दिनांक: 13 जुलाई 2025 | सबौर, भागलपुर: बरसात के मौसम में बढ़ती सर्प दंश की घटनाओं को देखते हुए जीवन जागृति सोसायटी द्वारा सबौर प्रखंड में सर्प दंश जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत जागरूकता रथ को बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रह्लाद सरकार ने बाबूपुर गांव से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
सर्पदंश पर नहीं हो अंधविश्वास, समय पर मिले इलाज: प्रह्लाद सरकार
इस अवसर पर बिहार खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रह्लाद सरकार ने कहा:
“जीवन जागृति सोसायटी और डॉ. अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में यह अभियान बेहद सराहनीय है। बरसात के मौसम में खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को सर्पदंश से सबसे ज्यादा खतरा होता है। ऐसे में उन्हें समय रहते सही जानकारी और इलाज मिलना जरूरी है। झाड़-फूंक में समय गंवाना जान जोखिम में डालने जैसा है। अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता है और समय पर इलाज मिलने से जान बचाई जा सकती है।”
सांप काटे तो क्या करें – डॉ. अजय कुमार सिंह की सलाह
जीवन जागृति सोसायटी के अध्यक्ष और चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक उपचार की जानकारी दी। उन्होंने कहा:
- सांप काटने के बाद मरीज को चलने नहीं दें
- जहां काटा है वहां स्प्लिंट (सपोर्ट) लगाएं
- मरीज को साइकिल, बाइक या 112 नंबर पर कॉल कर एंबुलेंस से अस्पताल ले जाएं
- झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, सीधा इलाज कराएं
“अगर विष नहीं होगा, तो 24 घंटे के अंदर मरीज स्वस्थ होकर घर आ जाएगा। यदि विष होगा, तो सही इलाज से जीवन बच जाएगा।”
अभियान के प्रति ग्रामीणों का सकारात्मक सहयोग
बाबूपुर, राजंदीपुर, इंग्लिश फरका, सबौर, हरिदासपुर, ममलखा मासडू और साहेबगंज जैसे गांवों में सर्पदंश जागरूकता को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला। आमजनों ने जीवन जागृति सोसायटी की इस पहल की सराहना की और संकल्प लिया कि सर्पदंश की स्थिति में वे झाड़-फूंक की बजाय मरीज को सीधे अस्पताल ले जाएंगे।
अभियान में शामिल प्रमुख व्यक्ति
इस जागरूकता अभियान में सोसायटी के कई सदस्य और जनप्रतिनिधि सक्रिय रूप से शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से:
- जदयू के कुणाल रत्न प्रिया
- वीणा सिन्हा
- प्रदीप कुशवाहा
- धनंजय मंडल
- शैलेंद्र तोमर
आदि शामिल थे।
सर्पदंश जैसी गंभीर स्थिति में सही जानकारी और समय पर चिकित्सा ही जीवन रक्षक बन सकती है। जीवन जागृति सोसायटी का यह अभियान न केवल ग्रामीणों को शिक्षित कर रहा है, बल्कि अंधविश्वास से बाहर लाकर जीवन रक्षा की दिशा में ठोस कदम है।


