सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के तरीके पर संजय राउत ने उठाए सवाल, बोले- सरकार बताए क्या हुआ समझौता?

नई दिल्ली: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिन लंबे अनशन के समाप्त होने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वांगचुक स्वस्थ हैं और उन्होंने अनशन समाप्त किया, लेकिन यह प्रक्रिया जंतर-मंतर पर आंदोलनकारी छात्रों और आम जनता की मौजूदगी में होनी चाहिए थी, न कि केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति में।

‘सरकार बताए क्या आश्वासन दिया गया’

संजय राउत ने कहा कि जिस सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, उसी सरकार के दो केंद्रीय मंत्री अनशन समाप्त कराने के समय मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने वांगचुक को क्या आश्वासन दिया और उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। यदि यह मांग पूरी नहीं हुई, तो अनशन समाप्त करने का आधार क्या था, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

‘घायल छात्रों के हाथों टूटता अनशन तो बेहतर होता’

राउत ने कहा कि यदि सोनम वांगचुक को अनशन समाप्त करना ही था, तो बेहतर होता कि वे जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों या आंदोलन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों के हाथों जूस पीकर अपना अनशन तोड़ते। उनके अनुसार इससे आंदोलन की भावना का अधिक सम्मान होता।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शिवसेना (UBT) सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को दबाने और बदनाम करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सोनम वांगचुक के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा व्यापक जनआंदोलन था।

मुंबई में प्रदर्शन की तैयारी

संजय राउत ने बताया कि मुंबई में भी बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उनके अनुसार आदित्य ठाकरे और विभिन्न संगठनों की ओर से ‘राष्ट्रगान आंदोलन’ आयोजित किया जाएगा, जबकि रविवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में मार्च निकाला जाएगा।

सोनम वांगचुक के त्याग की सराहना

राउत ने कहा कि देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के लिए 26 दिनों तक अनशन करना बड़ा त्याग है और इसके लिए सोनम वांगचुक सम्मान के पात्र हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वांगचुक आगे भी शिक्षा सुधार और युवाओं के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।

इसके अलावा उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार मौजूदा कानूनों की भावना के अनुरूप काम नहीं कर रही है और नए कानूनों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • ये भी पढ़े..

    CJP प्रदर्शनकारियों के पासपोर्ट रद्द होने की खबरों पर दिल्ली पुलिस का बड़ा बयान, अफवाहों का किया खंडन

    Share Add as a preferred…