​33% आरक्षण से बदलेगा राजनीति का चेहरा: मंत्री श्रेयसी सिंह

पटना। बिहार की राजनीति और सत्ता संरचना में महिलाओं की भागीदारी को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण विमर्श देखने को मिला। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा युगांतरकारी कदम बताया। श्रेयसी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं है, बल्कि उस आधी आबादी के लिए न्याय की घोषणा है जो दशकों से अपने प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर रही थी। उनके अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होना न केवल समानता का प्रश्न है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि देश अब महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र में देखने के लिए तैयार है। यह प्रेस वार्ता उस समय आयोजित की गई जब देश में इस कानून के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं।

सत्ता में भागीदारी: केवल प्रतिनिधित्व नहीं, सुशासन की मजबूती

​प्रेस वार्ता के दौरान श्रेयसी सिंह ने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही, वह महिलाओं के प्रशासनिक कौशल से जुड़ी थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब महिलाएं शासन व्यवस्था का हिस्सा बनती हैं, तो वे केवल एक पद नहीं संभालतीं, बल्कि वे अपने साथ संवेदनशीलता, पारदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति लेकर आती हैं। श्रेयसी सिंह के मुताबिक, महिलाओं का राजनीति में आना शासन को अधिक समावेशी और मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मूल प्रश्न यह है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए किस प्रकार का समाज बनाना चाहते हैं। एक ऐसा समाज जहाँ नेतृत्व केवल एक जेंडर तक सीमित न हो, बल्कि जहाँ प्रतिभा और सेवा भाव को सर्वोच्च स्थान मिले।

​भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जहाँ सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां अधिक हैं, वहां महिलाओं की सक्रिय भागीदारी समस्याओं के समाधान में एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है। श्रेयसी सिंह ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं ने जिस तरह से काम किया है, उसने यह साबित कर दिया है कि वे शासन की बारीकियों को समझने और उन्हें लागू करने में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। अब इसी शक्ति को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कानून के माध्यम से स्थापित किया जा रहा है, जिससे भारतीय लोकतंत्र की जड़ें और गहरी होंगी।

अधिनियम की तकनीकी बारीकियां और समावेशी ढांचा

​नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 जिसे संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष सत्र में पारित किया गया था, अब अपने क्रियान्वयन के निर्णायक चरण में है। श्रेयसी सिंह ने इसकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की कुल सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए कोटा निर्धारित किया गया है।

​यह प्रावधान इस कानून को अत्यंत समावेशी बनाता है, क्योंकि यह समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ी महिलाओं को भी नेतृत्व के अवसर प्रदान करता है। श्रेयसी सिंह ने कहा कि भाजपा के लिए यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं रहा है, बल्कि यह एक प्रतिबद्धता रही है जिसे अब कानूनी जामा पहनाया गया है। इस आरक्षण से महिलाओं की सहभागिता के साथ-साथ उनका वास्तविक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, जिससे नीतियों के निर्माण में महिलाओं के जीवन से जुड़े मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिल सकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार और वैश्विक संदेश

​प्रेस वार्ता में श्रेयसी सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि दशकों से लटका हुआ महिला आरक्षण का मुद्दा आज कानून का रूप ले चुका है। श्रेयसी सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री ने न केवल भारत के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यह सिद्ध किया है कि नारी शक्ति के बिना विकास का कोई भी मॉडल सफल नहीं हो सकता।

​उन्होंने जी-20 जैसे आयोजनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) को केंद्र में रखा गया था। श्रेयसी सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने महिलाओं को केवल लाभार्थी (Beneficiary) के रूप में नहीं देखा, बल्कि उन्हें विकास का वाहक (Driver of Growth) बनाया है। उज्ज्वला योजना से लेकर मुद्रा लोन और अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम तक, हर कदम महिलाओं को आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में उठाया गया है।

बिहार के संदर्भ में महिला आरक्षण का महत्व

​बिहार, जो देश का पहला ऐसा राज्य था जिसने पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया, वहां इस केंद्रीय कानून का महत्व और बढ़ जाता है। श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार की महिलाओं ने पहले ही साबित कर दिया है कि अवसर मिलने पर वे गांव और शहर की तस्वीर बदल सकती हैं। अब 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से बिहार विधानसभा में भी महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे राज्य के विकास से जुड़ी योजनाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मुखर होगी।

​खेल मंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्रेयसी सिंह ने कहा कि जिस तरह से खेल के मैदान में बेटियां देश का नाम रोशन कर रही हैं, उसी तरह अब विधानसभाओं और संसद के भीतर भी वे कानून बनाने की प्रक्रिया में अपनी मेधा का प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने बताया कि इस कानून के आने से युवा लड़कियों के बीच राजनीति को एक करियर के रूप में देखने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।

प्रेस वार्ता में मौजूद वरिष्ठ नेताओं का स्वर

​इस प्रेस वार्ता में श्रेयसी सिंह के साथ भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरण घई और विधायक संगीता कुमारी भी उपस्थित थीं। किरण घई ने अपने संबोधन में कहा कि यह अधिनियम भारतीय राजनीति के पुरुष प्रधान ढांचे को तोड़ने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन में काम करने वाली लाखों महिला कार्यकर्ताओं के लिए यह एक सम्मान की बात है कि उनकी पार्टी ने इस ऐतिहासिक सुधार का नेतृत्व किया।

​विधायक संगीता कुमारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब महिलाएं केवल प्रचार या जनसंपर्क तक सीमित न रहें, बल्कि वे सदन के भीतर बैठकर नीतियों पर बहस करें और उन्हें प्रभावित करें। प्रेस वार्ता में मौजूद अन्य प्रदेश प्रवक्ताओं ने भी इस कानून को ‘अमृत काल’ की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि आने वाले चुनावों में इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

विपक्ष की चुनौतियों और समाज की अपेक्षाओं पर विचार

​महिला आरक्षण को लेकर श्रेयसी सिंह ने उन चुनौतियों पर भी चर्चा की जो अक्सर विपक्ष द्वारा उठाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि जो दल इस पर सवाल उठाते हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनके पास भी सत्ता में रहते हुए ऐसा करने का अवसर था, लेकिन उनमें इच्छाशक्ति की कमी थी। श्रेयसी सिंह ने समाज से भी अपील की कि वे इस कानून का स्वागत करें और अपने परिवार की महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रोत्साहित करें।

​उनके अनुसार, केवल कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि एक ऐसा वातावरण बनाना भी जरूरी है जहाँ महिलाएं बिना किसी डर या संकोच के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि 33 प्रतिशत आरक्षण से न केवल महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि राजनीति में अपराधीकरण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी लगाम लगेगी, क्योंकि महिलाएं स्वभाव से अधिक अनुशासित और जवाबदेह होती हैं।

निष्कर्ष: एक नए राजनीतिक युग का उदय

​श्रेयसी सिंह की यह प्रेस वार्ता उस बदलते भारत की एक झलक पेश करती है जहाँ महिलाएं अब याचक नहीं, बल्कि नीति-निर्धारक बन रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल सीटों के बंटवारे का खेल नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता पर प्रहार है जो महिलाओं को दूसरे दर्जे का नागरिक समझती थी। 33 प्रतिशत आरक्षण से राजनीति का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा और इसमें कोई संदेह नहीं है कि आने वाले वर्षों में हम अधिक सशक्त, समृद्ध और संतुलित भारत देखेंगे।

​खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अपनी बातों से यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा इस कानून को लेकर कितनी गंभीर है और वे चाहती हैं कि बिहार की महिलाएं इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं। जब संसद और विधानसभाओं की एक तिहाई कुर्सियों पर महिलाएं बैठेंगी, तब सही मायने में भारत का लोकतंत्र पूर्ण होगा।

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