कहलगांव में बड़ा खुलासा: वैध राइस मिल से अवैध चावल बरामद, एसडीएम कृष्ण कुमार गुप्ता की कार्रवाई से मचा हड़कंप

भागलपुर। जिले के कहलगांव अनुमंडल में प्रशासन ने अवैध चावल कारोबार के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। नवपदस्थापित एसडीएम के नेतृत्व में की गई छापेमारी में कैरिया पंचायत के जंगलगोपाली रेलवे क्रॉसिंग के पास संचालित एक वैध राइस मिल से भारी मात्रा में अवैध चावल बरामद किया गया है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में राइस मिल संचालकों और गोदाम मालिकों के बीच हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, “मां सुशीला राइस मिल” में पिछले करीब तीन वर्षों से अवैध कारोबार की शिकायत मिल रही थी। हालांकि प्रभावशाली संरक्षण के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी। लेकिन नए एसडीएम के पदभार संभालते ही मामले को गंभीरता से लिया गया और स्थानीय सूचना के आधार पर जांच शुरू की गई।

शनिवार देर शाम एसडीएम के निर्देश पर मिल में छापेमारी की गई, जहां जांच के दौरान भारी मात्रा में एफआर (फोर्टिफाइड राइस) चावल अवैध रूप से पाया गया। स्टॉक रजिस्टर और दस्तावेजों की जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जबकि मामले की गहराई से जांच जारी है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के तहत गरीबों को मिलने वाला चावल, डीलरों से खरीदकर छोटे व्यापारियों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जाता था। इसके बाद बिना नंबर वाले छोटे ट्रक, पिकअप और अन्य वाहनों से इस चावल को रात के अंधेरे में राइस मिल तक पहुंचाया जाता था। यहां मिल संचालक चावल की री-पैकिंग कर उसे दोबारा एफसीआई गोदामों में भेज देते थे।

इस पूरे अवैध कारोबार से मिल संचालकों को भारी आर्थिक लाभ हो रहा था, क्योंकि उन्हें चावल उत्पादन और भंडारण में लगने वाली लागत से बचत हो जाती थी। वहीं इसका सीधा असर गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था, जिन्हें घटिया गुणवत्ता का चावल मिल रहा था।

एसडीएम ने बताया कि बरामदगी के बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जब्त दस्तावेजों की जांच की जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि जांच के आधार पर और भी एफआईआर दर्ज की जा सकती हैं।

प्रशासन को यह भी जानकारी मिली है कि इलाके में कई अवैध गोदाम संचालित हैं, जहां इसी तरह के कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे सभी स्थानों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि किसी पीडीएस डीलर की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके लाइसेंस रद्द करने की भी कार्रवाई होगी।

इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। साथ ही यह संकेत भी दिया गया है कि आगे भी इस तरह के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा, ताकि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर लगाम लगाई जा सके।

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