सुल्तानगंज के ‘सनकी’ अपराधी रामधनी यादव का एनकाउंटर: सिर काटकर थाने पहुंचने वाले माफिया का पुलिस ने किया अंत; ईओ की हत्या के 12 घंटे बाद सीने में लगी गोली

भागलपुर/सुल्तानगंज। बिहार के प्रशासनिक और आपराधिक इतिहास में मंगलवार की शाम जो खूनी मंजर सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय के भीतर देखा गया था, उसका प्रतिशोध भागलपुर पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर पूरा कर लिया है। जांबाज कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की हत्या और सभापति राज कुमार गुड्डू पर जानलेवा हमला करने वाले मुख्य मास्टरमाइंड रामधनी यादव का अंत पुलिस मुठभेड़ में हो गया है। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 की सुबह जब पुलिस टीम आरोपी को हथियार बरामदगी के लिए ले गई थी, तब उसने भागने की कोशिश की और जवाबी फायरिंग में मारा गया। रामधनी यादव कोई साधारण अपराधी नहीं था; वह आतंक का वह पर्याय था जिसने साल 2000 में एक कारोबारी का सिर काटकर सीधे थाने पहुंचकर पुलिस को चुनौती दी थी। इस एनकाउंटर के साथ ही सुल्तानगंज में पिछले ढाई दशकों से चल रहे एक खूनी वर्चस्व के अध्याय पर पूर्णविराम लग गया है।

दूध बेचने से लेकर 5 करोड़ के साम्राज्य तक: रामधनी का काला सफर

​रामधनी यादव के अपराधी बनने की कहानी किसी रोंगटे खड़े करने वाली थ्रिलर फिल्म जैसी है। शुरुआत में रामधनी सुल्तानगंज की गलियों में घर-घर जाकर दूध बेचने का काम करता था। उसकी आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि उसका पूरा परिवार एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था और घर का खर्च उसकी पत्नी नीलम देवी की आय पर टिका था, जो उस वक्त एक प्राथमिक स्कूल में रसोइया (मिड-डे मील बनाने वाली) का काम करती थी।

​लेकिन रामधनी के भीतर सत्ता और रसूख की भूख ने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया। साल 2000 में उसने अपनी क्रूरता का पहला बड़ा प्रदर्शन किया जब उसने एक स्थानीय कारोबारी की हत्या की और उसका कटा हुआ सिर लेकर खुद थाने पहुंच गया। इस घटना ने पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और रंगदारी, लूट, जमीन कब्जाने और ठेकेदारी के जरिए अपना आर्थिक साम्राज्य फैलाना शुरू किया। आज की तारीख में वह 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति का मालिक था और आलीशान मकान व लक्जरी गाड़ियों में घूमता था।

रसोइया से डिप्टी चेयरमैन तक: नीलम देवी का राजनीतिक उत्थान

​रामधनी यादव ने जान लिया था कि अपराध को बचाने के लिए राजनीति का कवच जरूरी है। उसने अपनी पत्नी नीलम देवी को मोहरा बनाया। 2011-12 तक रामधनी ने बस स्टैंड, पार्किंग और साफ-सफाई के सरकारी ठेकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। इसी धनबल के सहारे उसने 2017 में नीलम देवी को वार्ड संख्या 11 से पार्षद का चुनाव लड़वाया और जीत हासिल की।

​नीलम देवी का सफर सुल्तानगंज के एक स्कूल में खाना बनाने से शुरू होकर नगर परिषद की कुर्सी तक पहुंचा। 2019 में जब तत्कालीन सभापति दयावती देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, तो रामधनी ने पार्षदों की ‘खरीद-फरोख्त’ और डराने-धमकाने का ऐसा खेल खेला कि दयावती की कुर्सी छिन गई और नीलम देवी सभापति बन गईं। वर्तमान में नीलम देवी नगर परिषद की डिप्टी चेयरमैन थीं। 2020 में उन्होंने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। रामधनी का प्रभाव इतना बढ़ा कि उसके बेटे भी राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हो गए; उसका एक बेटा मनीष कुमार यादव वर्तमान में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का भागलपुर युवा जिला अध्यक्ष है, जबकि बड़ा बेटा सन्नी यादव एमएलसी प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय है।

वर्चस्व की जंग: रामधनी बनाम कनबुच्चा

​सुल्तानगंज नगर परिषद की सत्ता पर काबिज होने के लिए रामधनी यादव की रंजिश कुख्यात अपराधी कनबुच्चा से शुरू हुई। कनबुच्चा तत्कालीन चेयरमैन दयावती देवी का पति था। दोनों के बीच वर्चस्व की यह लड़ाई इतनी हिंसक थी कि 2019 में दयावती देवी ने नीलम देवी और रामधनी पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया था। इस मामले में नीलम देवी को जेल भी जाना पड़ा था।

​दुश्मनी का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। फरवरी 2023 में रामधनी यादव पर भी जानलेवा हमला हुआ था। जब वह अपने घर के सामने खड़ा था, तब दो बदमाशों ने उसे रास्ता पूछने के बहाने रोका और उसके सीने में गोली मार दी। उस वक्त रामधनी की जान तो बच गई, लेकिन उसने अपने विरोधियों को खत्म करने की जो कसम खाई थी, उसका परिणाम मंगलवार के शूटआउट के रूप में सामने आया।

मंगलवार का शूटआउट: जब कट्टे से निकली गोलियों ने सिस्टम को चीर दिया

​मंगलवार, 28 अप्रैल की शाम करीब 4 बजे सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में तालाबों और होर्डिंग्स की नीलामी की प्रक्रिया चल रही थी। चेयरमैन राज कुमार गुड्डू के दफ्तर में करीब 15 लोग मौजूद थे। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा गया कि रामधनी यादव सफेद शर्ट और खाकी हाफ पैंट पहने हुए एक हरे रंग का झोला लेकर अंदर दाखिल हुआ।

​अंदर घुसते ही उसने झोले से कट्टा निकाला और राज कुमार गुड्डू को ललकारते हुए कहा— “सुल्तानगंज में सिर्फ तुम ही राज करोगे क्या?” इसके बाद उसने फायरिंग शुरू कर दी। राज कुमार गुड्डू को दो गोलियां लगीं। इसी दौरान वहां मौजूद एग्जीक्यूटिव अफसर कृष्ण भूषण कुमार ने बहादुरी दिखाते हुए अपराधियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन सनकी रामधनी ने उन पर भी गोलियां चला दीं। गोली लगने के कारण कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चेयरमैन फिलहाल मौत से जूझ रहे हैं।

पुलिसिया प्रहार और एनकाउंटर का घटनाक्रम

​इस घटना के बाद भागलपुर पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव था। मुख्यमंत्री और गृह विभाग के कड़े रुख के बाद अपराधियों की धरपकड़ के लिए एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की पांच टीमें बनाई गईं। पुलिस ने रामधनी यादव को दबोच लिया था। बुधवार की सुबह जब उसे हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था, तब उसने पुलिस की पकड़ से भागने और जवाबी हमला करने की कोशिश की।

​मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने ‘आत्मरक्षार्थ’ फायरिंग की, जिसमें रामधनी यादव के सीने में गोली लगी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। रामधनी के अंत ने उन तमाम सफेदपोश नेताओं के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है जिनके साथ उसके पारिवारिक संबंध थे और जो उसे संरक्षण देते थे।

बीजेपी और लोजपा-आर से जुड़ाव: रसूख की ढाल हुई फेल

सुल्तानगंज के 'सनकी' अपराधी रामधनी यादव का एनकाउंटर: सिर काटकर थाने पहुंचने वाले माफिया का पुलिस ने किया अंत; ईओ की हत्या के 12 घंटे बाद सीने में लगी गोली

​रामधनी यादव की सबसे बड़ी ताकत उसकी राजनीतिक पहुंच थी। वह सत्ताधारी भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ उठने-बैठने का शौकीन था और कई हाई-प्रोफाइल दौरों में उसे नेताओं के करीब देखा जाता था। वहीं उसका बेटा चिराग पासवान की पार्टी में जिला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात है। उसे लगा था कि यह राजनीतिक कवच उसे कानून के लंबे हाथों से बचा लेगा, लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी की हत्या ने इस बार उसके सारे रसूख को फेल कर दिया। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि अपराध की दुनिया में ‘सिर काटने’ वालों का अंत ‘कलेजे पर गोली’ से ही होगा।

सुल्तानगंज के 'सनकी' अपराधी रामधनी यादव का एनकाउंटर: सिर काटकर थाने पहुंचने वाले माफिया का पुलिस ने किया अंत; ईओ की हत्या के 12 घंटे बाद सीने में लगी गोली

​सुल्तानगंज में फिलहाल सुरक्षा बल तैनात हैं और रामधनी के आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए छापेमारी जारी है। उसके आलीशान मकान और बेहिसाब संपत्ति की जांच भी अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) कर सकती है। यह एनकाउंटर उन तमाम अपराधियों के लिए एक नजीर है जो सोचते हैं कि वे सिस्टम के भीतर घुसकर सिस्टम के ही रक्षकों का खून बहा सकते हैं।

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