
मई महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई का लगातार दूसरा बड़ा झटका लेकर आई है। पहले 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई और अब 5 किलो वाले छोटे यानी ‘छोटू’ सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। नई दरों के अनुसार 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹261 की वृद्धि की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत ₹549 से बढ़कर ₹810 हो गई है।
यह बढ़ोतरी खास तौर पर उन लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है, जो सीमित आय में गुजारा करते हैं। छोटे सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से मजदूर, छात्र, छोटे दुकानदार और अस्थायी रूप से शहरों में रहने वाले लोग करते हैं। ऐसे में यह फैसला सीधे तौर पर समाज के कमजोर और निम्न आय वर्ग को प्रभावित करेगा।
दोहरी मार: कमर्शियल और छोटू दोनों महंगे
गौरतलब है कि इसी दिन सुबह ही 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹993 की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,078.50 से बढ़कर ₹3,071.50 हो गई। अब 5 किलो सिलेंडर के महंगे होने से महंगाई का असर और व्यापक हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोहरी मार आने वाले दिनों में बाजार पर बड़ा असर डाल सकती है। जहां कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल और रेस्टोरेंट में खाने की कीमतें बढ़ेंगी, वहीं छोटे सिलेंडर के महंगे होने से आम लोगों के घरेलू खर्च में भी इजाफा होगा।
सबसे ज्यादा असर किन पर?
5 किलो वाला छोटा सिलेंडर उन लोगों के लिए बेहद जरूरी होता है, जो स्थायी रूप से किसी एक जगह नहीं रहते। जैसे कि प्रवासी मजदूर, छात्र और छोटे कामगार।
- मजदूर वर्ग: जो लोग रोज कमाते और रोज खाते हैं, उनके लिए ₹261 की बढ़ोतरी बहुत बड़ा झटका है।
- छात्र: दूसरे शहरों में पढ़ाई करने वाले छात्र, जो छोटे कमरे या हॉस्टल में रहते हैं, वे इसी सिलेंडर पर खाना बनाते हैं। उनके मासिक बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
- छोटे दुकानदार: ठेले, रेहड़ी और छोटे ढाबा चलाने वाले लोग भी इसी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। अब उनके लिए कारोबार चलाना महंगा हो जाएगा।
बढ़ती महंगाई से बिगड़ेगा बजट
इस बढ़ोतरी के बाद आम आदमी का बजट पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। पहले ही खाने-पीने की चीजों, किराए और बिजली के खर्च में बढ़ोतरी हो रही थी, अब गैस के दाम बढ़ने से घरेलू खर्च और बढ़ जाएगा।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। छोटे-छोटे खर्च भी अब लोगों के लिए बोझ बनते जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
गैस की कीमतों में इस उछाल के पीछे वैश्विक परिस्थितियां भी एक बड़ी वजह मानी जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एलपीजी की कीमतों पर पड़ा है। खासकर ईरान से जुड़े हालात के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में गैस का आयात किया जाता है।
प्रवासी मजदूरों पर बढ़ा दबाव
महंगाई के इस दौर में सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर देखने को मिल रहा है। पहले से ही कई शहरों में रोजगार की स्थिति कमजोर है और अब बढ़ती लागत के कारण कई लोग अपने गांव लौटने को मजबूर हो सकते हैं।
दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे बड़े शहरों में पहले से ही कुछ मजदूरों का पलायन शुरू हो चुका है। अब छोटे सिलेंडर के महंगे होने से यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
क्या मिल सकती है राहत?
फिलहाल सरकार की ओर से इस बढ़ोतरी को लेकर कोई राहत की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर होती हैं, तो भविष्य में कुछ राहत मिल सकती है।
उपभोक्ताओं की मांग है कि सरकार को छोटे सिलेंडर पर सब्सिडी देने पर विचार करना चाहिए, ताकि गरीब और जरूरतमंद वर्ग को राहत मिल सके।
कुल मिलाकर, 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹261 की बढ़ोतरी ने आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यह केवल एक सिलेंडर की कीमत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ने वाला असर है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या आने वाले समय में आम लोगों को किसी तरह की राहत मिल पाती है या नहीं। फिलहाल तो महंगाई का यह नया झटका लोगों के बजट को पूरी तरह हिला देने वाला साबित हो रहा है।


