
पटना | 31 मार्च 2026: बिहार सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया है। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। ऐसे में किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना चाहिए, जिससे उनकी आय भी बढ़ेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
पराली जलाने से नुकसान, प्रबंधन से फायदा
कृषि मंत्री ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। साथ ही इससे जमीन की उर्वरता कम हो जाती है, जिससे भविष्य में फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि अगर किसान फसल अवशेष का सही तरीके से प्रबंधन करें, तो यह उनके लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है।
सरकार दे रही है आधुनिक कृषि यंत्रों पर भारी अनुदान
राज्य सरकार फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी सब्सिडी दे रही है। इसके तहत स्ट्रॉ रीपर और स्ट्रॉ बेलर जैसे उपकरणों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे पराली को उपयोगी संसाधन में बदला जा सके।
कैसे काम करते हैं ये आधुनिक यंत्र?
- स्ट्रॉ रीपर मशीन:
यह मशीन कम्बाइन हार्वेस्टर के बाद खेत में बचे फसल अवशेष को काटकर भूसा बनाती है। साथ ही इसमें बचे दानों को अलग करके किसानों को अतिरिक्त लाभ भी मिलता है। - स्ट्रॉ बेलर मशीन:
यह मशीन खेत में बचे अवशेष को इकट्ठा कर गट्ठर (बेल) बनाती है। इससे भंडारण आसान हो जाता है और इसका उपयोग पशु चारे या औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है।
छोटे किसानों को भी मिलेगा लाभ
कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से इन यंत्रों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी इसका लाभ उठा सकें।
किसान ऑनलाइन आवेदन कर अनुदानित दर पर इन यंत्रों की खरीद कर सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आय बढ़ाने का मौका
सरकार का उद्देश्य है कि किसान पराली को जलाने के बजाय उसे संसाधन के रूप में उपयोग करें। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और कृषि अधिक टिकाऊ बनेगी।
बिहार में पराली प्रबंधन को लेकर शुरू किया गया यह अभियान किसानों के लिए दोहरा लाभ लेकर आया है—एक तरफ पर्यावरण संरक्षण, तो दूसरी ओर आय में वृद्धि। अब जरूरत है कि किसान इस पहल को अपनाकर इसे सफल बनाएं और एक स्वच्छ व समृद्ध कृषि प्रणाली की ओर कदम बढ़ाएं।


