​जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले थम गईं राजकुमार गुड्डू की सांसें; 12वें दिन जिंदगी की जंग हारे सुल्तानगंज के मुख्य पार्षद

सुल्तानगंज/भागलपुर। होनी के क्रूर चक्र ने सुल्तानगंज के एक उभरते राजनैतिक सितारे को उस समय छीन लिया जब उनके परिजन और समर्थक उनके जन्मदिन के जश्न की दुआएं मांग रहे थे। सुल्तानगंज नगर परिषद के मुख्य पार्षद राजकुमार उर्फ गुड्डू आखिरकार 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर मौत से जूझने के बाद शनिवार, 09 मई 2026 को जिंदगी की जंग हार गए। विडंबना यह है कि आज यानी 10 मई को उनका जन्मदिन है। जिस दिन समर्थकों ने उनके स्वस्थ होकर घर लौटने और जन्मदिन मनाने की योजना बनाई थी, उसी दिन उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। पटना के एक निजी अस्पताल में शनिवार सुबह करीब पौने 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। 28 अप्रैल को नगर परिषद कार्यालय के भीतर अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जिसमें उनके सिर और सीने में गोलियां लगी थीं। 12वें दिन मिली उनके निधन की इस खबर ने न केवल सुल्तानगंज बल्कि पूरे बिहार के राजनैतिक गलियारे को शोक में डुबो दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे एक बड़ी सामाजिक और राजनैतिक क्षति बताया है।

जन्मदिन के उपहार की जगह मिली ‘अंतिम विदाई’

​राजकुमार गुड्डू का जन्म 10 मई 1983 को हुआ था। उनके चाहने वाले और नगर परिषद के वार्ड पार्षद इस उम्मीद में थे कि गुड्डू 10 मई तक स्वस्थ हो जाएंगे और अस्पताल से उनके ठीक होने की कोई अच्छी खबर आएगी। पिछले कई दिनों से सुल्तानगंज के विभिन्न मंदिरों और प्रसिद्ध अजगैवीनाथ धाम में उनके दीर्घायु होने के लिए महामृत्युंजय जाप और विशेष अनुष्ठान किए जा रहे थे। समर्थकों ने सोचा था कि उनके जन्मदिन पर वे एक नई जिंदगी के साथ वापसी करेंगे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। शनिवार सुबह जब उनके निधन की खबर आई, तो समर्थकों का कलेजा फट गया। यह एक ऐसी त्रासदी है जहाँ एक दिन बाद ही उनके 43वें साल की शुरुआत होनी थी, लेकिन वे 42 साल की उम्र पूरी कर दुनिया से विदा हो गए। उनके घर में बड़ी बहनें और रिश्तेदार पहुँच चुके हैं, जहाँ का माहौल पूरी तरह गमगीन है।

शुक्रवार की रात आया था हार्ट अटैक: डॉक्टरों की कोशिशें रहीं नाकाम

​राजकुमार गुड्डू की हालत पिछले दो दिनों से काफी स्थिर बताई जा रही थी, लेकिन शुक्रवार की रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उनके बहनोई जितेंद्र साह उर्फ पप्पू साह ने बताया कि शुक्रवार रात उन्हें पहला हार्ट अटैक आया था। उस समय अस्पताल के विशेषज्ञों की टीम ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया। हालांकि, शनिवार की सुबह एक बार फिर उन्हें तीव्र हार्ट अटैक आया, जिसके बाद डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

​अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, उनके सिर और सीने में लगी गोलियों के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना कम कर दिया था। वे पिछले 11 दिनों से वेंटिलेटर पर बेहोशी की हालत में थे। शनिवार देर शाम पटना से उनका पार्थिव शरीर सुल्तानगंज स्थित उनके आवास पर पहुँचा, जहाँ हजारों की संख्या में लोगों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। रविवार सुबह 7 बजे उनके पार्थिव शरीर को नगर भ्रमण कराते हुए नमामि गंगा घाट ले जाया जाएगा, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मर्चेंट नेवी से राजनीति तक: एक इकलौते बेटे का सफर

​राजकुमार गुड्डू का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे सुल्तानगंज के प्रसिद्ध मिठाई व्यवसायी बच्चू साह के इकलौते बेटे थे। उनका परिवार मूल रूप से मुंगेर जिले के असरगंज (सजुआ गांव) का रहने वाला था, लेकिन उनके पिता सुल्तानगंज आकर बस गए थे। गुड्डू की शुरुआती शिक्षा सुल्तानगंज में ही हुई और उन्होंने मुरारका कॉलेज से भूगोल में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से अंगिका भाषा में पीजी (स्नातकोत्तर) की डिग्री हासिल की। वे पढ़ाई में काफी मेधावी थे और यूपीएससी की तैयारी के लिए भी गए थे।

​राजनीति में आने से पहले वे मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। लेकिन जब उनकी मां शारदा देवी की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी, तो उन्होंने अपनी शानदार नौकरी छोड़ दी और मां की सेवा के लिए घर लौट आए। यही संस्कार और सेवा भावना उनकी राजनीति में भी दिखी। 2020 में उन्होंने निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें हार मिलने के बावजूद वे हताश नहीं हुए। 2022 में उन्होंने पहली बार नगर निकाय चुनाव में मुख्य पार्षद पद के लिए नामांकन किया और अपने व्यवहार के कारण भारी मतों से जीत हासिल की। वे भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता थे और बांका लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य भी थे।

28 अप्रैल का वह खूनी मंगलवार: रक्षक भी शहीद, भक्षक का भी हुआ अंत

​सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में 28 अप्रैल की शाम जो हुआ, उसने पूरे बिहार को हिला दिया था। सैरात की डाक (नीलामी) की प्रक्रिया चल रही थी, तभी लूंगी पहने और झोले में कट्टा छिपाए तीन शूटर दफ्तर में घुस आए। उनका मुख्य निशाना राजकुमार गुड्डू ही थे। जब अपराधियों ने उन पर फायरिंग शुरू की, तो तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए सभापति को बचाने के लिए अपराधियों से भिड़ गए। इसी गुत्थमगुत्थी में अपराधियों ने ईओ के सीने में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

​इस गोलीकांड में राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की। घटना के अगले ही दिन, 29 अप्रैल को पुलिस ने मुख्य आरोपी रामधनी यादव को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। अब तक इस मामले में पांच अन्य आरोपियों—दीपक कुमार, पिंकू यादव, सन्नी कुमार, मटुकी मंडल और अमित यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने रामधनी के बेटे और साले को भी हिरासत में लिया है। अपराधियों का दुस्साहस इतना था कि उन्होंने सरकारी दफ्तर के भीतर घुसकर दो बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों को निशाना बनाया।

प्रशासनिक मुस्तैदी और परिवार का करुण क्रंदन

​मुख्य पार्षद के निधन के बाद सुल्तानगंज में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशिक्षु आईपीएस एएसपी सह थानाध्यक्ष सायम रजा ने अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। सिटी एसपी ने भी सुल्तानगंज पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया। गुड्डू के पीछे उनकी बुजुर्ग मां, पत्नी दीपिका गुप्ता और दो मासूम बेटे—राजवीर (10) और अर्श रह गए हैं। मां की हालत इतनी बिगड़ गई है कि डॉक्टरों की टीम को घर पर ही उनकी जांच करनी पड़ रही है। मासूम बच्चों को अब तक यह समझ नहीं आ रहा कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे।

​भाजपा के जिला प्रवक्ता संजय चौधरी ने बताया कि गुड्डू केवल एक स्थानीय नेता नहीं थे, बल्कि वे भविष्य में लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। उन्हें बांका लोकसभा क्षेत्र से आगामी चुनाव के लिए एक संभावित एनडीए प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा था। उनके निधन से न केवल सुल्तानगंज नगर परिषद के विकास कार्यों पर असर पड़ेगा, बल्कि दो महीने बाद शुरू होने वाले ऐतिहासिक श्रावणी मेला की तैयारियों को भी बड़ा धक्का लगा है।

रिक्त पद और भविष्य की प्रक्रिया

​मुख्य पार्षद के निधन के बाद सुल्तानगंज नगर परिषद में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है। उप निर्वाचन पदाधिकारी श्वेता कुमारी ने बताया कि इस रिक्ति की जानकारी आधिकारिक तौर पर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। आयोग से प्राप्त निर्देशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी कि कार्यभार उप मुख्य पार्षद को मिलेगा या वहां फिर से चुनाव कराए जाएंगे। फिलहाल, पूरे नगर परिषद क्षेत्र में शोक घोषित कर दिया गया है और सभी सरकारी व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं। सुल्तानगंज के लोग अपने उस ‘मिठाई वाले भैया’ को याद कर रहे हैं जो राजनीति की चकाचौंध में भी कभी अपनी जड़ों और अपनी दुकान के ग्राहकों को नहीं भूला।

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