मुंगेर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मेगा दौरा: गंगा पथ परियोजनाओं से बदलेगी अंग प्रदेश की सूरत; योग विद्यालय में ली आध्यात्मिक ऊर्जा

मुंगेर/सफियाबाद। बिहार की सत्ता की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज पहली बार मुंगेर की ऐतिहासिक धरती पर एक नए विजन और विकास के संकल्प के साथ पहुँचे। सफियाबाद स्थित हेलीपैड पर मुख्यमंत्री का आगमन किसी उत्सव से कम नहीं था, जहाँ उन्होंने न केवल प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की, बल्कि सुरक्षा घेरे को दरकिनार कर आम जनमानस के बीच जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।

यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भागलपुर और मुंगेर के बीच यातायात की गंभीर चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं ‘गंगा पथ’ (Ganga Path) जैसी महात्वाकांक्षी परियोजनाओं की कमान अपने हाथों में ले ली है। सफियाबाद से लेकर बरियारपुर और सुल्तानगंज से लेकर सबौर तक के प्रस्तावित और निर्माणाधीन मार्गों की समीक्षा कर सम्राट चौधरी ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वे केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर काम देखना चाहते हैं। इस दौरे का एक आध्यात्मिक पहलू भी रहा, जब मुख्यमंत्री विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय पहुँचे और वहां की शांत वादियों में कुछ समय व्यतीत कर योग परंपरा के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया।

सफियाबाद हेलीपैड पर भव्य स्वागत: जनता से सीधा जुड़ाव

मंगलवार की दोपहर जैसे ही मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर सफियाबाद हेलीपैड पर उतरा, पूरा इलाका ‘सम्राट चौधरी जिंदाबाद’ के नारों से गूँज उठा। हेलीपैड पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के आला अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की अगवानी की। औपचारिक स्वागत के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने जनता की ओर रुख किया। धूप और गर्मी की परवाह किए बिना वहां हजारों की संख्या में लोग अपने मुख्यमंत्री की एक झलक पाने के लिए खड़े थे। मुख्यमंत्री ने हाथ हिलाकर सबका अभिवादन स्वीकार किया और कई लोगों के पास जाकर उनके मांग पत्र भी लिए। यह दृश्य दर्शाता है कि सम्राट चौधरी अपनी छवि एक ‘जननेता’ के रूप में स्थापित करने के लिए कितनी मेहनत कर रहे हैं। हेलीपैड पर मौजूद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया, जिसे मुख्यमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में और बढ़ा दिया।

गंगा पथ परियोजनाओं की समीक्षा: विकास का नया रोडमैप
मुख्यमंत्री के मुंगेर दौरे का मुख्य एजेंडा क्षेत्र की चरमराई यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करना और निर्माणाधीन मेगा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करना था। सफियाबाद में ही आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सम्राट चौधरी ने मुंगेर और भागलपुर जिलों के बीच कनेक्टिविटी को लेकर गंभीर विमर्श किया। इस बैठक में मुख्य रूप से दो बड़े खंडों पर चर्चा हुई:

1. मुंगेर (सफियाबाद) – बरियारपुर – घोरघट – सुल्तानगंज गंगा पथ:  यह मार्ग मुंगेर को भागलपुर के प्रवेश द्वार सुल्तानगंज से जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने इस पथ के निर्माण में आ रही बाधाओं, विशेषकर भू-अधिग्रहण और वन विभाग की क्लीयरेंस को लेकर अधिकारियों से जवाब-तलब किया।
2. सुल्तानगंज – भागलपुर – सबौर गंगा पथ:** विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद यह मार्ग भागलपुर के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने इस पथ को सबौर तक विस्तारित करने और इसके निर्माण की गति को तेज करने के सख्त निर्देश दिए।

सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को दो-टूक कहा कि सुल्तानगंज से भागलपुर और फिर सबौर तक का यह पूरा कॉरिडोर अंग प्रदेश के आर्थिक विकास की धुरी बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और समय सीमा के भीतर काम पूरा करना होगा ताकि आम जनता को धूल और जाम से मुक्ति मिल सके। बैठक में पथ निर्माण विभाग के सचिव और मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

विक्रमशिला सेतु संकट और गंगा पथ की अहमियत
वर्तमान में भागलपुर और मुंगेर के बीच की दूरी तय करना किसी चुनौती से कम नहीं है। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद सारा दबाव अब सुल्तानगंज और मुंगेर के वैकल्पिक मार्गों पर आ गया है। ऐसे में ‘सुल्तानगंज-भागलपुर-सबौर गंगा पथ’ का निर्माण और उसकी समीक्षा करना मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता को दर्शाता है। यह मार्ग न केवल शहर के भीतर के जाम को कम करेगा, बल्कि भारी वाहनों के लिए एक बाईपास की तरह काम करेगा। सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया कि इस मार्ग को फोर-लेन मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके। घोरघट और बरियारपुर के पास बन रहे पुलों और एप्रोच रोड की स्थिति पर भी मुख्यमंत्री ने असंतोष जाहिर करते हुए कार्य की निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया।

बिहार योग विद्यालय: आध्यात्मिकता और शांति का अनुभव
विकास की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री का काफिला विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय (Bihar School of Yoga)पहुँचा। मुंगेर की पहाड़ियों पर स्थित यह संस्थान पूरी दुनिया में योग और अध्यात्म का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। मुख्यमंत्री ने वहां स्वामी निरंजनानंद सरस्वती के सानिध्य में कुछ समय बिताया। योग विद्यालय परिसर की शांति और वहां की अनुशासित जीवनशैली को देखकर सम्राट चौधरी काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि मुंगेर की पहचान केवल इतिहास और उद्योग से नहीं, बल्कि योग की इस महान परंपरा से भी है जिसे पूरी दुनिया सम्मान की नजर से देखती है।

मुख्यमंत्री ने विद्यालय के पुस्तकालय और शोध केंद्र का भी भ्रमण किया। उन्होंने योग के प्रचार-प्रसार में संस्थान के योगदान की सराहना की और इसे बिहार का गौरव बताया। राजनैतिक आपाधापी के बीच योग विद्यालय का यह दौरा मुख्यमंत्री के लिए एक मानसिक विश्राम जैसा रहा। संस्थान की ओर से उन्हें योग साहित्य और स्मृति चिह्न भी भेंट किया गया। सम्राट चौधरी ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार योग और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

जनता की उम्मीदें और सम्राट का संकल्प

मुंगेर के इस संक्षिप्त लेकिन सघन दौरे ने यह साफ कर दिया है कि सम्राट चौधरी का ध्यान बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के निर्माण पर केंद्रित है। सफियाबाद से सबौर तक का गंगा पथ यदि समय पर पूरा होता है, तो यह भागलपुर और मुंगेर के बीच व्यापारिक क्रांति लाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उन छोटे पुल-पुलियों का भी जिक्र किया जो बरियारपुर और घोरघट के बीच जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे छोटे मार्गों की मरम्मत का भी प्रस्ताव भेजें ताकि मुख्य सड़क पर दबाव कम हो सके।

मुख्यमंत्री के जाने के बाद स्थानीय लोगों में यह उम्मीद जगी है कि अब लटकी हुई परियोजनाएं जल्द पूरी होंगी। सम्राट चौधरी ने जिस तरह से सफियाबाद हेलीपैड पर लोगों से सीधे संवाद किया, उससे यह संदेश गया है कि वे जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर हैं। गंगा पथ परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय में एक विशेष सेल को भी सक्रिय रहने का निर्देश दिया है। मुंगेर और भागलपुर की जनता अब सात मई के मंत्रिमंडल विस्तार और उसके बाद शुरू होने वाले विकास कार्यों की झड़ी का इंतजार कर रही है। सम्राट चौधरी का यह दौरा अंग प्रदेश की नई राजनैतिक और प्रशासनिक इबारत लिखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष रिपोर्ट

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