स्मार्ट रेलवे, सुरक्षित यात्रा: भारतीय रेलवे ने AI और स्वचालन से बदली स्टेशनों की सूरत

1874 स्टेशनों पर एआई (AI) बना रक्षक, 1405 स्टेशनों पर अब रियल-टाइम में होगी ट्रेनों की घोषणा; दूरसंचार ढांचे में हुआ ऐतिहासिक बदलाव

नई दिल्ली | 07 अप्रैल 2026 : भारतीय रेलवे अब केवल पटरियों का जाल नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस एक ‘स्मार्ट नेटवर्क’ में तब्दील हो चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा, संचार और सूचना तंत्र को विश्वस्तरीय बनाने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी निवेश किया है। नई तकनीक के आने से न केवल यात्रियों का सफर आसान हुआ है, बल्कि स्टेशनों पर सुरक्षा का घेरा भी पहले से कहीं अधिक अभेद्य हो गया है।

​रेलवे द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अब स्टेशनों पर संदिग्ध गतिविधियों और घुसपैठ को पकड़ने के लिए मानवीय आंखों के बजाय एआई का ‘मस्तिष्क’ काम कर रहा है।

​एआई (AI) बना ‘तीसरी आंख’: 1874 स्टेशनों पर हाई-टेक निगरानी

​यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे ने 1,874 स्टेशनों पर ‘वीडियो निगरानी प्रणाली’ (VSS) का विस्तार किया है। यह कोई साधारण सीसीटीवी कैमरा सिस्टम नहीं है, बल्कि यह एआई-आधारित वीडियो विश्लेषण और ‘चेहरे की पहचान’ (Facial Recognition) सॉफ्टवेयर से लैस है।

  • घुसपैठ की पहचान: यह सिस्टम प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठ या स्टेशनों पर बेवजह घूमने वाले संदिग्धों का वास्तविक समय (Real-time) में पता लगा लेता है।
  • मंत्री का विजन: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है, “कैमरे सिस्टम की आंखें होंगे और एआई (AI) इसका मस्तिष्क होगा।” इस कदम से स्टेशनों पर होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने में बड़ी सफलता मिली है।

​अब नहीं होगा ‘घोषणा’ का इंतज़ार: 1405 स्टेशनों पर ऑटोमेटेड सूचना प्रणाली

​अक्सर स्टेशनों पर ट्रेनों की जानकारी को लेकर होने वाली भ्रम की स्थिति को समाप्त कर दिया गया है। भारतीय रेलवे के 1,405 स्टेशनों पर ‘एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली’ (IPAS) को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

  • स्वचालित घोषणाएं: इस प्रणाली को ‘राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली’ (NTES) के साथ जोड़ा गया है। इससे ट्रेनों के आने-जाने और प्लेटफॉर्म बदलने की घोषणाएं अब स्वचालित रूप से, सटीक और वास्तविक समय के आधार पर होती हैं।
  • डिजिटल डिस्प्ले: कोच गाइडेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक इंडिकेटर बोर्ड के जरिए यात्रियों को अब पल-पल की अपडेट मिल रही है, जिससे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन में भी सुधार हुआ है।

​डिजिटल रीढ़: 1396 स्टेशनों पर ‘आईपी-एमपीएलएस’ तकनीक का विस्तार

​रेलवे के परिचालन को सुचारू बनाने के लिए पर्दे के पीछे एक मजबूत दूरसंचार ढांचा तैयार किया गया है। ‘इंटरनेट प्रोटोकॉल मल्टी-प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग’ (IP-MPLS) तकनीक के माध्यम से एक उच्च क्षमता वाला नेटवर्क विकसित किया गया है।

  • कनेक्टिविटी: अब तक 1,396 रेलवे स्टेशनों पर इस तकनीक को शुरू किया जा चुका है।
  • लाभ: यह हाई-स्पीड नेटवर्क भविष्य की बैंडविड्थ आवश्यकताओं को पूरा करेगा और वीडियो निगरानी, टिकट प्रणाली (UTS/PRS), माल संचालन सूचना प्रणाली (FOIS) और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों को निर्बाध गति प्रदान करेगा।

​पहाड़ों के सीने में भी नहीं टूटेगा संपर्क: टनल कम्युनिकेशन

​दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भूभागों, विशेषकर कश्मीर की ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) जैसी परियोजनाओं में संचार एक बड़ी बाधा थी। इसे दूर करने के लिए अत्याधुनिक ‘सुरंग संचार प्रणाली’ (Tunnel Communication System) स्थापित की जा रही है।

  • निर्बाध रेडियो संपर्क: यह तकनीक सुनिश्चित करती है कि लंबी सुरंगों के अंदर काम करने वाले कर्मी, लोको पायलट और नियंत्रण कक्ष के बीच रेडियो संपर्क कभी न टूटे। इससे आपातकालीन स्थितियों में समन्वय और सुरक्षा कई गुना बढ़ गई है।

​निष्कर्ष: डिजिटल इंडिया की पटरी पर दौड़ती रेलवे

​भारतीय रेलवे का यह कायाकल्प प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन के अनुरूप है। तकनीक का यह समावेश केवल दिखावा नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और कुशल रेलवे इकोसिस्टम की नींव है। 2025-26 के ये आंकड़े गवाही देते हैं कि भारतीय रेल अब एक ऐसी आधुनिक प्रणाली की ओर बढ़ रही है, जो न केवल यात्रियों की ज़रूरतों के प्रति संवेदनशील है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

AI का नजरिया: रेलवे का यह ‘स्मार्ट अवतार’ स्वागत योग्य है। जब तकनीक ‘वॉचमैन’ की भूमिका निभाती है, तो मानवीय गलतियों की गुंजाइश कम हो जाती है। उम्मीद है कि यह ‘डिजिटल सुरक्षा कवच’ जल्द ही देश के हर छोटे-बड़े स्टेशन का हिस्सा बनेगा!

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