
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने खून के रिश्तों की पवित्रता और सामाजिक सुरक्षा के दावों पर गहरा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। जिले के कहलगांव थाना क्षेत्र में एक युवती ने अपने ही चचेरे चाचा पर हैवानियत और अस्मत लूटने का संगीन आरोप लगाया है। यह मामला केवल एक शारीरिक हमले का नहीं है, बल्कि उस भरोसे के कत्ल का है जो एक परिवार के भीतर पनपता है। शनिवार, 09 मई 2026 को पीड़िता न्याय की आस में भागलपुर के महिला थाने पहुँची और अपनी आपबीती सुनाई। इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना को अंजाम लगभग एक महीने पहले दिया गया था, लेकिन लोक-लाज और पारिवारिक दबाव के साये में दबी यह चीख अब जाकर थाने की दहलीज तक पहुँच सकी है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता का आवेदन स्वीकार कर लिया है और आरोपित चाचा की तलाश में जुट गई है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कभी-कभी घर की चारदीवारी भी अपनों के बीच असुरक्षित हो जाती है।
सूने घर में दरिंदगी: 7 अप्रैल की वह काली सुबह
महिला थाने में दिए गए आवेदन के अनुसार, यह पूरी घटना 7 अप्रैल 2026 की सुबह की है। पीड़िता, जो कि बालिग है, उस समय अपने घर में बिल्कुल अकेली थी। जानकारी के मुताबिक, उसके भाई और मां किसी पारिवारिक रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे। घर की जिम्मेदारी और मवेशियों की देखरेख पीड़िता के जिम्मे थी।
पीड़िता ने बताया कि सुबह के वक्त मवेशियों को हटाने और घर का कामकाज निपटाने के बाद वह काफी थक गई थी और आराम करने के लिए अपने कमरे में चली गई। गर्मी और थकान के कारण उसने कमरे का दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया था, जो बाद में उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। इसी सूनेपन और सुरक्षा की चूक का फायदा उठाकर उसका चचेरा चाचा, जो रिश्ते में रक्षक होना चाहिए था, शिकारी बनकर कमरे में दाखिल हो गया। पीड़िता जब तक कुछ समझ पाती या शोर मचा पाती, आरोपित ने उसके ही दुपट्टे से उसका मुंह मजबूती से बंद कर दिया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
एक महीने का सन्नाटा: दर्द और खौफ के बीच का संघर्ष
7 अप्रैल से लेकर 9 मई तक का समय पीड़िता के लिए किसी नर्क से कम नहीं रहा होगा। घटना के बाद आरोपित ने उसे डराया-धमकाया और किसी को भी बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। भागलपुर जैसे सामाजिक परिवेश में, जहाँ आज भी इस तरह के मामलों में पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाती है, युवती के लिए यह कदम उठाना आसान नहीं था।
महिला थानेदार के अनुसार, पीड़िता ने शनिवार को पहुँचकर विस्तृत जानकारी दी। एक महीने की देरी का मुख्य कारण संभवतः पारिवारिक प्रतिष्ठा और आरोपित का खौफ रहा है। अक्सर ऐसे मामलों में परिवार के भीतर ही मामले को दबाने की कोशिश की जाती है, लेकिन पीड़िता ने अंततः अपनी चुप्पी तोड़ने का फैसला किया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस एक महीने के दौरान पीड़िता को न्याय मांगने से रोकने के लिए परिवार या समाज के स्तर पर कोई दबाव बनाया गया था।
पुलिसिया कार्रवाई: जांच और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया
भागलपुर महिला थाने की प्रभारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पीड़िता का आवेदन प्राप्त हो गया है। चूंकि मामला दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध से जुड़ा है, इसलिए पुलिस इसे प्राथमिकता के आधार पर देख रही है। पुलिस की पहली प्राथमिकता पीड़िता का मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) कराना है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। हालांकि, घटना को एक महीने बीत चुके हैं, जिससे कुछ फोरेंसिक साक्ष्य मिटने की संभावना रहती है, लेकिन आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस केस को मजबूत करने की कोशिश करेगी।
महिला थानेदार ने कहा, “आवेदन मिला है और शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है। पीड़िता के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आरोपित चाचा के संभावित ठिकानों पर छापेमारी के लिए टीम गठित की जा रही है।” पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपित का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास रहा है या नहीं। कहलगांव पुलिस से भी इस मामले में समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर गवाहों के बयान लिए जा सकें।
सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार: अपनों से ही असुरक्षित बेटियां
कहलगांव की यह घटना बिहार के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहाँ घर के भीतर ही महिलाएं यौन हिंसा का शिकार हो रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी बताते हैं कि अधिकांश यौन अपराधों में आरोपित पीड़िता का कोई न कोई करीबी रिश्तेदार या परिचित ही होता है। चचेरे चाचा द्वारा अपनी ही भतीजी के साथ ऐसी घिनौनी हरकत करना यह दर्शाता है कि रिश्तों की नैतिकता कितनी गिर चुकी है।
इस घटना के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि आरोपित को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन सके। लोगों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो बेटियां कहाँ सुरक्षित रहेंगी? इस मामले ने परिवार के भीतर भी सतर्कता और बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
न्याय की उम्मीद: कानून के शिकंजे में कब होगा आरोपित?
फिलहाल, आरोपित चाचा फरार बताया जा रहा है। पुलिस की टीमें उसके मोबाइल लोकेशन और रिश्तेदारों के यहाँ दबिश दे रही हैं। भागलपुर पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। पीड़िता को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उसे मनोवैज्ञानिक संबल देने की भी कोशिश की जा रही है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि पीड़िता के बयान अदालत में सुसंगत रहते हैं, तो आरोपित के खिलाफ कठोर धाराएं (जैसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 या तत्कालीन आईपीसी 376) लगाई जा सकती हैं। न्याय मिलने में हुई देरी भले ही एक चुनौती हो, लेकिन पीड़िता का साहस इस मामले की सबसे बड़ी ताकत है। भागलपुर की जनता अब पुलिस की अगली कार्रवाई और आरोपित की गिरफ्तारी का इंतजार कर रही है ताकि पीड़िता को इंसाफ मिल सके और रिश्तों की मर्यादा को फिर से बहाल किया जा सके।


