
कटिहार। बिहार के कटिहार जिले में शनिवार की शाम एक ऐसी भयावह त्रासदी की गवाह बनी, जिसने न केवल पूरे कोढ़ा प्रखंड को हिलाकर रख दिया, बल्कि राज्य की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेशनल हाईवे-31 (NH-31) पर स्थित बसगड़ा चौक के समीप दातपुर मुसहरी के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे में अब तक 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 25 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के बाद मौके पर केवल मलबे का ढेर और इंसानी चीखें ही बाकी रह गईं। एक अनियंत्रित बस, एक पिकअप वैन, एक ट्रक और दो मोटरसाइकिलों के बीच हुई इस शृंखलाबद्ध भिड़ंत ने हाईवे को कत्लगाह में तब्दील कर दिया। प्रारंभिक जांच में इस सामूहिक हत्याकांड का मुख्य कारण बस चालक की घोर लापरवाही और उसका नशे में धुत होना बताया जा रहा है। शाम के धुंधलके में हुई इस घटना ने प्रशासन और स्थानीय लोगों को राहत कार्य के लिए कड़ी मशक्कत करने पर मजबूर कर दिया।
हादसे का खौफनाक मंजर: जब चीखों से दहल उठा एनएच-31
शनिवार, 11 अप्रैल 2026 की शाम जब सूरज ढल रहा था और हाईवे पर आवाजाही सामान्य थी, तभी कोढ़ा थाना क्षेत्र के बसगड़ा चौक पर अचानक मौत ने दस्तक दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हरदा से पूर्णिया की ओर जा रही एक तेज रफ्तार बस अचानक अनियंत्रित हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस इतनी तेज थी कि वह सड़क पर लहरा रही थी। दातपुर मुसहरी चौक के पास पहुँचते ही बस ने सामने से आ रही एक पिकअप वैन को जोरदार टक्कर मार दी।
यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप वैन के परखच्चे उड़ गए और वह सड़क किनारे जा गिरी। लेकिन तबाही यहीं नहीं रुकी; बस की गति इतनी अधिक थी कि वह पास से गुजर रहे एक ट्रक और दो मोटरसाइकिलों से भी जा टकराई। मोटरसाइकिलों पर सवार चार लोगों की तो मौके पर ही जान चली गई। टक्कर के बाद बस का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और भीतर बैठे यात्री एक-दूसरे के ऊपर जा गिरे। देखते ही देखते हाईवे पर खून से लथपथ शव और तड़पते हुए घायलों का अंबार लग गया।
नशे में धुत चालक और रफ्तार का कहर
इस पूरी त्रासदी का सबसे विचलित करने वाला पहलू बस चालक का व्यवहार रहा। बस में सवार यात्रियों और सड़क किनारे मौजूद लोगों का आरोप है कि बस चालक पूरी तरह से नशे की हालत में था। वह हरदा से निकलने के बाद से ही बस को खतरनाक तरीके से चला रहा था। बताया जा रहा है कि इस बड़े हादसे से पहले भी रास्ते में उसने एक-दो जगह छोटी टक्कर मारी थी, लेकिन उसने गति कम करने के बजाय बस को और तेज भगाना शुरू कर दिया।
नशे में धुत चालक ने न केवल अपनी जान जोखिम में डाली, बल्कि उन दर्जनों लोगों की जिंदगी भी तबाह कर दी जो अपने घरों की ओर लौट रहे थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चालक ने नशे की हालत में स्टियरिंग पर से नियंत्रण खो दिया था, जिसके कारण बस रॉन्ग साइड में चली गई और सामने से आ रहे वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना एक बार फिर हाईवे पर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ होने वाली चेकिंग की पोल खोलती है।
मौत का तांडव: सड़कों पर बिछी लाशें और मची अफरा-तफरी
हादसे के तुरंत बाद का नजारा अत्यंत हृदयविदारक था। पिकअप वैन और बस के मलबे के बीच दबे लोग मदद के लिए पुकार रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि उन्हें लगा जैसे कोई बम फटा हो। जब वे दौड़कर मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि सड़क पर शव बिखरे पड़े थे। 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें मोटरसाइकिल सवार और पिकअप वैन में बैठे लोग शामिल हैं।
घायलों की संख्या 25 के पार बताई जा रही है। कई घायलों की स्थिति इतनी नाजुक है कि उन्हें तुरंत पूर्णिया या भागलपुर रेफर करने की आवश्यकता पड़ रही है। स्थानीय सरकारी अस्पतालों में बेड कम पड़ गए और घायलों को फर्श पर लिटाकर प्राथमिक उपचार देना पड़ा। मृतकों में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं, जो इस हादसे का शिकार हुए। आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है क्योंकि कई यात्रियों के शरीर के अंगों में गंभीर आंतरिक चोटें आई हैं।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई: राहत और बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही कटिहार पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया। कटिहार एसपी शिखर चौधरी दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे और राहत कार्य की कमान संभाली। कोढ़ा थाना पुलिस और आसपास के थानों की पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। एसपी शिखर चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि शनिवार शाम कोढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत गेड़ाबाड़ी के समीप यह भीषण दुर्घटना हुई।
पुलिस ने बताया कि अब तक 10 व्यक्तियों की दुखद मृत्यु की पुष्टि हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि घायलों को बेहतर इलाज हेतु नजदीकी बड़े अस्पतालों में भेजा जा रहा है। पुलिस ने हाईवे पर क्रेन बुलाकर क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया ताकि यातायात व्यवस्था को सुचारू किया जा सके। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। पुलिस ने आरोपी बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश जारी है, जो हादसे के बाद फरार होने में सफल रहा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा के सवाल
इस भीषण हादसे पर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कटिहार के कद्दावर नेता तारकिशोर प्रसाद ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया (एक्स) पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि बसगड़ा चौक पर हुई यह सड़क दुर्घटना अत्यंत दुखद है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की और बताया कि वे लगातार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में हैं ताकि घायलों को श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा मिल सके।
तारकिशोर प्रसाद ने जनता से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की भी अपील की। हालांकि, स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी रोष है कि एनएच-31 पर अक्सर तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से गश्त और चेकिंग का अभाव रहता है। लोगों का सवाल है कि एक नशे में धुत चालक इतनी लंबी दूरी तक बस कैसे चलाता रहा और किसी भी चेक पोस्ट पर उसे क्यों नहीं रोका गया?
यातायात नियमों की अनदेखी और भविष्य की चुनौतियां
कटिहार का यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन 10 लोगों की सामूहिक मृत्यु ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हाईवे पर चलने वाले भारी वाहनों के चालकों की नियमित स्वास्थ्य और नशा जांच की व्यवस्था न होना एक बड़ा छेद है। एनएच-31 जैसे व्यस्त मार्ग पर, जहाँ हजारों गाड़ियाँ दिन-रात दौड़ती हैं, वहां सुरक्षा मानकों का पालन न होना जानलेवा साबित हो रहा है।
पुलिस महानिरीक्षक और परिवहन विभाग को अब इस दिशा में कड़े कदम उठाने होंगे। बस, ट्रक और पिकअप जैसे व्यावसायिक वाहनों के लिए गति सीमा निर्धारित करना और उसका कड़ाई से पालन कराना अब अनिवार्य हो गया है। इसके अलावा, नशे में ड्राइविंग करने वालों के लिए केवल जुर्माना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परमिट और लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द करने जैसे कड़े दंडात्मक प्रावधानों की आवश्यकता है।
एक काला धब्बा
11 अप्रैल 2026 की यह शाम कटिहार के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद रखी जाएगी। 10 परिवारों के चिराग बुझ गए और दर्जनों लोग अब जीवन भर के लिए अपंगता या सदमे का शिकार हो गए हैं। प्रशासन द्वारा 25 घायलों को अस्पताल पहुँचाना और यातायात सुचारू करना भले ही उनकी ड्यूटी का हिस्सा हो, लेकिन असली जिम्मेदारी उन मौतों को रोकने की थी जो एक शराबी चालक की सनक के कारण हुईं।
The Voice of Bihar की टीम उन सभी पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि न केवल इस मामले के दोषियों को कड़ी सजा मिले, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाईवे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। जब तक सड़कों पर ‘नशे की रफ्तार’ को कानून की लगाम नहीं लगेगी, तब तक विकास की ये सड़कें इसी तरह मासूमों के खून से लाल होती रहेंगी। कटिहार की यह चीख पूरे बिहार के लिए एक चेतावनी है।


