श्रावणी मेले से पहले तैयारियों की रफ्तार पर सवाल, कांवड़िया पथ पर अब भी अधूरी हैं कई व्यवस्थाएं

भागलपुर, 17 जुलाई: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत में अब महज कुछ दिन शेष रह गए हैं, लेकिन सुल्तानगंज से देवघर तक जाने वाले कांवड़िया पथ पर अब भी कई आवश्यक तैयारियां अधूरी दिखाई दे रही हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं, ऐसे में प्रशासनिक तैयारियों को लेकर स्थानीय लोगों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ने लगी है।

श्रावणी मेला पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित देश के कई राज्यों से श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं और यहां उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर लंबी पैदल यात्रा शुरू करते हैं। लाखों श्रद्धालुओं की इस यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन की ओर से हर वर्ष व्यापक तैयारियां की जाती हैं, लेकिन इस बार कई कार्य अब भी अधूरे नजर आ रहे हैं।

जिला प्रशासन की ओर से अजगैविनाथ गंगा घाट और नमामि गंगे घाट पर तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। इन स्थानों पर सफाई, बैरिकेडिंग, रोशनी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर काम जारी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि घाटों को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि दूसरी ओर कांवड़िया पथ की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। कई स्थानों पर मिट्टी और बालू बिछाने का काम अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप रास्ते के कई हिस्सों में कीचड़ और गड्ढों की समस्या बनी हुई है, जिससे पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़िया पथ के कई हिस्से अभी भी जर्जर स्थिति में हैं। हाल की बारिश के कारण कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति बन गई है और रास्ता फिसलन भरा हो गया है। ऐसे में यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य पूरे नहीं किए गए तो लाखों श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। धांधली और बेलारी क्षेत्रों में कांवड़ियों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था के तहत बड़े स्तर पर जर्मन हैंगर तैयार किए जा रहे हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के विश्राम, भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इन अस्थायी शिविरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि लंबी यात्रा के दौरान श्रद्धालु आराम कर सकें। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि इन कार्यों को और तेजी से पूरा करने की आवश्यकता है क्योंकि मेले की शुरुआत अब काफी नजदीक आ चुकी है।

मेला क्षेत्र में बनाए गए पार्किंग स्थलों की स्थिति भी फिलहाल पूरी तरह संतोषजनक नहीं मानी जा रही है। कई स्थानों पर अभी तक शौचालय, पेयजल और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जबकि श्रावणी मेले के दौरान हजारों वाहनों और लाखों लोगों की आवाजाही होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पार्किंग क्षेत्रों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने पर यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इन स्थलों पर जल्द से जल्द आवश्यक इंतजाम पूरे किए जाने की जरूरत है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई कामों में देरी हो रही है। उनका कहना है कि प्रशासन ने समय रहते तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीन पर कार्यों की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही है।

कांवड़िया पथ के कई हिस्सों में बालू बिछाने का कार्य अधूरा है। कुछ स्थानों पर केवल औपचारिक रूप से बालू डाली गई है, जबकि कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु नंगे पांव यात्रा करते हैं। ऐसे में रास्ते का समतल और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। यदि रास्ते में कीचड़ और जलजमाव रहेगा तो इससे दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका भी बढ़ सकती है।

दूसरी ओर कांवड़िया पथ के किनारे स्थानीय दुकानदारों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई स्थानों पर अस्थायी दुकानों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि श्रद्धालुओं का आना शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में उनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी।

इन दुकानों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भोजन, पेयजल, पूजा सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा कई स्थानों पर विश्राम और रुकने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे यात्रियों को राहत मिलती है।

व्यापारियों का मानना है कि श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दौरान हजारों छोटे व्यवसायियों और दुकानदारों की आय का बड़ा हिस्सा इसी मेले पर निर्भर करता है।

श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज शहर पूरी तरह धार्मिक माहौल में बदल जाता है। सड़कों पर भगवा वस्त्र धारण किए श्रद्धालुओं की भीड़, भक्ति गीतों की धुन और हर तरफ गूंजते जयकारे पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक वातावरण में बदल देते हैं।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक तैयारी किए जाने का दावा किया जा रहा है। पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, चिकित्सा शिविर और नियंत्रण कक्ष की स्थापना जैसी व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी प्राथमिक उपचार केंद्र और एंबुलेंस सेवाओं की व्यवस्था की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा अग्निशमन और आपदा प्रबंधन दलों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को कांवड़िया पथ और पार्किंग स्थलों की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि यदि इन बुनियादी सुविधाओं को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो लाखों श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल, शौचालय, रोशनी और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही रास्ते की मरम्मत और बालू बिछाने के कार्य को भी तेजी से पूरा करने की आवश्यकता बताई जा रही है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से तैयारियों को युद्ध स्तर पर पूरा करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीन पर स्थिति को देखकर स्थानीय लोग और श्रद्धालु अभी भी चिंतित नजर आ रहे हैं। आने वाले कुछ दिन प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इसी अवधि में अधिकांश अधूरे कार्यों को पूरा करना होगा।

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचेंगे। ऐसे में प्रशासनिक तैयारियों की सफलता ही तय करेगी कि श्रद्धालुओं को कितनी सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा मिल पाती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शेष बचे दिनों में तैयारियों की रफ्तार कितनी तेज होती है और क्या सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी हो पाती हैं।

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