सुल्तानगंज हत्याकांड: इंस्पेक्टर के बयान पर FIR; रामधनी, साला पिकू और चालक दीपक नामजद

भागलपुर/सुल्तानगंज। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय के भीतर कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार की नृशंस हत्या और मुख्य पार्षद (चेयरमैन) राजकुमार गुड्डू पर जानलेवा हमले के मामले में कानूनी शिकंजा कस गया है। इस जघन्य हत्याकांड को लेकर सुल्तानगंज थाना के इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार के बयान पर आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस की इस शुरुआती जांच और FIR के मजमून से यह साफ हो गया है कि यह कोई तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। मुख्य आरोपी रामधनी यादव (जो अब एनकाउंटर में मारा जा चुका है) अकेले इस वारदात को अंजाम देने नहीं पहुँचा था, बल्कि उसके साथ उसका साला पिकू कुमार और निजी चालक दीपक यादव भी इस खूनी खेल में बराबर के साझीदार थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर इन तीनों को नामजद किया है, जबकि रेकी करने और साजिश रचने वाले अन्य अज्ञात चेहरों की तलाश के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है।

इंस्पेक्टर की जुबानी: “बरामदे पर खून से लथपथ गिरे थे अधिकारी”

​सुल्तानगंज थाना में पदस्थापित इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार ने FIR में उस खौफनाक मंजर का विस्तृत वर्णन किया है जो उन्होंने घटनास्थल पर पहुँचने के बाद देखा। उनके बयान के अनुसार, 28 अप्रैल 2026 की शाम लगभग 4:10 बजे उन्हें सूचना मिली कि नगर परिषद कार्यालय में कुछ अपराधियों ने घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की है। जब वे पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे, तो कार्यालय का माहौल चीख-पुकार और दहशत से भरा था। इंस्पेक्टर ने बताया कि कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार अपने कार्यालय के बरामदे पर खून से लथपथ पड़े थे, वहीं उनके पास ही चेयरमैन राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से जख्मी हालत में तड़प रहे थे।

​पूरे फर्श पर खून फैला हुआ था और वहां कारतूसों के खोखे बिखरे पड़े थे। पुलिस ने नगर परिषद के कर्मचारियों के सहयोग से दोनों को तुरंत रेफरल अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने ईओ कृष्ण भूषण कुमार को ‘ब्रॉट डेड’ (मृत) घोषित कर दिया। चेयरमैन की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें मायागंज अस्पताल रेफर किया गया। इंस्पेक्टर के बयान के आधार पर दर्ज इस प्राथमिकी में स्पष्ट किया गया है कि अपराधियों की मंशा दोनों ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जान लेने की थी। घटनास्थल को तत्काल सुरक्षित कर एफएसएल (FSL) की टीम को साक्ष्य संकलन के लिए बुलाया गया।

CCTV ने खोला राज: साला और चालक के साथ ‘डेथ वारंट’ लेकर आया था रामधनी

​घटना के तुरंत बाद पुलिस ने नगर परिषद कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला। फुटेज के अवलोकन से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि गोली चलाने वालों में रामधनी यादव के साथ उसका साला पिकू कुमार और चालक दीपक यादव शामिल थे। FIR के अनुसार, इन तीनों ने योजनाबद्ध तरीके से चैंबर में प्रवेश किया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। फुटेज में अपराधियों के चेहरे और उनके हाथों में हथियार साफ तौर पर देखे जा सकते हैं।

​पुलिस का मानना है कि रामधनी ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले कई दिनों तक रेकी करवाई थी। इसमें नगर परिषद के कुछ ‘भेदी’ या स्थानीय अपराधियों के शामिल होने की प्रबल आशंका है जिन्होंने रामधनी को अधिकारियों की मौजूदगी और नीलामी प्रक्रिया के समय की सटीक जानकारी दी थी। प्रशिक्षु आईपीएस और सुल्तानगंज के तत्कालीन थानेदार सईम रजा के हस्ताक्षर से दर्ज इस केस में अन्य साजिशकर्ताओं के विरुद्ध भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब पिकू और दीपक यादव की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

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