सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, कुर्सी संभालते ही दिए 5 बड़े निर्देश

बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सत्ता संभालते ही उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि उनकी सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक्शन मोड में काम करेगी। शपथ लेने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने सचिवालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और प्रशासन को स्पष्ट दिशा देने के लिए पांच सूत्रों का एजेंडा पेश किया।

मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी पहली बैठक का संदेश साफ था कि अब प्रशासनिक ढांचे में बदलाव होगा और कामकाज की गति तेज की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बिहार में अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा, बल्कि परिणाम देने वाली कार्यशैली अपनानी होगी।

सबसे पहले उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह उच्च अधिकारी हो या निचले स्तर का कर्मचारी। उनका स्पष्ट संदेश था कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रिश्वत या देरी के सीधे आम जनता तक पहुंचना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय और जवाबदेह बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फाइलों को लंबित रखने और सिर्फ औपचारिकता निभाने की प्रवृत्ति को खत्म करना होगा। आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर स्तर पर काम की मॉनिटरिंग की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उनके पांच सूत्रों में दूसरा बड़ा फोकस अफसरशाही पर नियंत्रण और जवाबदेही तय करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब अधिकारी सिर्फ पद का लाभ उठाने के बजाय जिम्मेदारी निभाने पर ध्यान दें। जनता से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता दोनों जरूरी हैं।

तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु कामकाज की रफ्तार बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास कार्यों की गति दोगुनी की जाए और योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए तेज और प्रभावी कार्यशैली जरूरी है।

चौथे सूत्र के रूप में उन्होंने संवेदनशील प्रशासन पर जोर दिया। उनका कहना था कि सरकारी तंत्र को आम लोगों की समस्याओं को समझना होगा और उनके समाधान के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता के साथ संवाद बनाए रखें और उनकी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं।

पांचवां और बेहद अहम मुद्दा भूमि विवाद को लेकर सामने आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 60 से 70 प्रतिशत विवाद जमीन से जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों के समाधान के लिए सरल और प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रखंड, अंचल और थाना स्तर पर ही अधिकतर मामलों का निपटारा सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें अपने पूर्व अनुभवों से यह समझ मिली है कि जमीनी स्तर पर लोगों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सात निश्चय योजनाओं और विभिन्न यात्राओं के दौरान मिली सीख का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन अनुभवों को नीतियों में शामिल कर राज्य को तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

नई सरकार के गठन के साथ ही कैबिनेट का ढांचा भी चर्चा में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह, सामान्य प्रशासन, निगरानी, स्वास्थ्य, राजस्व एवं भूमि सुधार, उद्योग, कृषि, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी सहित कुल 29 महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। इसके अलावा वे उन विभागों के भी प्रभारी रहेंगे, जो फिलहाल किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।

उपमुख्यमंत्री को शिक्षा, उच्च शिक्षा, जल संसाधन, भवन निर्माण, ग्रामीण विकास, परिवहन और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं दूसरे उपमुख्यमंत्री को वित्त, ऊर्जा, योजना एवं विकास, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण और ग्रामीण कार्य जैसे विभाग दिए गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट संतुलन और रणनीति दोनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे सरकार को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है, जिसमें सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

नई सरकार के शुरुआती संकेतों से यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशासनिक सख्ती और तेज विकास को प्राथमिकता देना चाहते हैं। उनका पांच सूत्रीय एजेंडा आने वाले दिनों में सरकार की कार्यशैली को तय करेगा।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये घोषणाएं जमीन पर किस हद तक उतरती हैं और क्या वास्तव में बिहार में प्रशासनिक सुधार और विकास की नई गति देखने को मिलती है। फिलहाल, जनता और राजनीतिक हलकों की नजर नई सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई है।

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