भागलपुर के ​ईशाकचक में ‘सुपर कॉप्स’ का एक्शन: गृहभेदन कांड की गुत्थी सुलझी, डेढ़ लाख नगद और आभूषणों के साथ तीन दबोचे गए

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर के ईशाकचक थाना क्षेत्र में हुई एक बड़ी चोरी की घटना का पुलिस ने सफल उद्भेदन कर दिया है। पेशेवर अपराधियों और चोरी के माल को खपाने वाले गिरोह के बीच के ‘नापाक गठजोड़’ को ध्वस्त करते हुए पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। 3 अप्रैल 2026 की इस बड़ी कामयाबी में पुलिस ने न केवल मुख्य चोरों को पकड़ा है, बल्कि उस सुनार को भी दबोचा है जो चोरी के गहने खरीदकर अपराधियों को आर्थिक खाद-पानी मुहैया कराता था। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर के शहरी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सक्रिय गृहभेदन गिरोहों के बीच हड़कंप मच गया है।

श्यामादास लेन में सेंधमारी: जब सूने घर को बनाया निशाना

​घटना की पृष्ठभूमि ईशाकचक थाना क्षेत्र के श्यामादास लेन से जुड़ी है। यहाँ की निवासी बबली कुमारी, जो पवन कुमार की पत्नी हैं, ने ईशाकचक थाने में एक लिखित आवेदन देकर अज्ञात चोरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आवेदन के अनुसार, उनके घर को सुनसान पाकर अज्ञात अपराधियों ने गृहभेदन (हाउस ब्रेकिंग) की घटना को अंजाम दिया था और अलमारी में रखे भारी मात्रा में जेवरात और नकदी लेकर फरार हो गए थे।

​इस घटना के बाद ईशाकचक थाना में कांड संख्या-02/2026 दर्ज किया गया। गृहभेदन की बढ़ती वारदातों को देखते हुए भागलपुर पुलिस के वरीय अधिकारियों ने इसे चुनौती के रूप में लिया। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चोरी और छिनतई के हॉटस्पॉट को चिह्नित कर छापेमारी के आदेश दिए गए, जिसके बाद इस विशेष मामले के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

सीसीटीवी और तकनीक ने खोला राज: ऐसे फँसे अपराधी

​इस कांड के उद्भेदन के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (नगर-01) के नेतृत्व में गठित टीम ने आधुनिक जांच पद्धतियों का सहारा लिया। पुलिस ने सबसे पहले श्यामादास लेन और उसके आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू किया। तकनीकी अनुसंधान और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध युवकों की आवाजाही पर शक हुआ।

​पुलिस की सर्विलांस टीम और मानवीय सूचना तंत्र (Human Intelligence) की मदद से दो मुख्य संदिग्धों की पहचान की गई। पुलिस ने ईशाकचक थाना क्षेत्र में ही जाल बिछाकर दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए अपराधियों की पहचान ईशाकचक बौंसी पुल निवासी ललन मंडल के पुत्र नीतीश कुमार मंडल और श्यामादास लेन निवासी स्व० छठु यादव के पुत्र संजय कुमार यादव उर्फ कुक्कु के रूप में हुई है।

चोरों की निशानदेही और सुनार की गिरफ्तारी: टूटा चोरी का इकोसिस्टम

​गिरफ्तारी के बाद जब नीतीश और संजय से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने न केवल बबली कुमारी के घर में चोरी की बात स्वीकार की, बल्कि यह भी बताया कि वे चोरी के जेवरातों को कहाँ और किसे बेचते थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने बबरगंज थाना क्षेत्र के मिरजानहाट वारसलीगंज में छापेमारी की। यहाँ से दिनेश प्रसाद नामक एक व्यापारी को गिरफ्तार किया गया। दिनेश प्रसाद पर आरोप है कि उसने चोरी के गहनों को कम कीमत पर खरीदा था।

​दिनेश प्रसाद के घर की तलाशी के दौरान पुलिस की आंखें फटी रह गईं। वहां से न केवल चोरी किए गए सोने और चांदी के आभूषण बरामद हुए, बल्कि 1,50,000 (डेढ़ लाख) रुपये नगद भी मिले। यह नकदी चोरी के माल को बेचने के बाद प्राप्त की गई राशि का हिस्सा बताई जा रही है। दिनेश प्रसाद जैसे व्यापारियों की गिरफ्तारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे ही अपराधियों को चोरी करने के लिए प्रेरित करते हैं।

अपराधिक इतिहास: आदतन अपराधी हैं नीतीश और संजय

​पुलिस जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह है इन अपराधियों का पुराना रिकॉर्ड। मुख्य आरोपी नीतीश कुमार मंडल कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि एक पेशेवर अपराधी है। उस पर भागलपुर और पूर्णिया के विभिन्न थानों में कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। नीतीश का आपराधिक सफर 2011 से शुरू हुआ था और वह ईशाकचक, मोजाहिदपुर, जोगसर, मधुसूदनपुर से लेकर पूर्णिया साइबर थाना तक के कांडों में नामजद रहा है।

​वहीं, दूसरे आरोपी संजय कुमार उर्फ कुक्कु पर भी 5 मामले दर्ज हैं। वह 2011 से ही ईशाकचक और कोतवाली थाना क्षेत्र में सक्रिय रहा है। इन अपराधियों के लंबे चौड़े इतिहास से यह स्पष्ट होता है कि ये जेल से छूटने के बाद दोबारा अपराध की दुनिया में सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस अब इनके अन्य साथियों और पिछले कुछ महीनों में हुई अन्य चोरियों में इनकी संलिप्तता की जांच कर रही है।

बरामदगी की विस्तृत सूची: भारी मात्रा में सोना-चांदी बरामद

​पुलिस ने छापेमारी के दौरान दिनेश प्रसाद के ठिकाने से जो सामान बरामद किया है, उसकी सूची काफी लंबी है। बरामद सामानों में शामिल हैं:

  • नगद राशि: 1,50,000 (एक लाख पचास हजार) रुपये।
  • सोने के आभूषण: 1 अंगूठी, 6 पीस हनुमानी, 14 पीस नोजपीन (नाक की कील), 8 पीस नथ और 2 पीस कान की बाली।
  • चांदी के सामान: 4 पीस पायल, 2 पीस मठिया और 2 पीस चांदी के सिक्के।

​यह बरामदगी पीड़िता बबली कुमारी के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्होंने अपनी जमा-पूंजी और कीमती जेवरात खो दिए थे। पुलिस ने बरामद सामानों को जब्त कर लिया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत इन्हें मालिक को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

छापेमारी दल की सक्रियता: खाकी ने दिखाई मुस्तैदी

​इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में ईशाकचक थानाध्यक्ष आलोक कुमार और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। इस टीम में पुलिस अवर निरीक्षक रौशन कुमार, पीटीसी गौतम कुमार, पीटीसी शन्टू कुमार और सिपाही संतोष कुमार, मनीष कुमार, विजय कुमार, विश्वनाथ चन्द्रवंशी व जितेन्द्र कुमार शामिल थे। पुलिस टीम ने जिस तरह से 24 घंटे के भीतर वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर अपराधियों तक पहुँच बनाई, उसकी सराहना की जा रही है।

​वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर ने इस सफलता पर टीम की पीठ थपथपाई है। भागलपुर पुलिस ने इस संदेश को एक बार फिर दोहराया है कि वे शहर की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए सदैव तत्पर हैं। शहर के व्यस्त इलाकों में गश्त बढ़ाने और हॉटस्पॉट पर नजर रखने की रणनीति अब रंग ला रही है।

क्या केवल गिरफ्तारियां काफी हैं?

​ईशाकचक की यह घटना पुलिस की मुस्तैदी को तो दर्शाती है, लेकिन यह समाज के लिए एक बड़ा प्रश्न भी खड़ा करती है। नीतीश और संजय जैसे अपराधी, जिन पर दर्जनों मामले हैं, जेल से बाहर आकर फिर से घरों के ताले तोड़ रहे हैं। क्या हमारे न्यायिक और सुधार तंत्र में कोई कमी है? दूसरी ओर, दिनेश प्रसाद जैसे ‘सफेदपोश’ व्यापारी जो चोरी का माल खरीदते हैं, वे अपराधियों की रीढ़ होते हैं। जब तक ऐसे व्यापारियों का सामाजिक बहिष्कार और कड़ा कानूनी दंड सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक चोरी की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाना मुश्किल होगा।

​नागरिकों को भी अपने घरों की सुरक्षा के प्रति जागरूक होना होगा। भागलपुर पुलिस ने अपील की है कि अगर कोई लंबे समय के लिए घर से बाहर जा रहा है, तो इसकी सूचना पड़ोसियों या स्थानीय थाने को जरूर दें। सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल और सक्रिय सूचना तंत्र ही ऐसे अपराधियों के मंसूबों को नाकाम कर सकता है।

अपराधियों के लिए चेतावनी

​ईशाकचक गृहभेदन कांड का उद्भेदन यह साफ संकेत है कि भागलपुर पुलिस अब तकनीक और सूचना के समन्वय से अपराधियों का पीछा कर रही है। नीतीश, संजय और दिनेश की गिरफ्तारी ने एक पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले में स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) की तैयारी कर रही है ताकि इन शातिर अपराधियों को उनके किए की कड़ी सजा मिल सके और समाज में एक कड़ा संदेश जाए।

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