
भागलपुर: भागलपुर जिले के सुलतानगंज प्रखंड अंतर्गत गनगनिया पंचायत के खड़िया पिपरा गांव में फोरलेन सड़क पर डाइवर्सन नहीं बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों का लंबे समय से चला आ रहा आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर फूट पड़ा। हजारों की संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-80 पर उतर आए और गांव तक सुरक्षित पहुंच मार्ग उपलब्ध कराने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन सड़क जाम शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक जिला प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सुबह करीब सात बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा। सड़क जाम के कारण भागलपुर, सुलतानगंज और मुंगेर की ओर आने-जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हजारों यात्रियों को घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ा। उमस भरी गर्मी के बीच लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर में हल्की बारिश होने के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे और सड़क नहीं खोली।
ग्रामीणों का कहना है कि फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान खड़िया पिपरा गांव की ओर जाने के लिए उचित डाइवर्सन की व्यवस्था नहीं की गई। इसके कारण गांव के लोगों को रोजाना आवागमन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना सुरक्षित रास्ते के लोगों को फोरलेन पार करना पड़ता है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश मुखिया संघ के उपाध्यक्ष एवं खड़िया पिपरा पंचायत के मुखिया संजय कुमार ने कहा कि ग्रामीण कई महीनों से डाइवर्सन निर्माण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी जिला प्रशासन को कई बार आवेदन दिया गया था। उस समय प्रशासन की ओर से डाइवर्सन बनाए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया, जबकि ग्रामीणों की समस्या लगातार बनी हुई है। उनका कहना था कि गांव के लोग स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रतिदिन इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। डाइवर्सन नहीं होने के कारण उन्हें जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, संबंधित मंत्री और स्थानीय विधायक तक को लिखित आवेदन भेजा गया था। इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला। लोगों का कहना है कि जब सभी स्तरों पर गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि गांव के लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए है। उनका कहना है कि फोरलेन बनने के बाद विकास तो हुआ, लेकिन गांव के लोगों की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया। यदि समय रहते सुरक्षित डाइवर्सन बना दिया जाता तो लोगों को सड़क जाम करने की नौबत नहीं आती।
सड़क जाम की सूचना मिलने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी संजीव कुमार और सुलतानगंज थाना अध्यक्ष धनंजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर सड़क खाली कराने का प्रयास किया। प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
ग्रामीणों ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि मौखिक आश्वासन अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि जब तक भागलपुर और मुंगेर के जिला प्रशासन की ओर से लिखित रूप में डाइवर्सन निर्माण का आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक सड़क जाम जारी रहेगा। इसी कारण अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी।
एनएच-80 पर जाम लगने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। बड़ी संख्या में निजी वाहन, बसें, मालवाहक ट्रक और अन्य वाहन सड़क पर फंस गए। कई यात्री घंटों तक सड़क पर इंतजार करते रहे। गर्मी और उमस के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हुई। दोपहर में हल्की बारिश शुरू होने के बाद भी लोग सड़क किनारे भीगते हुए जाम खुलने का इंतजार करते रहे।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय तक सड़क जाम रहने से व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। कई मालवाहक वाहन समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके। वहीं मरीजों और आवश्यक कार्य से यात्रा कर रहे लोगों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि फोरलेन परियोजना का उद्देश्य लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना था, लेकिन यदि गांव तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ता ही नहीं होगा तो विकास का लाभ अधूरा रह जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सड़क निर्माण से प्रभावित गांवों की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान स्थानीय आबादी की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए अंडरपास, सर्विस रोड या डाइवर्सन जैसी सुविधाएं अत्यंत आवश्यक होती हैं। यदि इन व्यवस्थाओं का अभाव रहता है तो ग्रामीणों को रोजाना जोखिम उठाकर सड़क पार करनी पड़ती है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों से संबंधित रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी और समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए थे और सड़क जाम जारी था।
फिलहाल खड़िया पिपरा गांव में डाइवर्सन की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। हजारों ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले का समाधान किस प्रकार और कितनी जल्दी निकालता है, ताकि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो सके और राष्ट्रीय राजमार्ग पर सामान्य यातायात बहाल किया जा सके।


