
भागलपुर जिले के स्थित नामामि गंगे घाट पर सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। गंगा स्नान के दौरान 13 वर्षीय एक बालक अचानक पैर फिसलने से गहरे गड्ढे में गिर गया और देखते ही देखते नदी की तेज धारा में लापता हो गया। घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिजनों की चीख-पुकार और रोने-बिलखने की आवाजों ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर कर रख दिया।
जानकारी के अनुसार लापता बालक की पहचान रमन कुमार के रूप में हुई है, जो अब्जूगंज क्षेत्र के गंगापुर अठगामा गांव का निवासी बताया जा रहा है। सोमवार सुबह वह अपने परिजनों के साथ नामामि गंगे घाट पर स्नान करने पहुंचा था। परिवार के अन्य सदस्य भी गंगा स्नान कर रहे थे। इसी दौरान अचानक रमन का पैर फिसल गया और वह घाट के समीप बने गहरे खाईनुमा हिस्से में जा गिरा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जैसे ही बालक पानी के भीतर गया, वह कुछ ही क्षणों में आंखों से ओझल हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन कोई भी तत्काल पानी में उतरकर उसे बचाने का साहस नहीं जुटा पाया। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पानी के भीतर गहरी खाई और तेज बहाव है, जिसके कारण बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया।
घटना के तुरंत बाद घाट पर मौजूद परिजन जोर-जोर से मदद के लिए पुकारते रहे। मां-बाप और अन्य परिजनों की हालत बेहद खराब हो गई। परिवार के सदस्य लगातार रमन का नाम लेकर रोते-बिलखते रहे। वहां मौजूद कई लोग भावुक हो उठे, लेकिन तेज धारा और गहराई के कारण तत्काल राहत संभव नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही अंचल अधिकारी, स्थानीय थाना पुलिस और एसडीआरएफ टीम को अलर्ट किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और बालक की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कराया।
एसडीआरएफ की टीम ने गंगा में संभावित स्थानों पर खोजबीन शुरू कर दी है। गोताखोरों की मदद से नदी के भीतर तलाश अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक बालक का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। प्रशासन लगातार खोज अभियान जारी रखने की बात कह रहा है।
परिजनों ने घटना के बाद घाट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नामामि गंगे घाट देखने में सुरक्षित प्रतीत होता है, लेकिन पानी के भीतर कई स्थानों पर गहरी खाई बनी हुई है, जिसकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती। रमन के परिवार का कहना है कि उन्हें इस खतरनाक हिस्से का बिल्कुल अंदाजा नहीं था।
परिजनों के अनुसार जैसे ही वे पानी में उतरे, अचानक पैरों के नीचे की मिट्टी खिसक गई। घाट के किनारे नीचे की सतह अस्थिर थी, जिसके कारण संतुलन बिगड़ गया और बालक सीधे गहराई में चला गया। परिवार का आरोप है कि यदि खतरनाक क्षेत्रों को पहले से चिन्हित कर चेतावनी बोर्ड लगाए गए होते तो शायद इस हादसे से बचा जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने भी बताया कि नामामि गंगे घाट पर कई जगहों पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। बरसात और जलस्तर में बदलाव के कारण नदी के तल की संरचना लगातार बदलती रहती है। ऐसे में जो स्थान एक दिन सुरक्षित दिखता है, वही दूसरे दिन खतरनाक हो सकता है। यही वजह है कि यहां स्नान के दौरान विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।
घटना ने एक बार फिर गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुलतानगंज का नामामि गंगे घाट धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों पर सुरक्षा प्रबंधन, चेतावनी संकेत और बचाव संसाधनों की उपलब्धता अत्यंत जरूरी हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी में स्नान के दौरान सबसे बड़ा खतरा सतह के नीचे मौजूद गड्ढों, अचानक गहराई और तेज बहाव से होता है। सामान्य रूप से शांत दिखने वाला जल भी कुछ सेकंड में जानलेवा साबित हो सकता है। यही कारण है कि बच्चों को बिना निगरानी नदी में उतरने देना बेहद जोखिमपूर्ण माना जाता है।
पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि हादसे के पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई। साथ ही घाट पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
रमन कुमार के लापता होने से पूरे गांव में मातम का माहौल है। परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। हर गुजरते पल के साथ परिवार की चिंता और बढ़ती जा रही है। सभी की निगाहें एसडीआरएफ के सर्च ऑपरेशन पर टिकी हैं और लोग किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
सुलतानगंज के नामामि गंगे घाट पर हुआ यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी भी है। गंगा जैसे विशाल जलस्रोतों के किनारे पर्याप्त सतर्कता, जागरूकता और सुरक्षा उपाय ही ऐसी दुखद घटनाओं को रोक सकते हैं। फिलहाल पूरा क्षेत्र एक ही प्रार्थना कर रहा है कि जल्द से जल्द बालक का पता चल सके।


