पटना में भाजपा दफ्तर के बाहर सम्राट चौधरी का पोस्टर लगा, फिर कार्यकर्ताओं ने ही हटाया; बढ़ी सियासी चर्चा

पटना, 9 अप्रैल 2026 — बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रही सियासी सरगर्मी के बीच राजधानी पटना में एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी के समर्थन में लगाए गए पोस्टर ने अचानक राजनीतिक हलचल तेज कर दी। हालांकि, कुछ ही देर बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने खुद ही उस पोस्टर को फाड़कर हटा दिया, जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।

सीएम रेस के बीच पोस्टर ने बढ़ाई चर्चा

दरअसल, बिहार में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर एनडीए के भीतर नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन जारी है। इस बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा है। ऐसे समय में भाजपा कार्यालय के बाहर उनके समर्थन में पोस्टर लगाए जाने को सियासी संकेत के तौर पर देखा जाने लगा।

पोस्टर में ‘बाल्मीकि समाज संघ’ के नाम से सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई थी। साथ ही इसमें कुछ स्थानीय मुद्दों को भी उठाया गया था, जिससे यह स्पष्ट था कि पोस्टर के जरिए एक खास संदेश देने की कोशिश की जा रही थी।

कार्यकर्ताओं ने ही पोस्टर हटाया

जैसे ही इस पोस्टर की जानकारी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं तक पहुंची, तत्काल प्रतिक्रिया सामने आई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पोस्टर को फाड़कर हटा दिया। यह कार्रवाई काफी तेजी से की गई, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

भाजपा ने झाड़ा पल्ला

पूरे मामले पर भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह पोस्टर पार्टी की ओर से अधिकृत रूप से नहीं लगाया गया था। पार्टी नेताओं ने कहा कि जिन लोगों ने यह पोस्टर लगाया है, उनका भाजपा से कोई संबंध नहीं है।

इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम से दूरी बनाना चाहती है।

राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई अटकलें

हालांकि, पोस्टर लगाने और फिर उसे हटाने की इस घटना ने सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे अंदरूनी खींचतान, समर्थकों की सक्रियता या फिर दबाव की राजनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

नीतीश के दिल्ली दौरे के बीच बढ़ी हलचल

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए दिल्ली रवाना हो रहे हैं। उनके संभावित इस्तीफे और नई सरकार के गठन की चर्चा के बीच हर छोटा-बड़ा राजनीतिक संकेत अहम माना जा रहा है।

आने वाले दिन होंगे निर्णायक

फिलहाल बिहार की राजनीति में हर दिन नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पद को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह तय है कि आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले होंगे।

पोस्टर विवाद ने यह जरूर साफ कर दिया है कि सत्ता परिवर्तन से पहले सियासी गतिविधियां अपने चरम पर हैं और हर घटना को अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

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