
भागलपुर: सुल्तानगंज नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू के निधन से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। करीब 12 दिनों तक इलाज चलने के बाद शनिवार को पटना में उनका निधन हो गया। रविवार सुबह जब उनका पार्थिव शरीर सुल्तानगंज स्थित पैतृक आवास से अंतिम यात्रा के लिए निकला तो पूरा शहर गमगीन माहौल में डूब गया। हजारों लोगों ने अपने लोकप्रिय जनप्रतिनिधि को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
राजकुमार गुड्डू की अंतिम यात्रा में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और आम लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग सुबह से ही उनके आवास पहुंचने लगे थे। जैसे ही पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए बाहर लाया गया, माहौल भावुक हो उठा। हर तरफ शोक और संवेदना का माहौल दिखाई दे रहा था।
पैतृक आवास से निकली अंतिम यात्रा
रविवार सुबह हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम यात्रा की शुरुआत सुल्तानगंज बाजार स्थित उनके पैतृक आवास से हुई। अंतिम यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए नमामि गंगे घाट स्थित मुक्तिधाम तक पहुंची, जहां पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़क के दोनों ओर खड़े होकर श्रद्धांजलि देते नजर आए। कई लोग अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर अंतिम दर्शन कर रहे थे। रास्ते में जगह-जगह फूल बरसाए गए और लोगों ने हाथ जोड़कर उन्हें अंतिम प्रणाम किया।
शहर के बाजारों में उमड़ा जनसैलाब
अंतिम यात्रा सबसे पहले उनके आवास के समीप स्थित संत संग मंदिर पहुंची। इसके बाद चौक बाजार, मिठाई दुकान, सब्जी मंडी और अन्य प्रमुख बाजार क्षेत्रों से यात्रा गुजरी। हर जगह लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सुल्तानगंज के बाजारों में इस दौरान भारी भीड़ देखने को मिली। दुकानें आंशिक रूप से बंद रहीं और कई व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान के सामने श्रद्धांजलि सभा जैसी व्यवस्था की। लोगों का कहना था कि राजकुमार गुड्डू हमेशा आम लोगों के सुख-दुख में शामिल रहते थे और इसी कारण शहर के हर वर्ग में उनकी मजबूत पहचान थी।
नारों से गूंज उठा पूरा शहर
अंतिम यात्रा के दौरान “राजकुमार गुड्डू अमर रहें” और “भारत माता की जय” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंजता रहा। हजारों लोग यात्रा में शामिल होकर लगातार उनके समर्थन और सम्मान में नारे लगा रहे थे।
कई युवाओं ने कंधा देकर अंतिम यात्रा को आगे बढ़ाया। लोगों की आंखों में आंसू थे और चेहरे पर अपने लोकप्रिय नेता को खोने का दुख साफ दिखाई दे रहा था। महिलाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी संख्या अंतिम यात्रा में मौजूद रही।
गंगा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
अंतिम यात्रा सुल्तानगंज के नमामि गंगे घाट स्थित मुक्तिधाम पहुंची, जहां पूरे वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। उनके बड़े पुत्र ने मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी।
गंगा घाट पर मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। घाट पर वातावरण बेहद भावुक था और कई लोग खुद को संभाल नहीं पा रहे थे।
प्रशासनिक व्यवस्था रही चाक-चौबंद
अंतिम यात्रा में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुल्तानगंज इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार, प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
पूरे मार्ग में पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि यातायात और कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रशासन ने यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष निगरानी रखी।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी
राजकुमार गुड्डू की अंतिम यात्रा में धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। अजगैवीनाथ मंदिर के महंत प्रेमानंद गिरी, आत्मा दास ठाकुरवाड़ी के महंत अनुज मुनि सहित कई धार्मिक हस्तियां अंतिम संस्कार में शामिल हुईं।
इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों और सैनिक संगठनों के सदस्यों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहर के कई प्रमुख व्यवसायी, वार्ड पार्षद, मुखिया और अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता भी इस मौके पर मौजूद रहे।
सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
राजकुमार गुड्डू के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। अंतिम यात्रा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों दलों के नेताओं की मौजूदगी ने यह दिखाया कि उनकी पहचान दलगत राजनीति से ऊपर थी।
पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जनता से जुड़ा हुआ नेता बताया। लोगों का कहना था कि वे हमेशा आम नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देते थे और हर वर्ग के लोगों से उनका सीधा जुड़ाव था।
शहर में शोक का माहौल
सुल्तानगंज में रविवार को पूरे दिन शोक का माहौल बना रहा। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय व्यापारिक संस्थाओं ने शोक सभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। शहर के लोगों ने कहा कि राजकुमार गुड्डू का निधन केवल एक जनप्रतिनिधि की मौत नहीं, बल्कि शहर के लिए बड़ी क्षति है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक वे बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा लोगों के बीच सक्रिय रहते थे। नगर परिषद के कार्यों में उनकी भागीदारी और लोगों के प्रति उनकी उपलब्धता के कारण वे काफी लोकप्रिय थे।
लोगों की यादों में रहेंगे राजकुमार गुड्डू
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के बीच एक ही चर्चा थी कि सुल्तानगंज ने अपना एक ऐसा जनप्रतिनिधि खो दिया, जिसने जनता के बीच रहकर काम किया। शहर के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने उन्हें याद करते हुए भावुक प्रतिक्रियाएं दीं।
राजकुमार गुड्डू की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि उन्होंने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उनके निधन से पैदा हुई खाली जगह को भर पाना आसान नहीं होगा। सुल्तानगंज के लोग उन्हें लंबे समय तक एक जनप्रिय और मिलनसार नेता के रूप में याद रखेंगे।


