
भागलपुर, 9 जुलाई 2025: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में “राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को वैश्विक मानकों तक उठाने, शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण और प्रतिभा पलायन की जगह प्रतिभा वापसी” विषयक एक उच्चस्तरीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर सुनील परीक ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।
ब्रेन ड्रेन से ब्रेन गेन की ओर भारत
अपने संबोधन में प्रो. परीक ने भारत में प्रतिभा पलायन (Brain Drain) की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) स्नातकों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है, फिर भी वैश्विक पेटेंट में भारतीय भागीदारी 0.5% से भी कम है।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या दोगुनी हो चुकी है और उनमें से 75% छात्र भारत नहीं लौटते। इससे हर साल भारत को करीब 17 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है।
प्रो. परीक ने बताया कि यदि केवल 1% प्रतिभाशाली युवा भी भारत लौटें, तो देश की GDP में 2 बिलियन डॉलर वार्षिक वृद्धि संभव है। उन्होंने चीन के “थाउज़ेंड टैलेंट्स प्रोग्राम” और “यंग थाउज़ेंड टैलेंट प्रोग्राम” का हवाला देते हुए भारत में भी ऐसे दीर्घकालिक प्रतिभा वापसी कार्यक्रम अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
नीतिगत सुधार और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी का आह्वान
प्रो. परीक ने भारत की प्रतिभा नीति पर SWOT विश्लेषण प्रस्तुत किया और सुझाव दिया कि:
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश को GDP के 2% तक बढ़ाया जाए।
- GIAN, VAJRA और अटल इनोवेशन मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय छात्र कार्यालय स्थापित किए जाएं।
- नीति में पारदर्शिता, नवाचार को प्रोत्साहन और प्रशासनिक सरलीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह का दृष्टिकोण
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा:
“हमारा लक्ष्य है कि 2047 तक किसानों की वार्षिक आय ₹10–12 लाख हो और BAU सबौर एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बने। शिक्षा को अब केवल प्रतिभा को रोकने तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उसे वापस लाने की भी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने छात्र-प्रतिधारण, अनुसंधान की स्वतंत्रता, प्रशासनिक पारदर्शिता और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा सहयोग जैसे बिंदुओं पर आधारित कई केस स्टडी प्रस्तुत कीं। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि BAU को वैश्विक रैंकिंग में अग्रणी बनाने के लिए अकादमिक उत्कृष्टता एवं विदेशी संस्थानों के साथ सहयोग आवश्यक है।
उपस्थित गण एवं समापन
इस संगोष्ठी में डॉ. ए. के. सिंह (अनुसंधान निदेशक), डॉ. एस. के. पाठक (डीन, स्नातकोत्तर अध्ययन), विभिन्न विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं शोध छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणास्पद और नीति-निर्माण की दिशा में उपयोगी बताया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की वैश्विक शिक्षा दृष्टि को साकार करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिसमें भारत को उच्च शिक्षा में ‘विश्वगुरु’ बनाने की आकांक्षा को दोहराया गया।


