पटना (बिहार): विधानसभा चुनाव की घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच कांग्रेस ने दिल्ली में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में 75 से 80 सीटों का चयन कर लिया है और उम्मीदवारों के नाम पर भी सहमति बना ली है।
कांग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची की तैयारी की
दिल्ली में आयोजित बैठक में अजय माकन, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद और मदन मोहन झा मौजूद रहे। बैठक में तय हुआ कि हर सीट पर तीन-तीन नाम शॉर्टलिस्ट किए जाएं। अब उनमें से एक नाम पर सहमति बन गई है। अंतिम मुहर सीडब्ल्यूसी की बैठक में लगेगी, जिसके बाद सूची बिहार प्रदेश कांग्रेस को सौंप दी जाएगी।
अपने शर्तों पर समझौते की तैयारी
कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस बार आरजेडी के दबाव में नहीं रहेगी। पार्टी 70 से कम सीटों पर मानने को तैयार नहीं है, जबकि महागठबंधन में उसे करीब 60 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। 2020 में कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार 10 सीटें कम हो सकती हैं।
“पार्टी ने आरजेडी पर दबाव बना दिया है कि सीट शेयरिंग जल्द की जाए, वरना कांग्रेस अपने उम्मीदवार खुद घोषित कर देगी।” – अशोक मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक
महागठबंधन में समीकरण
- आरजेडी : 2020 में 144 सीटों पर लड़ी थी, इस बार करीब 130 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी।
- कांग्रेस : 60 सीटों की संभावना, लेकिन 70 से कम मंजूर नहीं।
- सीपीआई(एमएल) : बेहतर स्ट्राइक रेट के चलते 25-27 सीटें मिल सकती हैं (5 सीटों का फायदा)।
- वीआईपी (मुकेश साहनी) : 14-15 सीटों की संभावना।
- भाकपा (CPI) : 10 सीटें।
- सीपीएम : 6 सीटें।
- पशुपति पारस की पार्टी : 2-3 सीटें।
- आईपी गुप्ता की पार्टी : 2 सीटें।
दिल्ली में हो रही सियासत
दिल्ली में बैठकों का दौर लगातार जारी है। कांग्रेस का कहना है कि वह उन सीटों पर ही उम्मीदवार उतारेगी, जहां उसकी जीत की संभावना है। वहीं, महागठबंधन के अन्य घटक दलों के बीच नए साझेदारों के आने से सीट बंटवारे की चुनौती और बढ़ गई है।


