
पटना, बढ़ती व्यस्तता और कार्य के दबाव के बीच अधिकारियों को मानसिक रूप से सशक्त और संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग द्वारा एक दिवसीय “स्ट्रेस मैनेजमेंट” कार्यशाला का आयोजन किया गया। अधिवेशन भवन में आयोजित इस कार्यशाला में विभागीय अधिकारियों को तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपाय बताए गए, ताकि वे अपने कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से निष्पादित कर सकें।
कार्यशाला का आयोजन मंत्री के मार्गदर्शन में किया गया, जबकि उद्घाटन विभाग के प्रधान सचिव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्य में संतुलन और मानसिक शांति पर जोर
उद्घाटन सत्र में प्रधान सचिव ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी यहां प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में अपनाते हैं, तो वे अपने कार्यों को अधिक कुशलता और बिना तनाव के पूरा कर पाएंगे।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि वे कार्यशाला में बताए गए सिद्धांतों और अभ्यासों को अपने जीवन में लागू करने का संकल्प लें, ताकि व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तर पर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।
योग, ध्यान और सकारात्मक सोच पर विशेष सत्र
कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के सिद्धांतों के आधार पर जीवन को सरल और संतुलित बनाने के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में तनाव एक सामान्य समस्या बन चुकी है, लेकिन नियमित योग, ध्यान और सकारात्मक सोच के जरिए इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण सत्र में अधिकारियों को विभिन्न ध्यान तकनीकों का अभ्यास कराया गया और प्रेरणादायक वीडियो के माध्यम से मानसिक संतुलन बनाए रखने के तरीके समझाए गए। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास से व्यक्ति न केवल तनावमुक्त रह सकता है, बल्कि उसका आत्मविश्वास और कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही भागीदारी
इस कार्यशाला में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें , , और प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता स्तर के कई अधिकारी भी कार्यशाला में शामिल हुए।
इस पहल का उद्देश्य अधिकारियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें तनावमुक्त कार्य संस्कृति की ओर प्रेरित करना है, ताकि विभागीय कार्यों में गुणवत्ता और दक्षता दोनों को बेहतर बनाया जा सके।


