
पटना, 21 जुलाई।बिहार सरकार ने बाल श्रम को जड़ से समाप्त करने के लिए राज्यव्यापी विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है। ईंट-भट्ठों और कारखानों में काम करने वाले बच्चों को चिह्नित कर उन्हें मुक्त कराने के लिए विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक मेलों और त्योहारों के अवसर पर जन-जागरूकता अभियान चलाकर बाल श्रम के खिलाफ लोगों को संवेदनशील बनाया जाएगा।
यह निर्णय सोमवार को पटना के नियोजन भवन स्थित मंथन सभागार में हुई बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार ने की। बैठक में बाल अधिकारों, शिक्षा, बाल विवाह और बाल श्रम जैसे विषयों पर पंचायत स्तर तक जन-जागरूकता फैलाने की रूपरेखा तैयार की गई।
मेलों-त्योहारों से होगा जनजागरण
आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि सोनपुर मेला, श्रावणी मेला, छठ पर्व जैसे बिहार के प्रसिद्ध आयोजनों में नुक्कड़ नाटक, झांकी, लोकगीत, पोस्टर प्रदर्शनी के जरिए बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाएगी। प्रत्येक आयोजन स्थल पर सूचना बूथ और बाल अधिकार स्टॉल लगाए जाएंगे।
6 माह से 2 साल तक की सजा का प्रावधान
बाल श्रम कराते हुए पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को 6 महीने से 2 साल तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही आयोग ने अपील की है कि घरों और अपार्टमेंट्स में हो रहे बाल श्रम की भी पहचान कर बच्चों को मुक्त कराया जाए।
ईंट भट्ठों पर चलेगा विशेष अभियान
राज्य में ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले बच्चों की स्थिति को लेकर आयोग गंभीर है। अब इन स्थानों पर प्रशासनिक छापेमारी कर बाल श्रमिकों की पहचान और उनकी मुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही पुनर्वास की भी व्यवस्था की जाएगी।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
अध्यक्ष ने श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विद्यालयों में जाकर अभिभावकों को विभाग की योजनाओं की जानकारी दें, ताकि वे बच्चों को श्रमिक बनने से रोकें।
आयोग की भावी योजनाओं पर चर्चा
बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, सदस्य विधायक श्रेयसी सिंह, रामविलास कामत, विधान पार्षद विजय सिंह, अनिल कुमार, रविंद्र प्रसाद सिंह, एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा श्रमायुक्त, आयोग के सचिव और श्रम संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।


