
पटना, 23 जुलाई 2025: बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (Systematic Intensive Revision – SIR) के तहत अब तक के विश्लेषण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक:
- 18.66 लाख मतदाता मृत पाए गए हैं,
- 26.01 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में स्थानांतरित हो चुके हैं, और
- 7.50 लाख से अधिक लोगों ने दो या अधिक स्थानों पर नामांकन करवा रखा है।
यह अभियान राज्य में 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जा रहा है, जिसमें सभी पात्र मतदाताओं को सम्मिलित करने का लक्ष्य है।
राजनीतिक दलों की भागीदारी और संयुक्त प्रयास
राज्य के सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों द्वारा नियुक्त किए गए लगभग 1 लाख बीएलओ (Booth Level Officer), 4 लाख स्वयंसेवक, और 1.5 लाख BLA (Booth Level Agents) मतदाता गणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। उनका मुख्य कार्य उन मतदाताओं को खोजकर उनका विवरण सुनिश्चित करना है, जिन्होंने अभी तक अपना गणना फॉर्म (Enumeration Form) नहीं भरा है या अपने पते पर अनुपस्थित पाए गए हैं।
अब तक की प्रमुख प्रगति (24 जून 2025 तक)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल निर्वाचक | 7,89,69,844 |
| प्राप्त गणना फॉर्म | 7,16,04,102 (90.67%) |
| डिजिटाइज किए गए फॉर्म | 7,13,65,460 (90.37%) |
| अनुपस्थित निर्वाचक | 52,30,126 (6.62%) |
| मृतक निर्वाचक | 18,66,869 (2.36%) |
| स्थानांतरित निर्वाचक | 26,01,031 (3.29%) |
| दोहराव वाले नाम | 7,50,742 (0.95%) |
| जिनका पता नहीं चला | 11,484 (0.01%) |
| कुल सम्मिलित निर्वाचक | 7,68,34,228 (97.30%) |
| शेष फॉर्म | 21,35,616 (2.70%) |
जनता के लिए खुली प्रक्रिया: 1 अगस्त से दर्ज करा सकेंगे आपत्तियां
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के कार्यालय ने बताया कि 24 जून 2025 के आदेश के अनुसार, 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच कोई भी नागरिक ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार से संबंधित आपत्तियां दर्ज करा सकेगा। इसके लिए सभी जिलों में पर्याप्त सुविधा केंद्रों की व्यवस्था की जाएगी।
राजनीतिक दलों को भी दी गई विस्तृत जानकारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और बीएलओ द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। अब तक 21.35 लाख ऐसे मतदाताओं की सूची राजनीतिक दलों को दी जा चुकी है जिनके फार्म अभी तक नहीं मिले हैं।
SIR के दौरान मिले ये आंकड़े राज्य में मतदाता सूची की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम हैं। यह प्रक्रिया न केवल मतदाता की प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगी, बल्कि चुनावों को ज्यादा पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में भी मददगार सिद्ध होगी।


