
भागलपुर: बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर जारी आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। TRE-4 शिक्षक बहाली की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में रविवार को भाकपा (माले), आइसा और आरवाईए ने राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाया। भागलपुर में भी इस विरोध प्रदर्शन का व्यापक असर देखने को मिला, जहां सुरखीकल इलाके में वामपंथी संगठनों और छात्र-युवा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे TRE-4 अभ्यर्थियों पर सरकार ने बर्बर लाठीचार्ज कराया, बड़ी संख्या में युवाओं को गिरफ्तार किया गया और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और मांग की कि जल्द से जल्द TRE-4 की वैकेंसी जारी की जाए।
शिक्षक बहाली की मांग को लेकर बढ़ा आंदोलन
बिहार में लंबे समय से शिक्षक नियुक्ति को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। TRE-4 बहाली की मांग कर रहे युवाओं का कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार नई नियुक्तियां निकालने में देरी कर रही है। इसी मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
हाल के दिनों में राजधानी पटना समेत कई जिलों में अभ्यर्थियों ने आंदोलन तेज किया था। इसी दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों और वामपंथी संगठनों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। भागलपुर में आयोजित विरोध प्रदर्शन भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
भाकपा (माले) ने सरकार पर लगाया दमन का आरोप
भागलपुर में आयोजित प्रतिवाद कार्यक्रम के दौरान भाकपा (माले) और ऐक्टू नेताओं ने सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे अभ्यर्थी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी मांग सुनने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि बिहार में लाखों युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद सरकार नई नियुक्तियों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। ऐसे में जब युवा रोजगार की मांग को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो उन्हें लाठियों और मुकदमों का सामना करना पड़ता है।
“युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश”
भाकपा (माले) के नगर प्रभारी और ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त ने प्रदर्शन स्थल पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह केवल पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और जदयू की सरकार रोजगार के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है। सरकार युवाओं को नौकरी देने के बजाय आंदोलन को दबाने की नीति अपना रही है। उनके मुताबिक, जब भी नौजवान रोजगार, शिक्षा और अधिकार की मांग करते हैं, तब प्रशासन पुलिस बल के सहारे आंदोलन को खत्म करने का प्रयास करता है।
मुकेश मुक्त ने कहा कि जिन युवाओं के हाथों में भविष्य में शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी, आज उन्हीं युवाओं को अपराधियों की तरह सड़कों पर पीटा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाठीचार्ज के दौरान कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हुए और महिला अभ्यर्थियों के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया।
घायल अभ्यर्थियों के इलाज और मुआवजे की मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने मांग की कि लाठीचार्ज में घायल हुए अभ्यर्थियों के इलाज की उचित व्यवस्था की जाए और सरकार उनकी आर्थिक सहायता भी सुनिश्चित करे। नेताओं ने कहा कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्रों के सिर फट गए और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग उठाई कि पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही गिरफ्तार किए गए सभी अभ्यर्थियों को बिना शर्त रिहा करने और दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी की गई।
राज्यव्यापी विरोध से बढ़ा दबाव
रविवार को राज्य के कई जिलों में भाकपा (माले), आइसा और आरवाईए की ओर से विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन संगठनों का कहना है कि अगर सरकार जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं करती और पुलिस कार्रवाई वापस नहीं लेती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिक्षक भर्ती और बेरोजगारी का मुद्दा बिहार में लगातार बड़ा होता जा रहा है। विपक्षी दल और छात्र संगठन इसे युवाओं से जुड़ा अहम सवाल बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
बिहार में खाली पदों को लेकर बढ़ी बहस
शिक्षक बहाली को लेकर एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि राज्य में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने में देरी क्यों हो रही है। विभिन्न संगठनों का दावा है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिसका असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
वहीं सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए चरणबद्ध काम किया जा रहा है। हालांकि अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार लगातार भर्ती प्रक्रिया में देरी कर रही है, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
आंदोलन और तेज होने के संकेत
भागलपुर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने साफ संकेत दिए कि यदि सरकार ने TRE-4 वैकेंसी को लेकर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। छात्र और युवा संगठनों ने चेतावनी दी कि वे जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आंदोलन जारी रखेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में रोजगार और शिक्षक बहाली का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। युवाओं के बीच बढ़ती नाराजगी को देखते हुए सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
फिलहाल TRE-4 अभ्यर्थियों के समर्थन में शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब केवल शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे रोजगार, शिक्षा और युवाओं के अधिकारों से जुड़े बड़े आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।


