिस्ट्रेशन के बाद डोनर कार्ड मिलता है।
- स्थानीय मेडिकल कॉलेज से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


