बिहार में 20 साल बाद आरा मिलों को मिलेगा लाइसेंस, अवैध मिलों पर होगी कार्रवाई

480 नए लाइसेंस होंगे जारी, दो दिवसीय शिविर में मिलेगा समाधान

पटना, 29 जुलाई।राज्य में दो दशक बाद आरा मिल संचालकों को वैध लाइसेंस देने की प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इस दिशा में द्विवसीय शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसमें लंबित लाइसेंस मामलों की सुनवाई कर पात्र संचालकों को लाइसेंस दिए जाएंगे।

मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में वन मंत्री डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि राज्य में औपबंधिक वरीयता सूची के अनुसार कुल 2720 आरा मिलों को पूर्व में लाइसेंस मिला था। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय शिविर में रिन्यूअल, ट्रांसफर और लोकेशन बदलाव से जुड़े मामलों का भी त्वरित समाधान किया जाएगा।

बिना लाइसेंस कोई मिल नहीं चलेगी, होगी कड़ी कार्रवाई

वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिना वैध लाइसेंस के संचालित किसी भी आरा मिल को बंद किया जाएगा। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि अब एक भी अवैध आरा मिल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों में जांच अभियान चलाकर ऐसे मिलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

लाइसेंस नवीनीकरण होगा आसान

मंत्री ने बताया कि विभाग लाइसेंस रिन्यूअल प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए नई नीति पर काम कर रहा है। “जो लाइसेंसधारी वर्षों से नवीनीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें अब नई प्रक्रिया के तहत राहत मिलेगी,” उन्होंने कहा।

480 नए आरा मिल लाइसेंस मिलेंगे

सरकार ने इस शिविर के माध्यम से 480 नए आरा मिल लाइसेंस जारी करने का भी निर्णय लिया है। मंत्री ने बताया कि “राज्य में कुल 3200 आरा मिलों को लाइसेंस देने की क्षमता है और विभाग इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है।”


 

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